स्वदेशी आन्दोलन क्या है ?

स्वदेशी आन्दोलन बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं इसके दो …

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उग्रवादी तथा क्रांतिकारी आन्दोलन (1906-1919 र्इ.)

उग्रवाद के उदय के कारण 1. राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 र्इ. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने कहा , ‘भारतीयों को अब भिखारी बने रहने में ही संतोष नहीं करना चाहिए और न उन्हें अंग्रेजों …

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लखनऊ समझौता क्या है ?

1913 र्इ. में मुस्लिम लीग पर राष्ट्रवादी मुसलमानो का प्रभाव अत्यन्त प्रबल हो गया। इसी वर्ष लीग ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके अनुसार लीग का उदेश्य औपनिवेशिक राज्य की प्राप्ति निश्चित हुआ। 1914 र्इ. में लीग ने भारत के अन्य जातियों के राजनीतिक नेताओं से मिलकर काम करने का निश्चय किया। काँग्रेस एवं लीग को …

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रॉलेक्ट एक्ट क्या है ?

प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों ने अंगरेजी साम्राज्य की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक सहयागे किया। उन्हें यह उम्मीद थी कि युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगी। लेकिन सरकार की भारतीयों को स्वायत्तता देने की कोर्इ इच्छा नहीं थी। वह तो देश में फैल रही राष्ट्रीयता एवं …

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भारत सरकार अधिनियम 1919

सन 1919 में जलियावाला बाग की दुर्घटना के विरोध में दिल्ली, लाहौर आदि स्थानों में उपद्रव हुए और पंजाब के कुछ भागों में फौजी शासन लगा दिया गया। नेताओं की गिरफ्तारी से असंतोष की अग्नि और भडक उठीं इस तूफान तथा विपत्ति के वातावरण में 1918 की रिपाटेर् में की गर्इ शिफारिशों से युक्त एक बिल …

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गोलमेज सम्मेलन

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तीव्रता को देखकर ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं ब्रिटिश राजनीतिज्ञों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया जाएगा। इसमें साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर भारत की राजनीतिक समस्या पर विचार-विमर्श होगा। प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर 1930-19 जनवरी 1931) प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड की …

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अम्ल पित्त – कारण, लक्षण एवं वैकल्पिक चिकित्सा

अम्ल पित्त रोग से आशय – सर्वप्रथम् यह जानना आवश्यक है कि अम्ल पित्त है क्या है ? आयुर्वेद में कहा गया है- अम्लं विदग्धं च तत्पित्तं अम्लपित्तम्। जब पित्त कुपित होकर अर्थात् विदग्ध होकर अम्ल के समान हो जाता है, तो उसे अम्ल पित्त रोग की संज्ञा दी जाती है। पित्त को अग्नि कहा जाता …

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मोटापा के कारण, लक्षण एवं वैकल्पिक चिकित्सा

आज नि:संदेह मोटापा विश्व के अनेक देशों मे सर्वव्यापी समस्या के रूप में चिकित्सा विज्ञान के लिए बन गया है। मोटापा बढ़ने के साथ – साथ यह अनेक रोगों को जन्म देता है। यह शारीरिक अंगों की कुशलता को कम कर उनके कार्यो को प्रभावित करता है। मोटापे से अनेक रोग उत्पन्न होते है। जैसे – …

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क्रांतिकारी आंदोलन

क्रांतिकारी आंदोलन की पृष्ठभूमि  भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की एक पृथक धारा क्रांतिकारी आंदोलन है। भारत के नवयुवकों का एक वर्ग हिंसात्मक संघर्ष को राजनीतिक प्राप्ति के लिए आवश्यक मानते थे। वे स्वयं को मातृभूमि के लिए बलिदान करने को तैयार थे और हिंसक माध्यमों से ब्रिटिश शासन को भयभीत कर, आतंकित कर देश से निकाल देना …

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वामपंथी आंदोलन का उद्भव एवं विकास

भारत में वामपंथी आंदोलन का उद्भव बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। सन् 1917 र्इ. में हुर्इ रूस की साम्यवादी राज्यक्रांति की सफलता ने भारतीय उग्र राष्ट्रवादियों की भावना को समाजवाद की आरे मोड़ दिया। असहयोग आंदोलन की असफलता ने उनके इस विचार को दृढ़ता प्रदान की। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् बढ़ती हुर्इ मंहगार्इ और बेरोजगारी …

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