रक्त परिसंचरण तंत्र क्या है ?

रक्त परिसंचरण तंत्र शरीर के भीतर जो एक लाल रंग का द्रव-पदार्थ भरा हुआ है, उसी को रक्त (Blood) कहते हैं। रक्त का एक नाम रुधिर भी है रुधिर को जीवन का रस भी कहा जा सकता है। यह संपूर्ण शरीर में निरन्तर भ्रमण करता तथा अंग-प्रत्यंग को पुष्टि प्रदान करता रहता है। जब तक शरीर …

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हृदय की संरचना, कार्य, कोष्टक एवं कपाट

हृदय की संरचना हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार अन्दर से खोखला मांसल अंग होता है। यह शरीर के वक्ष भाग के वक्ष भाग में फेफडो के बीच स्थित होता है। हृदय ये ही रूधिर वाहिनियॉ रक्त को पूरे शरीर में ले जाती है। तथा फिर इसी से वापस लेकर आती है। सामान्यत: मनुष्य शरीर में रक्त …

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पाचन तंत्र के कार्य एवं प्रमुख अंग

व्यक्ति साधारण रूप में जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह वास्तव में भी तभी हमारे लिए उपयोगी होता है जब हम इस लायक हो जाये कि शरीर के अन्तर्गत रक्त कोशिकाओ एवं अन्य कोशिकाओं तक पहुॅच कर शक्ति व ऊर्जा उत्पन्न कर सके। यह कार्य पाचन प्रणाली के विभिन्न अंग मिलकर करते हैं। पाचन …

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श्वसन तन्त्र की संरचना एवं कार्य

श्वास-प्रश्वास मनुष्य के जीवन का लक्षण है। मनुष्य भोजन के अभाव में कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, जल के अभाव में कुछ घंटे बीता सकता है किन्तु श्वास-प्रश्वास अथवा वायु के अभाव में कुछ क्षणों में ही जीवन लीला पर प्रश्न चिºन स्थापित हो जाता है।शरीर विज्ञान के अनुसार यदि चार मिनट तक शरीर …

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वृक्क की संरचना एवं कार्य

मानव शरीर की उदरीय गुहा के पश्च भाग में रीढ के दोनों ओर दो वृृक्क स्थित होते हैं। ये बैगंनी रंग की रचनायें होती है जो आकार में बहुत बडी नहीं होती है। इन वृृृक्कों के पर टोपी के समान अधिवृक्क ग्रन्थियां नामक रचना पायी जाती हैं। ये वृक्क शरीर में रक्त को छानकर, रक्त की …

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मस्तिष्क की संरचना एवं कार्य

पूर्णरूप से विकसित मानवीय मस्तिष्क शरीर के भार का लगभग 1/50 होता है और कपाल गुहा (Cranial cavity) में अवस्थित रहता है। विकास की आरम्भिक अवस्था में मस्तिष्क को तीन भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें अग्रमस्तिष्क (Fore brain), मध्यमस्तिष्क (Mid brain) तथा पश्चमस्तिष्क (Hind brain) कहते हैं। 1) अग्रमस्तिष्क  यह मस्तिष्क का आगे का …

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मेरुरज्जु की संरचना एवं कार्य

तन्त्रिका तन्त्र तन्त्रिका तन्त्र शरीर का एक महत्वपूर्ण तन्त्र या संस्थान है, जो सम्पूर्ण शरीर की तथा उसके विभिन्न भागों एवं अंगों की समस्त क्रियााओं का नियन्त्रण, नियमन तथा समन्वयन करता है और समस्थिति (Homeostasis) बनाये रखता है। शरीर के सभी एवं अनैच्छिक कायोर्ं पर नियन्त्रण तथा समस्त संवेदनाओं को ग्रहण कर मस्तिष्क में पहुँचाना इसी …

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नासिका (नाक) की संरचना एवं कार्य

नासा गुहा (Nasal cavity) की श्लेश्मा, तीन छोटी अस्थियों (Nasal conchae) द्वारा कर्इ कक्षों में बँट जाती है, जो नाक की बाहरी भित्ति से आरम्भ होते हैं। तीनों अस्थियों (Nasal conchae) के कारण इस स्थान पर तीन छोटे टीलों के समान उभार बन जाते हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र पर नेजल म्यूकस मेम्बे्रन बिछी रहती है, जो कॉल्यूमनर …

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कान या कर्ण की संरचना एवं कार्य

कान या कर्ण शरीर का एक आवश्यक अंग है, जिसका कार्य सुनना (Hearing) एवं शरीर का सन्तुलन (Equilibrium) बनाये रखना है तथा इसी से ध्वनि (Sound) की संज्ञा का ज्ञान होता है। कान की रचना अत्यन्त जटिल होती है, अत: अध्ययन की दृष्टि से इसे  तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है- बाह्य कर्ण (External …

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नेत्र की संरचना एवं कार्य

आँखों या नेत्रों के द्वारा हमें वस्तु का ‘दुश्टिज्ञान’ होता है। दृष्टि वह संवेदन है, जिस पर मनुष्य सर्वाधिक निर्भर करता है। दृष्टि (Vision) एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश किरणों के प्रति संवेदिता, स्वरूप, दूरी, रंग आदि सभी का प्रत्यक्ष ज्ञान सन्निहित है। आँखें अत्यन्त जटिल ज्ञानेन्द्रियाँ हैं, जो दायीं-बायीं दोनों ओर एक-एक नेत्रकोटरीय गुहा …

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