खिलजी वंश की स्थापना एवं अन्त

खिलजी वंश (1290-1320 ई.) जलालुदुद्दीन फिरोज खलजी (1290-1296 र्इ) मलिक फिराज खलजी कबीले का तुर्क था । उसके वंश तुर्किस्तान से आये थे । उसके परिवार ने दिल्ली के तुर्की सुल्तान की नौकरी कर ली थी । बलबन के शासन काल में फिरोज उत्तर पश्चिमी सीमा का रक्षक था । वह मंगोलों के विरूद्ध कर्इ युद्ध …

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प्रबन्ध विकास

प्रबन्ध विकास, वृद्धि एंव विकास की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा प्रबन्धक अपनी प्रबन्ध करने की योग्यताओं का विकास करता है। यह केवल शिक्षण के औपचारिक पाठ्यक्रम में सहभागिता का ही नहीं,बल्कि वास्तविक कार्य अनुभव का भी परिणाम होता है।प्रबन्ध विकास में संगठन की भूमिका, इसके वर्तमान तथा सम्भावित प्रबन्धकों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन तथा …

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एक्यूप्रेशर का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

अंगुलियों या किसी कृन्द (तीखी) वस्तु द्वारा किसी बिन्दु पर उपचार देने की पद्धति को एक्यूप्रेशर कहते है, इसमें किसी विशेष स्थान पर पे्रशर देकर चिकित्सा की जाती है, प्रेशर देने से अवरूद्ध चेतना संचार होने लगता है। एक्यूप्रेशर का अर्थ – एक्यूप्रेशर दो शब्दों से मिलकर बना है, ACUS+PRESSURE- जिसमें ACUS लैटिन भाषा का शब्द …

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एक्यूप्रेशर के सिद्धान्त, एक्यूप्रेशर देने की विधि

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का मुख्य सिद्धान्त यह है कि शरीर के विभिन्न भागो में अवरूद चेतना का संचार करना प्राण व रक्त के प्रवाह में गति लाना, दाब बिन्दुओं में प्रेशर देकर रोगी को रोगमुक्त करना। इस चिकित्सा पद्धति के कर्इ लाभ है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति किसी भी तरह से बहुत कठिन य बहुत जटिल प्रकिया …

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एक्यूपंक्चर का अर्थ, परिभाषा एवं इतिहास

एक्युप्रेशर में शरीर के कुछ बिन्दुओं पर दबाव देकर उपचार करते हैं। इन बिन्दुओं को Acupoints कहते हैं। इन्हीं बिन्दुओं पर जब सुर्इ डालकर उपचार किया जाता है तो उसे Acupuncture कहते है। इन्हीं बिन्दुओं पर जब मेथी दाना और अन्य seed लगाकर उपचार करते हैं तो इसे Seed therapy कहते हैं। इन्हीं बिन्दुओं पर जब …

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एक्यूपंक्चर के सिद्धान्त एवं एक्यूपंक्चर द्वारा रोग निदान विधि

एक्युपंक्चर विज्ञान एक निश्चित नियमों एवं सिद्धान्तों पर आधारित है। इनमें प्रथम सिद्धान्त है – यिन-यांग की चिकित्सा का। 1. यिन-यांग सिद्धान्त – चायनीज एक्युपंक्चर के अनुसार सम्पूर्ण बह्माण्ड का संतुलन स्थूल रुप से दो परस्पर विरोधी स्वरुप के होते हुए भी एक दूसरे के पूरक बलों पर आधरित है। इसे यिन यांग की संज्ञा दी …

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रेकी चिकित्सा क्या है ?

रेकी चिकित्सा को पुनर्जीवित करने का श्रेय जापान के डॉ. मेकाओ उशुर्इ को हैं, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के मध्य में इस चिकित्सा को नवजीवन प्रदान किया। डॉ. उशर्इ ने कैसे रेकी का पुनरूत्थान किया इससे संबंधित एक घटना है, जिसका विवरण है- डॉ. उशुर्इ जापान के र्इसार्इ कॉलेज में डीन के पद पर कार्यरत थे। एक …

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रेकी चिकित्सा द्वारा उपचार

रेकी चिकित्सा प्राण उर्जा के सिद्धांत पर आधारित है। इस चिकित्सा पद्धति में रेकी चिकित्सक, पीड़ित या रोगी व्यक्ति में प्राणऊर्जा को प्रक्षेपित करता है। रेकी चिकित्सा के अनुसार भौतिक शरीर के अतिरिक्त हमारा एक ऊर्जा शरीर भी होता है। नकारात्मकता के कारण अथवा प्राण ऊर्जा में अवरोध आने के कारण पहले यह ऊर्जाशरीर रोगग्रस्त होता …

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प्राण चिकित्सा का अर्थ, सिद्धान्त, स्वरूप, स्रोत एवं चिकित्सा की विधि

जो अत्यप्राणचिकित्सा उपचार की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विधि है, न्त प्राचीनकाल से चली आ रही है। इसमें दृश्य या भौतिक शरीर का उपचार करने के लिये प्राण उर्जा, जिसे ओजस्वी उर्जा भी कहा जाता है, का उपयोग किया जाता है। प्राण चिकित्सा के अन्तर्गत उपचारक अपने हाथों के माध्यम से ब्रह्माण्डीय प्राणऊर्जा को ग्रहण करके हाथों द्वारा …

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प्रार्थना का अर्थ एवं परिभाषा स्वरूप

प्रार्थना का अर्थ – प्रार्थना मनुष्य की जन्मजात सहज प्रवृत्ति है। संस्कृत शब्द प्रार्थना तथा आंग्ल (इंग्लिश) भाशा के Prayer शब्द, इन दोनों में अर्थ का दृष्टि से पूरी तरह से समानता है – संस्कृत में ‘‘प्रकर्शेण अर्धयते यस्यां सा प्रार्थना’’ अर्थात प्रकर्श रूप से की जाने वाली अर्थना (चाहना अभ्यर्थना) आंग्ल भाशा का Prayer यह …

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