भारतीय संविधान की प्रस्तावना एवं विशेषताएं

‘‘प्रस्तावना भारतीय संविधान का सबसे बहुमूल्य अंग है, यह संविधान की आत्मा है, यह संविधान की कुंजी है यह वह उचित मापदण्ड है, जिसमें संविधान की सहजता नापी जाती है, यह स्वयं में पूर्ण है। हम चाहेंगे कि संविधान के सभी उपबन्धों को इसी प्रस्तावना की कसौटी से जांचना चाहिए और तभी यह निर्णय करना चाहिए …

Read more

राज्य के नीति निर्देशन तत्व

‘‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उद्देश्य जनता के कल्याण को प्रोत्साहित करने वाली सामाजिक अवस्था का निर्माण करना है।’’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार – ‘‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का पालन करके भारत की भूमि को स्वर्ग बनाया जा सकता है।’’  एम. सी. छागला के अनुसार – भारतीय संविधान का लक्ष्य न केवल राजनीतिक प्रजातन्त की …

Read more

प्रेस परिषद अधिनियम 1978 क्या है ?

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता मौलिक अधिकार है तथा यहाँ पर प्रेस भी स्वतन्त्र है। ऐसे में विचारों की अभिव्यक्ति के लिये प्रेस एक महत्वपूर्ण व सशक्त माध्यम है। अभिव्यक्ति की स्वतन्ता के कारण अनेक अवसरों पर ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है जब इसका दुरुपयोग किसी व्यक्ति की मानहानि, झूठे दोषारोपण आदि के लिये …

Read more

प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1867 क्या है ?

समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पुस्तक आदि के प्रकाशन में प्रेस यानि प्रिटिंग मशीन की प्रमुख भूमिका है। इसके साथ ही समाचार पत्र आदि के प्रकाशन में संपादक, प्रकाशक व मुद्रक की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी पत्र पत्रिका में कोर्इ अवांछित सामग्री प्रकाशित हो जाती है तो ऐसे में प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1867 के तहत …

Read more

शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923

यह निर्विवाद है कि देश की एकता और अखण्डता अत्यन्त महत्वपूर्ण चीज होती है और इनकी रक्षा के लिये कोर्इ भी बलिदान दिया जा सकता है। आखिर हमारे देश के वीर सपूत इन्हीं की रक्षा के लिये तो अपना जीवन तक न्योछावर कर सर्वोच्च बलिदान दे देते हैं। ऐसे में यदि कोर्इ सूचना ऐसी हो जिसका …

Read more

औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954

भारत में यद्यपि आज शिक्षा का प्रचार प्रसार बहुत हो चुका है और शिक्षा की दर (Literacy rate) भी बढ़ गया है किन्तु इसके बावजूद अवैज्ञानिक उपचार, तंत्र-मंत्र, जादू-टोने इत्यादि के प्रति लोगों में अन्धविश्वास की कमी नहीं है। ऐसे में लोग तमाम लार्इलाज रोगों के उपचार के लिये ऐसे उपायों पर आसानी से विश्वास कर …

Read more

भारत में विज्ञापन का उद्धव, विकास एवं उद्देश्य

आदिकाल से ही भारत में विभिन्न अवसरों पर विज्ञापन अपने किसी न किसी स्वरूप में उपस्थित रहा है। आध्यात्मिक से लेकर पौराणिक कहानियों में अनेक घटनाओं का उल्लेख मिलता है जिससे बड़े आधार पर ‘विज्ञापन’ के लिए तत्कालीन प्रचार-माध्यमों का प्रयोग किया गया था। ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी करवाना या डुगडुगी बजाकर राजाओं के निर्देशों के …

Read more

भारतीय विज्ञापन परिषद की आचार संहिता

विज्ञापन कंपनियां विज्ञापन को आकर्षक बनाने की होड़ में कर्इ बार नैतिकता की सीमाओं का उल्लंघन करने लगती हैं। विज्ञापन में उत्तेजक और अश्लील दृश्य, अतिकल्पना, असत्य सूचनाओं, द्विअर्थी संवादों आदि का प्रयोग करते हुए उत्पाद को ऐसे आकर्षक, भ्रामक और मोहक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो उसकी वास्तविक प्रकृति से बिल्कुल भिन्न होता …

Read more

जनसंपर्क क्या है ?

जनसंपर्क का अर्थ है जनता से संपर्क। जनता से यह सम्पर्क क्यों किया जाता है, किस उद्देश्य के लिये किया जाता है ? इससे क्या लाभ-हानि होती है यह सब जनसंपर्क के अन्र्तगत आता है। जनसंपर्क का अर्थ इतना सरल होते हुए भी इसे परिभाषित करना इतना आसान नहीं है क्योंकि जनसंपर्क अपने आप में एक …

Read more

जनसंपर्क के उद्देश्य

जनसंपर्क का क्षेत्र आज बेहद बड़ा गया हो गया है। इसके अंतर्गत नए नए प्रयोग हो रहे है और इससे जनसंपर्क के उद्देश्यों का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जनसंपर्क एक कार्य विशेष न रहकर अब कला हो गयी है। वर्तमान में लोक प्रशासन में जनसंपर्क के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार है : 1. …

Read more