यजुर्वेद की शाखाएं, एवं भेद

यजुर्वेद की शाखाएं काण्यसंहिता-  शुक्ल यजुर्वेद की प्रधान शाखायें माध्यन्दिन तथा काण्व है। काण्व शाखा का प्रचार आज कल महाराष्ट्र प्रान् तमें ही है और माध्यन्दिन शाखा का उतर भारत में, परन्तु प्राचीन काल में काण्य शाखा का अपना प्रदेश उत्तर भारत ही था, क्योंकि एक मन्त्र में (11/11) कुरु तथा पच्चालदेशीय राजा का निर्देश संहिता …

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सामवेद का अर्थ, स्वरूप, शाखाएं

अथर्ववेद के अनेक स्थलों पर साम की विशिष्ट स्तुति ही नहीं की गर्इ है, प्रत्युत परमात्मभूत ‘उच्छिष्ट’ (परब्रह्म) तथा ‘स्कम्भ’ से इसके आविर्भाव का भी उल्लेख किया गया मिलता है। एक ऋषि पूछ रहा है जिस स्कम्भ के साम लोभ हैं वह स्कम्भ कौन सा है? दूसरे मन्त्र में ऋक् साथ साम का भी आविर्भाव ‘उच्छिकष्ट’ …

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उपनिषद का अर्थ, रचनाकाल एवं संख्या

उपनिषद का अर्थ उपनिषद् शब्द ‘उप’ एवं ‘नि’ उपसर्ग पूर्वक सद् (सदृलृ) धातु में ‘क्विप्’ प्रत्यय लगकर बनता है, जिसका अर्थ होता है ‘समीप में बैठना’ अर्थात् गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना। धातुपाठ में सद् (सद्लृ) धातु के तीन अर्थ निर्दिष्ट हैं – विशरण, (विनाश होना), गति (प्रगति), अवसादन (शिथिल होना)। इस प्रकार जो …

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इतिहास की अवधारणा, स्वरूप, विषय क्षेत्र, अध्ययन का महत्व

‘हिस्ट्री’ (History) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द ‘हिस्टोरिया’ (Historia) से हुर्इ है जिसका अर्थ ‘खोजना या जानना’ है। यह शब्द अतीत की घटनाओं की ओर संकेत करता है। ‘हिस्ट्री’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ग्रीक लेखक हेरोडोटस ने किया था। इसीलिए उसे ‘इतिहास का पिता’ कहा जाता है। हिस्ट्री का भारतीय शब्द ‘इतिहास’ है। इतिहास शब्द ‘इति+ह+हास’ …

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हड़प्पा सभ्यता का उद्भव, विस्तार, नगर-योजना

हड़प्पा सभ्यता का उद्भव हड़प्पा सभ्यता के उद्भव सम्बन्धी मतों में भिन्नता का कारण है कि इस सभ्यता के अवशेष जहाँ कहीं भी मिले हैं। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में मिले हैं। सुमेरियन से उद्भव का मत – सर जॉन मार्शल, गार्डन चाइल्ड, सर मार्टीमी ह्वीलर आदि पुराविदों का कहना है कि हड़प्पा सभ्यता का उद्भव …

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सामंतवाद क्या था ? इसके पतन के कारण

सामंतवाद एक ऐसी मध्ययुगीन प्रशासकीय प्रणाली और सामाजिक व्यवस्था थी, जिसमें स्थानीय शासक उन शक्तियों और अधिकारों का उपयागे करते थे जो सम्राट, राजा अथवा किसी केन्द्रीय शक्ति को प्राप्त होते हैं। सामाजिक दृष्टि से समाज प्रमुखतया दो वर्गों में विभक्त था- सत्त्ाा ओर अधिकारों से युक्त राजा और उसके सामंत तथा अधिकारों से वंचित कृशक …

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आधुनिक युग का प्रारंभ

पंद्रहवीं सदी के उत्तरार्ध और सोलहवीं सदी के पूर्वार्द्ध से यूरोप में आधुनिक युग का प्रारंभ होता है। इस काल के बाद यूरोप में महत्वपूर्ण और युगांतरकारी घटनाएं हुर्इ। मध्ययुग में यूरोप में जीवन का मूल आधार था – धर्म का प्रभुत्व और अपरिवर्तनशीलता, पर आधुनिक युग में जीवन का मूलतंत्र हो गया- स्पंदन, चैतन्यता, विकास …

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पुनर्जागरण के कारण एवं विशेषताएं

पुनर्जागरण से तात्पर्य ऐतिहासिक दृष्टि से पुनर्जागरण की कोर्इ सहज एवं स्पश्ट परिभाषा नहीं दी जा सकती है। अनेक इतिहासकार इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण स्वीकार करते हैं। व्यापक अर्थ में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभिप्राय उन समस्त परिवर्तनों से है, जो मध्ययुग से आधुनिक युग के बीच पश्चिमी यूरोप में हुए थे, अर्थात सामंतवाद की अवनति, प्राचीन साहित्य …

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धर्म सुधार आंदोलन एवं धर्म सुधार विरोधी आन्दोलन

1517 र्इ. से 1648 र्इ. तक का युग धर्म सम्बन्धी सुधारों का युग था। चर्च और पोप के भ्रश्ट तंत्र के विरूद्ध जो आंदोलन हुआ वह धर्म सुधार आंदोलन था। इस आंदोलन के दो लक्ष्य थे- (1) र्इसार्इयों में धार्मिक, नैतिक और आध्यात्मिक जीवन को पुन: उन्नत और श्रेश्ठ करना और (2) रोम के पोप और …

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वाणिज्यवाद क्या है ?

व्यापारिक क्रांति ने एक नवीन आर्थिक विचारधारा को जन्म दिया। इसका प्रारंभ सोलहवीं सदी में हुआ। इस नवीन आर्थिक विचारधारा को वाणिज्यवाद, वणिकवाद या व्यापारवाद कहा गया है। फ्रांस में इस विचारधारा को कोल्बर्टवाद और जर्मनी में केमरलिज्म कहा गया। 1776 र्इ. में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने भी अपने ग्रथ ‘वेल्थ ऑफ नेशस में इसका …

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