व्यावसायिक सामाजिक कार्य का विकास

सन् 1935 मे सामूहिक कार्यकताओं मे व्यावसायिक चेतना जागृत हुर्इ इस वर्ष समाज कार्य की राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में सामाजिक सामूहिक कार्य को एक भाग के रूप में अलग से एक अनुभाग बनाया गया इसी वर्ष सोशल वर्क र्इयर बुक में सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य पर अलग से एक खण्ड के रूप में कर्इ लेख प्रकाशित किये …

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समाज कल्याण प्रशासन क्या है ?

सामाजिक सेवाओं से सम्बन्धित विभिन्न समान अथ्री शब्दों जैसे सामाजिक प्रशासन, समाज सेवा प्रशासन, सामाजिक सुरक्षा प्रशासन, कल्याण प्रशासन, लोक कल्याण प्रशासन, सामाजिक संस्था प्रशासन के कारण समाज कल्याण प्रशासन के वास्तविक अर्थ के सम्बन्ध भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती हैए परन्तु वास्तव में समाज कल्याण प्रशासन उस क्रियाविधि को कहते है जिसके द्वारा सामाजिक संस्था …

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सामाजिक नीति की अवधारणा एवं उद्देश्य

स्वतंत्रता प्राप्ति के पष्चात् सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए नियोजित विकास का सहारा लेना आवश्यक समझा गया क्योंकि यह अनुभव किया गया कि गरीबी, बेकारी जैसी अनेक गंभीर सामाजिक समस्यायें उचित विकास न होने के कारण ही हमारे समाज में व्यापक रूप से विद्यमान है सामाजिक समस्याओं को और अधिक तेज करना तथा इससे …

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सामाजिक विधान का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र एवं आवश्यकता

सामाजिक विधान का अर्थ एवं परिभाषा  योजना आयोग के अनुसार ‘‘प्रचलित कानूनों तथा वर्तमान आवश्यकताओं के बीच दूरी को कम करने वाले विधान को सामाजिक विधान कहा जा सकता है।’’ गंग्राडे तथा बत्रा के मत में ‘‘सामाजिक विधान की परिभाषा उन कानूनों के रूप में की जा सकती है जिन्हें सकारात्मक मानव संसाधन को बनाये रखने …

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महिलाओं से संबंधित कानून

महिलाओं से संबंधित कानून 1. मातृत्व लाभ अधिनियम (1961) – यह अधिनियम पूरे भारत वर्ष में महिला कर्मचारियों पर लागू होता है। यह अधिनिमय अधिकतम 12 सप्ताह का अवकाश उन महिलाओं को प्रदान करता है जो मातृत्व सुख प्राप्त करती है। यह लाभ प्राप्त करने वाली महिला माँ बनने के दिन के ठीक पहले 6 सप्ताह तथा …

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सामुदायिक विकास का अर्थ, परिभाषा

शाब्दिक रूप से सामुदायिक विकास का अर्थ- समुदाय का विकास या प्रगति। इसके पश्चात भी सामुदायिक विकास की अवधारणा इतनी व्यापक और जटिल है कि इसे केवल परिभाषा द्वारा ही स्पष्ट कर सकना बहुत कठिन है। जो परिभाषा दी गयी है, उनमें किसी के द्वारा एक पहलू पर अधिक जोर दिया गया है और किसी में …

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मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936

प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नही थी। बाद में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं –(1) ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा,(2) संघ की सेना या वायुसेना या भारत …

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जन स्वास्थ्य की अवधारणा

मनुष्य के जीवन और उसकी खुशी के लिए स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण किसी अन्य वस्तु की कल्पना कर पाना कठिन है क्योंकि स्वास्थ्य मानव जीवन की एक अनमोल सम्पत्ति है मानव जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकारते हुए संविधान में इसे राज्य सूची में शामिल किया गया है। यहाँ राज्य का यह दायित्व है कि …

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आहार एवं पोषण का अर्थ, परिभाषा

जीवधारियों को जैविक कार्यो के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा भोज्य पदार्थो के जैव-रासायनिक आक्सीकरण से प्राप्त होता है। सम्पूर्ण प्रक्रिया को जिसके अन्तर्गत जीवधारियों द्वारा बाह्य वातावरण से भोजन ग्रहण करके उसे कोशिका में ऊर्जा उत्पादन करने या जीवद्रव्य में स्वांगीकृत करके मरम्मत या वृद्धि में प्रयुक्त करता है; पोषण कहते है। पोषण …

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सन्तुलित आहार की परिभाषा

‘‘यह आहार सन्तुलित होता है। जिसमें सभी आहार वर्ग जैसे ऊर्जा देने वाला आहार, शरीर संवर्धन करने वाला आहार और सुरक्षातमक आहार उचित परिणाम में हों। जिससे कि व्यक्ति को सभी पोषक तत्व न्यूनतम मात्रा में प्राप्त हो जाये।’’ C.Gopalan सन्तुलित आहार वह है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थों को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में …

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