न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया

न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया एक स्वस्थ एवं निश्पक्ष न्यायपालिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। जितने श्रेष्ठ व्यक्ति इस प्रक्रिया द्वारा चुने जायेगे उतना ही न्यायपालिका का स्तर बेहतर होगा। संविधान निर्माण के समय से ही इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ, जो अभी भी जारी है। न्यायाधीशों की निश्पक्षता न सिर्फ न्यायपालिका पर प्रभाव डालती …

Read more

चुनाव आयोग का गठन, कार्य एवं प्रक्रिया

चुनाव आयोग का गठन  इसकी शुरुआत उद्देशिका से ही हो जाती है भारतीय संविधान की उद्देशिका यह उद्घोशित करती है कि भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य है। लोकतन्त्र भारतीय संविधान का एक मूलभूत ढ़ँाचा है। किसी भी प्रजातान्त्रिक व्यवस्था वाले देश के लिए चुनाव एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। चुनाव द्वारा न केवल जन …

Read more

राष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का राष्ट्रपति  संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। संघ की कार्यपालिका शक्ति इसी में निहित की गर्इ है। अनुच्छेद 53 में उपबन्ध किया गया है कि- संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के उपबन्धों के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा …

Read more

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन, कार्यकाल एवं शक्तियां

भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोर्इ लाभ का पद धारण नहीं करेगा। राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुर्इ रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि निर्वाचित नया …

Read more

संसद का गठन

संसद का गठन  संविधान के अनुच्छेद 79 में संसद के गठन के लिए उपबंध किया गया है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोक सभा होंगे। इस प्रकार संसद के तीन अंग हैं- (1) राष्ट्रपति, (2) …

Read more

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की विशेषताएं

संयुक्त राष्ट्र संध ने शिक्षा के अधिकार को ‘मानवाधिकार’ की मान्यता प्रदान की है। शिक्षा के अधिकार को मानवाविधार के सार्वभौमिक घोशणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अनुच्छेद 26 में, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अन्तराष्ट्रीय प्रसंविदा की धारा 14 में स्थान दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के यूनेस्को एवं अन्य अंग शिक्षा के …

Read more

राष्ट्रवाद का अर्थ

राष्ट्रवाद का अर्थ –  राष्ट्रवाद (NATION) राष्ट्र का जन्म लेटिन भाषा शब्द नेशों से हुआ है, जो सामूहिक जन्म अथवा वंश के भाव को व्यक्त करता है, परंतु आधुनिक काल में इसका अर्थ राष्ट्रीयता (NATIONALITY) शब्द का समरूपी होने पर ‘राष्ट्र’ शब्द किसी राष्ट्रीयता की सामान्य राजनीतिक चेतना का घोतक है जो, ए. जिम्मर्न के अनुसार …

Read more

पूंजीवाद का अर्थ एवं उत्पत्ति

पूंजीवाद का अर्थ –  पूंजीवाद शब्द उस सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था के लिए प्रयोग होता है जिसमें कि अधिकांश विश्व आज रह रहा है। यह आम तौर से धारणा रही है कि, यदि हमेशा नहीं तो यह मानव इतिहास में अधिकांश समय रहा है। पर यह सत्य है कि, पूंजीवाद अभी कुछ शताब्दियों से ही विश्व में …

Read more

साम्राज्यवाद का अर्थ

साम्राज्यवाद के अर्थ को समझना आसान नही है। अलग-अलग विद्वानों ने अनेकों तरह से इसके सार को समझानें की कोशिश कर इसे काफी कठिन कर दिया है। फिर भी इसके अर्थ को सरल भाषा में कहें तो वह, यह है कि, पूंजीवाद जब अपने विकास के चर्मोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तो, वह साम्राज्यवाद में परिवर्तित …

Read more

रूसी क्रांति 1905

क्रांति का तात्पर्य –  क्रांति का अर्थ मात्र रक्तपात नहीं है, बल्कि अत्यन्त शीघ्रता के साथ होने वाले आमूल परिवर्तन को क्रांति कहा जाता है । एक रूसी विद्वान ने कहा है कि क्रांति उस समय होती है, जब उसके पीछे कोर्इ सामाजिक माँग होती है । क्रांति के सम्बंध में लार्ड मैकाले का कथन है …

Read more