ट्रेडमार्क (Trademark) क्या है ?

जब किसी नाम, अक्षर, चिन्ह, डिजायन या चित्र का कानून के अन्तर्गत पंजीयन करा लिया जाता है तो इसे ट्रेडमार्क या व्यापार चिन्ह कहा जाता है। पंजीयन के बाद ‘‘ट्रेडमार्क’’ का उपयोग केवल इस पर अधिकार रखने वाला व्यक्ति ही कर सकता है। विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार, ‘‘ट्रेडमार्क एक ब्राण्ड है, जिसे किसी विक्रेता द्वारा …

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ब्रांड (brand) का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएँ

ब्राण्ड कोर्इ भी व्यापारिक चिन्ह है जिसके माध्यम से किसी उत्पाद को सही तरीके से पहचाना जाता है और उपभोक्ताओं द्वारा जिसका वर्णन किया जा सकता है। अत: ब्राण्ड में ऐसी कोर्इ भी क्रिया एवं उपाय सम्मिलित है, जिससे उत्पाद की पहचान करवायी जाती है। इसमें वे शब्द, लेख या अंक सम्मिलित है, जिनका उच्चारण हो …

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शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, प्रक्रिया, साधन एवं कार्य

अमरकोश में शिक्षा शब्द का प्रयोग णड्-वेदागों में से एक वेदांग के लिये प्रयुक्त हुआ है। उस समय शिक्षाशास्त्र का प्रयोजन वेदों की ऋचाओं का शुद्ध उच्चारण सिखाना था। शिक्षेत्यादि श्रुतेरंगमोंकारप्रणवौ समौ। इतिहास पुरावण्त्तमण्दात्ताद्यास्त्रय: स्वरा।। कदाचित उस युग में वेदों का पठन-पाठन ही शिक्षा का एक मात्र उद्देश्य रहा होगा, अत: ‘शिक्षा’ शब्द स्वरशास्त्र के लिये …

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शिक्षा दर्शन का अर्थ, स्वरूप एवं आवश्यकता

साधारण अर्थ में शिक्षा पद्धति दर्शन की ही एक शाखा होती है जिसमें दार्शनिक सिद्धान्तों का प्रयोग शिक्षा के सम्बंध में होता है। शिक्षा दर्शन शिक्षा से सम्बंधित विचारों पर विचार करता है और उनके समाधान के लिये दार्शनिक अर्थात् चिन्तनपूर्ण एवं निर्णयात्मक दृष्टि से प्रयत्न करता है। कनिंघम महोदय ने शिक्षा दर्शन एवं दर्शन को …

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शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदाय एवं इतिहास

“मनोविज्ञान का अतीत लम्बा है परन्तु इतिहास छोटा है।” मनोविज्ञान के तथ्यों की जानकारी पौराणिक ग्रीक दर्शनशास्त्र से मिलते है। लेकिन एक स्वतंत्र शाखा के रूप में 1879 र्इ0 में मनोविज्ञान की स्थापना हुर्इ। 1879 के बाद तथा बीसवी शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षो में कर्इ मनोवैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान की विषय-वस्तु तथा उसके अध्ययनविधि के बारे में …

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सामाजिक विकास क्या है ?

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह दूसरो के व्यवहार को प्रभावित करता है और उसके व्यवहार से प्रभावित होता है। इस परस्पर व्यवहार के व्यवस्थापन पर ही सामाजिक संबंध निर्भर होते हैं। इस परस्पर व्यवहार में रूचियों, अभिवश्त्तियों, आदतों आदि का बड़ा महत्व है। सामाजिक विकास में इन सभी का विकास सम्मिलित है। जब सामाजिक परिस्थिति …

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भूकंप का अर्थ, परिभाषा एवं भूकंप के पूर्व संकेत

भूकम्प अत्यन्त विनाशक और विध्वंशकारी, प्राकृतिक आपदा है। इसका पुनर्वनुमान नहीं हो पाता है। क्योंकि इसमें कम समय में पृथ्वी के अन्तरिक भाग से अधिक मात्रा में उर्जा का निकास होता है और पृथ्वी की पपटी हिलने और कांपने लगती है जिससे जनजीवन का अधिक विनाश और हानि होती है। भूकम्प पृथ्वी का कंपन होते है। …

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चक्रवात के प्रकार

चक्रवात एक वृहद वायुराशि है जिसमें हवायें निम्न वायुदाब की ओर घूमती हैं। इसमें निम्न वायुदाब केन्द्र में रहता है बाहर की ओर वायुदाब बढ़ता जाता है। इस निम्न वायुदाब क्षेत्र को द्रोणिका (Trough), गतिचक्र, डिपे्रशन तथा निम्न वाब केन्द्र भी कहते हैं। इसमें केन्द्र में निम्न वायुदाब के कारण हवायें बाहर चारों ओर से केन्द्र …

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सूखा का अर्थ, परिभाषा, कारण, लक्षण एवं प्रकार

सूखा एक भयंकर प्राकृतिक प्रकोप है। इसका मुख्य सम्बन्ध जल वर्षा की कमी से है। यदि किसी क्षेत्र में दीर्घकालीन समय तक सामान्य या औसत वर्षा से यथार्थ वर्षा कम मात्रा में होती है तो सूखे की दशाएं उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा अन्य कारको में उच्च तापमान, तीव्र हवाएं, सापेक्षिक आद्रता, शुष्क वनस्पति, निम्न …

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भूस्खलन के कारण

‘‘किसी भू-भाग के ढाल पर मिट्टी तथा चट्टानों के ऊपर से नीचे की ओर खिसकने, लुढ़कने या गिरने की प्रक्रिया को भूस्खलन कहा जाता है।’’ अथवा ‘‘आधार चट्टानों या आवरण स्तर का भारी मात्रा में नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है।’’ भूवैज्ञानिकों के अनुसार ‘‘भूस्खलन एक प्राकृतिक घटना है जो गुरूत्वाकर्षण बल के प्रभाव के …

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