आंग्ल-सिक्ख युद्ध

प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845 र्इ.) कारण रानी झिन्दन की कूटनीति-रणजीतसिंह की मृत्यु के बाद सिक्ख सेना के अधिकारियों ने उत्तराधिकारी-युद्ध में और दरबार के षड्यंत्रो में अत्यन्त सक्रियता से भाग लिया। उनकी शक्ति और उच्छृंखलता इतनी बढ़ गयी थी कि शासन और राज परिवार के लागे उनसे आतंकित हो गये थे। उन्हें नियंत्रित करना रानी झिन्दन …

Read more

मराठों का पतन

मराठों के पतन के कारण  1. एकता का अभाव-  मराठों में एकता का सर्वदा से अभाव था। सामतं प्रथा के कारण मराठा साम्राज्य कर्इ छोटे-बड़ े राज्यों में विभाजित था। पेशवा माधवराव के बाद केंद्रीय सत्ता शिथिल हो गयी थी और एकता का अभाव हो गया था। मराठा सामंतों और शासकों में पारस्परिक आंतरिक कलह, र्इश्र्या और …

Read more

आंग्ल-बर्मा सम्बन्ध

बर्मा में कंपनी की प्रारंभिक गतिविधियाँ भारत के पूर्व में बर्मा देश है जिसे म्यान्मार भी कहा जाता है। भारतीय साम्राज्य की रक्षा के लिए स्वाभाविक था कि कांग्रेस पूर्वी सीमा की भी रक्षा करे। मुगल सम्राटों ने आसाम के कुछ भागों को जीतकर अपने साम्राज्य में शामिल किया था। बंगाल पर अधिकार करने के बाद …

Read more

लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति

1848 र्इ. से 1856 र्इ. का काल ब्रिटिश कालीन भारत के इतिहास में अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इस काल में लॉर्ड डलहौजी भारत का गवर्नर जनरल रहा। वह बहुत ही सक्रिय प्रशासक था, उसने युद्धों और कूटनीतियों से भारतीय राज्यों पर अधिकार करके भारत में ब्रिटिश कंपनी के साम्राज्य का विस्तार किया। डलहौजी साम्राज्यवादी विचारों …

Read more

1857 का विद्रोह : स्वरूप, कारण एवं परिणाम

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भारतीयों द्वारा स्वत्रतंता प्राप्ति के लिए किये गये संग्राम का इतिहास है। यह संग्राम ब्रिटिश सत्ता की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए भारतीयों द्वारा संचालित एवं संगठित आंदोलन है। विद्रोह का स्वरूप भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम 1857 र्इ. में ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध भारतीयों द्वारा पहली बार संगठित एवं हथियार बंद …

Read more

स्थायी बंदोबस्त क्या है ?

ब्रिटिश कंपनी (र्इस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 र्इ. में इस्तमरारी (स्थायी) बन्दोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गर्इ राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता था। यदि जमींदार राजस्व …

Read more

रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था  यह व्यवस्था 1792 र्इ. में मद्रास पे्रसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गर्इ। थॉमस मुनरो 1820 र्इ. से 1827 र्इ. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 र्इ. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानो) …

Read more

महारानी विक्टोरिया की घोषणा तथा 1858 का अधिनियम

1 नवम्बर, 1858 र्इ0 को ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की जिसे भारत के प्रत्येक शहर में पढ़कर सुनाया गयां इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने उन मुख्य सिद्धान्तों का विवरण दिया जिसके आधार पर भारत का भविष्य का शासन निर्भर करता था। इस घोषणा का कोर्इ कानूनी आधार न था क्योंकि इसे ब्रिटिश …

Read more

बंगाल विभाजन (1905 र्इ.)

भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बंगाल विभाजन का एक विशिष्ट स्थान है। बंगाल प्रान्त के अन्तर्गत खास बंगाल, बिहार, उड़ीसा, तथा छोटा नागपुर थे।इस विशाल प्रान्त से सरकार को प्रतिवर्ष ग्यारह करोड़ रूपये से भी अधिक का राजस्व प्राप्त होता था। सरकार का विचार था कि इतने बड़ा प्रान्त पर एक व्यक्ति का शासन …

Read more

लार्ड कर्जन के सुधार

कर्जन के आंतरिक प्रशासनिक सुधार- लार्ड कर्जन ने जनवरी,1899 र्इ. में भारत के वायसराय का पद ग्रहण किया। लार्ड कर्जन एक योग्य शासक था। उसके द्वारा किये गये भारतीय समस्याओं से संबंधित आंतरिक प्रशासनिक सुधार इस प्रकार है :- 1. दुर्भिक्ष एवं महामारी की रोकथाम –  लार्ड कर्जन ने बडे धैर्य से इनका सामना किया। उसने …

Read more