अम्लीय वर्षा का निर्माण, प्रभाव एवं नियंत्रण

अम्लीय वर्षा वायु प्रदूषण का विनाशकारी प्रभाव है। विभिन्न उत्पादन क्रियाओं -उद्योगों, कारखानों, वाहन एवं तेल शोधकों से निकली कार्बन डार्इ ऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, सल्फर डार्इ ऑक्साइड (SO2), वायु में घुल जाती है। वर्षा जब होती है जब सूर्य किरणों की ऊष्मा समुद्र की सतह, झीलों एवं नदियों की जल सतह पर वाष्पीकरण को उत्प्रेरित करती …

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ओजोन क्षरण के कारण, वितरण और इसके प्रभाव

हमारे सौरमण्डल में पृथ्वी ही संभवत ऐसा अनोखा ग्रह है, जिसका वायुमण्डल रासायनिक दृष्टि से सक्रिय तथा ऑक्सीजन से भरा हुआ है, अन्य ग्रह कार्बनडार्इ ऑक्साइड, मीथेन तथा हाइड्रोजन जैसी निष्क्रिय गैसों से घिरे हुए हैं। हमारे वायुमण्डल की ऊपरी परत में 15 से 35 किमी के मध्य ओजोन गैस (O3) पायी जाती है। ओजोन गंधयुक्त …

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धुंध (Smog) क्या है, इससे खुद को कैसे बचाएं?

Smog शब्द दो शब्दों के मेल से बना है Smoke = Fog = Smog धुंध असल में पानी के कणों और धुएं में उपस्थित कार्बन के कणों के मिश्रित होने से बनता है और यह सर्दी के मौसम में अधिक होता है क्योंकि उस समय कोहरे में पानी के कण हवा में होते हैं और कार्बन …

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परामर्श का अर्थ, परिभाषा एवं सिद्धान्त

‘परामर्श’ शब्द अंग्रेजी के ‘counselling’ शब्द का हिन्दी रुपान्तर है,जो लैटिन के ‘Consilium’ से बना है जिसका शब्दिक अर्थ है सलाह लेना या परामर्श लेना। अत: परामर्श एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें परामर्श प्राथ्री अपने से अधिक अनुभवी, योग्य व प्रशिक्षित व्यक्ति के पास जाकर पूछताछ, विचार-विमर्श, तर्क-वितर्क तथा विचारों का विनिमय करता है। इस प्रक्रिया …

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कर्नाटक का युद्ध (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)

कर्नाटक का प्रथम युद्ध (1744 र्इ. से 1748 र्इ.) 1740 र्इ. में यूरोप में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार-युद्ध में एक और फ्रांस और दूसरी और ब्रिटेन था अत: दोनों के मध्य यूरोप में युद्ध प्रारम्भ हो गया। इस युद्ध के प्रतिक्रियास्वरूप भारत में भी ब्रिटिश और फ्रेंच कंपनियां परस्पर एक-दूसरे के विरुद्ध रण क्षेत्र में आ गर्इं। …

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प्लासी का युद्ध के कारण, घटनायें, महत्व और परिणाम

प्लासी युद्ध के कारण  प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास में अंग्रेजों के प्रभुत्व के प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जिसके कारण हैं – (1) सिराजुद्दौला की अलोकप्रियता सिराजुद्दौला का चारित्रिक बुरार्इयों से परिपूर्ण था। वह क्रूर, अत्याचारी, चंचल प्रकृति, हठी और अति विलासी व्यक्ति था। उसने अपने स्वभाव से अपने ही संबंधियों और दरबारियों को …

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बक्सर का युद्ध के कारण, परिणाम और महत्व

बक्सर युद्ध के कारण (1) बंगाल में प्रभुत्व की समस्या  अंग्रेजों से हुए समझौते के अनुसार मीरकासिम ने अपने वचनों को पूरा कर दिया था। उसने अंग्रेजों को धन और जिले दिये, ऋण भी चुकाया, सेना का शेश वेतन भी दिया और आर्थिक सुधारों से अपनी स्थिति को सुदृढ़ भी कर किया। अब वह योग्य एवं …

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रेग्युलेटिंग एक्ट (1773 ई.)

र्इस्ट इंडिया कंपनी द्वारा दीवानी की प्राप्ति और कुछ क्षेत्रों पर अधिकार का इंग्लैण्ड पर गहरा असर पड़ा। वहाँ की जनता ने कंपनी के मामलों में संसदीय हस्तक्षेप के लिए आंदोलन शुरू किया। कंपनी द्वारा भारतीय राजाओं से युद्ध, कुछ विशेष व्यक्तियों द्वारा स्वार्थ सिद्धि के लिए राजनीतिक शक्ति का पय्रागे , कंपनी के कर्मचारियों द्वारा …

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पिट्स इंडिया एक्ट (1784 र्इ.)

अगस्त, 1784 र्इ. में पिट का इण्डिया एक्ट पास हुआ। इसने भतू पूर्व अधिनियमों के दोषो को दूर करने का प्रयास किया। इसकी भाषा संयमित थी। इसमें कंपनी के प्रदेशांे को शभारत में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्रश कहा गया था। मुख्य उपबंध 1. गृह सरकार के संबंध में उपबंध-  भारतीय मामलों की देखरेख के लिए नियंत्रण मंडली …

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आंग्ल-मराठा संघर्ष

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1772 र्इ. से 1784 र्इ.) 1761 र्इ. में पनीपत के तृतीय युद्ध के कुछ समय बाद ही पेशवा बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गयी। उसके पशचात् उसका पुत्र माधवराव पेशवा बना। उसने थोड़े समय में ही मराठा शक्ति ओर साम्राज्य को पुन: बढ़ा लिया और महादजी सिंधिया ने मुगल सम्राट शाहआलम को अंग्रेजों …

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