कुपोषण के लक्षण, कारण एवं उपाय

कुपोषण पोषण वह स्थिति है जिसमें भोज्य पदार्थ के गुण और परिणाम में अपर्याप्त होती है। आवश्यकता से अधिक उपयोग द्वारा हानिकारक प्रभाव शरीर में उत्पन्न होने लगता है तथा बाहृा रूप से भी उसका कुप्रभाव प्रदर्शित हो जाता है। जब व्यक्ति का शारीरिक मानसिक विकास असामान्य हो तथा वह अस्वस्थ महसूस करे या न भी …

Read more

परिवार नियोजन का अर्थ, महत्व एवं पद्धतियां

भारत विश्व में पहला देश है जिसने परिवार नियोजन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर अपनाया है भारत सन् 1951 से जनसंख्या को सीमित करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बढ़ती हुर्इ जनसंख्या और सीमित साधनों में नियन्त्रण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि जनसंख्या पर नियन्त्रण किया जाए। शाब्दिक रूप …

Read more

असामान्य मनोविज्ञान की अवधारणा

मनोविज्ञान और मनोरोग का एक लम्बा इतिहास है जो सामान्य और असामान्यता के प्रतिवाद के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। असामान्यता मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की ही एक शाखा है। जिसके अन्तर्गत असामान्य व्यवहार को विवेचित करते हैं। असामान्यता का शाब्दिक अर्थ सामान्यता से विचलन है। आप आश्चर्यचकित होंगे कि इसे ही असामान्य व्यवहार कहते है। असामान्य व्यवहार …

Read more

पंच-परमेश्वर कहानी – मुंशी प्रेमचंद

जुम्मन शेख और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खान-पान का व्यवहार था, न धर्म का …

Read more

73वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताएं

स्वतन्त्रता पश्चात देश को सुचारू रूप से चलाने के लिये हमारे नीति निर्माताओं द्वारा भारतीय संविधान का निर्माण किया गया। इस संविधान में नियमों के अनुरूप व एक नियत प्रक्रिया के अधीन जब भी कुछ परिवर्तन किया जाता है या उसमें कुछ नया जोड़ा जाता है अथवा हटाया जाता है तो यह संविधान संशोधन अधिनियम कहलाता …

Read more

प्रोटीन के कार्य

प्रोटीन नाम सर्वप्रथम सन् 1938 में वैज्ञानिक मुल्डर (Mulder) द्वारा प्रस्तावित किया गया। इस शब्द का उद्गम ग्रीक भाषा के ‘‘प्रोटियोस’’ (Proteose) शब्द से हुआ जिसका आशय है ‘पहले आने वाला’ (To come first)। यह नाम इसलिए प्रस्तावित हुआ क्योंकि उस समय भी यह तत्व जीवन के लिए सबसे प्रमुख तत्व माना जाता था। मानव शरीर …

Read more

प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग

प्रोटीन की उचित मात्रा हमारे आहार में सम्मिलित होना परम आवश्यक है। प्रोटीन की कमी के परिणामस्वरुप हमारे शरीर पर अत्यधिक बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसा अनुमान है कि भारतवर्ष में प्रतिवर्ष लगभग दस लाख बच्चों की मृत्यु प्रोटीन के अभाव एवं कुपोषण के परिणामस्वरुप होती है। प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण लक्षणों की एक लम्बी श्रृखंला है …

Read more

उपचारात्मक पोषण क्या है ?

आहार का बीमारी से बहुत महत्वपूर्ण संबंध होता है। रोग, रोग की गम्भीरता, रोगी के पोषण स्तर के अनुसार आहार को सुधारा जा सकता है। अत: एक साधारण, स्वस्थ्य व्यक्ति द्वारा लिये जाने वाले आहार में कुछ विशेष बदलाव लाकर उसे रोग की आवश्यकतानुसार सुधारा जा सकता है। आहार में बदलाव या सुधार की मात्रा रोग …

Read more

अतिसार के लक्षण एवं कारण

मल का अधिक मात्रा में अधिक पतला तथा बार-बार निकलने की अवस्था को अतिसार कहते हैं। इसमें मल पदार्थ बड़ी आंत वाले भाग में इतनी शीघ्रता से आगे बढ़ते हैं कि द्रव्य पदार्थो को अवषोशित होने का मौका ही नहीं मिल पाता जिससे पूर्णत: न बने हुए ही मल उत्सर्जित हो जाता है। अतिसार में उचित …

Read more

जनसंचार की अवधारणा

बीसवीं सदी के आरम्भिक समय को हम मास मीडिया का आरम्भिक काल कह सकते हैं। इस काल में संचार माध्यमों तथा संचार की तकनीक में व्यापक बदलाव आने शुरु हुए। बीसवीं शताब्दी के दूसरे-तीसरे दशक में बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य में मीडिया के बड़ते हुए प्रभाव को देखते हुए मीडिया की शक्ति, सामाजिक प्रभाव और सामाजिकों …

Read more