समाज का शिक्षा पर प्रभाव

शिक्षा पर समाज के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है, क्योंकि समाज शिक्षा की व्यवस्था करता है। इस प्रभाव को जा सकता है- 1- समाज के स्वरूप का प्रभाव –  समाज के स्वरूप का शिक्षा की पकृति पर प्रभाव पड़ता है, जैसा समाज का स्वरूप होगा वह शिक्षा को वैसे ही व्यवस्थित करता है। भारत …

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अंतर्राष्‍ट्रीयता की अवधारणा एवं विशेषताएं

जब दो या दो से अधिक व्यक्ति क्षेत्र, जाति, लिंग, धर्म, संस्कृति, व्यवसाय अथवा अन्य किसी आधार पर ‘हम’ की भावना से बंधे रहेते हैं तो इसे भावात्मक एकता कहते हैं। मनुष्य आरम्भ से केवल अपने बारे में सोचता था धीरे-धीरे उसने दूसरो के विषय में सोचना प्रारम्भ किया जब समाज का निर्माण हुआ फिर एक …

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पत्रकारिता का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

पत्रकारिता : अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र‘ में ‘पत्रकारिता’ शब्द का अर्थ, पत्रकारिता कार्य से आशय एव पत्रकारिता की परिभाषाओ की चर्चा की गर्इ है। जैसा कि आप जानते हैं कि इस पाठयक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रो में प्रयोजनमूलक हिन्दी के प्रति जागरूकता लाना है। इस अध्याय में पत्रकारिता और पत्रकार के रिश्ते, पत्रकार के गुण, …

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समाचार के प्रकार

समाचार क्या है? समाचार की संरचना, समाचार के तत्व, समाचार बनने योग्य तत्व, समाचार लेखन की प्रकिया एवं भाषा एवं शैली जानने के बाद समाचार के प्रकार के बारे में जानना अत्यंत जरूरी है क्योंकि कर्इ प्रकार की घटनाए इस संसार में रोज घटती है। उनमे से कुछ घटनाए समाचार बनती है और इस प्रकार कर्इ …

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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय

आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना गाँव में हुआ था। बाल्यकाल से ही आपने संस्कृत का ज्ञान प्राप्त किया एवं इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की। तभी से आपकी साहित्यिक प्रवृत्तियाँ सजग रहीं। 26 वर्ष की उम्र में’ हिन्दी-शब्द-सागर’ के सहकारी संपादक हुए एवं नौ वर्षों तक ‘नागरी …

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आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

श्री हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 में बलिया (उत्तरप्रदेश) जिले के आरत दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था । काशी में उन्होंने प्रवेशिका, इंटर व ज्योतिष में आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। पहले वे मिर्जापुर के एक विद्यालय में अध्यापक हुए, वहाँ पर आचार्य क्षितिजमोहन सेन ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और …

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कविवर बिहारी लाल का जीवन परिचय

कविवर बिहारी रीतिकाल के सप्रसिद्ध व चिर्र्चत कवि है। इनका जन्म संवत् 1653 में ग्वालियर के निकट वसुआ गोविन्दपुरा गांव में हुआ था। आमेर के मिर्जा राजा जय सिंह के आश्रम में रहकर उन्होंंने सतसर्इ की रचना की । संवत् 1721 में वे परमधाम चले गये।। रचनाएँ- बिहारी सतसर्इ (700 दोहो का संग्रह उसकी सतसर्इ में …

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अलंकार के प्रकार

‘‘अलंकार’’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है- आभूषण या सुन्दरता । जैसे आभूषण नारियों का श्रृंगार है, उसी प्रकार साहित्य में शब्दों और अर्थों में चमत्कार लाने वाले तत्व ‘अलंकार’ हैं। अलंकार के लक्षण- शब्द और अर्थ में सौंदर्य उत्पन्न करने वाली वर्णन शैली को ‘अलंकार’ कहते हैं। या ‘‘काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व या …

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छंद के अंग एवं प्रकार

परिभाषा- निश्चित चरण, वर्ण, मात्रा, गति, यति, तुक और गण आदि के द्वारा नियोजित पद्य रचना को छंद कहते हैं। छंद के अंग चरण या पाद –चरण को पाद भी कहते हैं। एक छन्द में प्राय: चार चरण होते हैं। चरण छन्द का चौथा हिस्सा होता है। प्रत्येक पाद में वर्णों या मात्राओं की संख्या निश्चित होती …

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गजानन माधव मुक्तिबोध का जीवन परिचय

इनका जन्म 13 नबम्बर, 1917 में म.प्र. के शिवपुरी में हुआ था । इन्होंने बी.ए. तक अध्ययन प्राप्त किया । आर्थिक संकटों के बावजूद इन्होंने अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच एवं वैज्ञानिक उपन्यासों में विशेष रूचि ली । 11 सितम्बर 1964 में मृत्यु हुर्इ । रचनाएँ- कविता संग्रह-’’चाँद का मुँह टेढ़ा हैं’’ तार सप्तक ।  समीक्षा- एक पुनर्विचार, …

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