एडलर का व्यक्तित्व सिद्धांत

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धान्त ‘‘नवमनी विश्लेषणात्मक उपागम’’ पर आधारित है। एडलर यद्यपि फ्रायड के काफी नजदीक थे, किन्तु वे व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रायड के कुछ विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने फ्रायड से पृथक होकर एक नये व्यक्तित्व सिद्धान्त को जन्म दिया, जिसका नाम रखा – ‘‘वैयक्तित्व मनोविज्ञान का सिद्धान्त’’ इस सिद्धान्त की खास …

Read more

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत

मनोविज्ञान के क्षेत्र में अहं मनोवैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध है। इनके द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धान्त क्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त से भी काफी प्रभावित है तथापि इन्होंने अपने सिद्धान्त में कुछ ऐसे कारकों को भी महत्व दिया है, जिनकी चर्चा क्रायड ने नहीं की है। जैसे कि एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक एवं …

Read more

मनोवैज्ञानिक परीक्षण के प्रकार

क्या आप जानते हैं कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण कितने प्रकार के होते हैं?  मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक मानवीकृत यन्त्र होता है, जिसमें प्रश्नों अथवा चित्रों या अन्य माध्यमों के द्वारा मनुष्य की विभिन्न मानसिक योग्यताओं जैसे कि बुद्धि, समायोजन क्षमता, स्मृति, अभिवृत्ति, अभिरूचि इत्यादि का मात्रात्मक मापन किया जाता है। कहने का आशय यह है कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण …

Read more

स्मृति का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

प्राय: हम यह सुनते हैं कि अमुक व्यक्ति की स्मृति बहुत अच्छी है। अमुक व्यक्ति बार-बार भूल जाता है। कर्इ व्यक्ति अपनी स्मृति में कर्इ सूचनाओं को एक साथ रख लेते हैं। कर्इ बार हम बचपन की बातों को स्मृति में ले आते हैं तो कर्इ बार हम वर्तमान की बातों को भी भूल जाते हैं। …

Read more

मानसिक तनाव – कारण, लक्षण एवं समाधान

तनाव के अर्थ को मनोवैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से स्पष्ट किया है। वस्तुत: तनाव एक मानसिक रोग न होकर मानसिक रोगों का मूल कारण है। तनाव को यदि हम कुछ सटीक शब्दों में स्पष्ट करना चाहें तो कह सकते हैं कि मन:स्थिति एवं परिस्थिति के बीच संतुलन का अभाव ही तनाव की आवस्था है। कहने का …

Read more

चिंता का अर्थ, परिभाषा एवं लक्षण

चिन्ता वस्तुत: एक दु:खद भावनात्मक स्थिति होती है। जिसके कारण व्यक्ति एक प्रकार के अनजाने भय से ग्रस्त रहता है, बेचैन एवं अप्रसन्न रहता है। चिन्ता वस्तुत: व्यक्ति को भविष्य में आने या होने वाली किसी भयावह समस्या के प्रति चेतावनी देने वाला संकेत होता है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिन-प्रतिदिन की जिन्दगी में अलग-अलग …

Read more

व्यसन का अर्थ, प्रकार, लक्षण एवं कारण

व्यसन का अर्थ व्यसन एक द्रव्य सम्बन्धी विकृति है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में विभिन्न प्रकार के रसायन द्रव्यों का सेवन करता है और इन द्रव्यों पर इतनी अधिक निर्भरता बढ़ जाती है कि इनके दुष्प्रभावों से परिचत होते हुए भी वह इनको लेने के लिये विवश हो जाता है, क्योंकि न लेने पर उसके शरीर …

Read more

श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय

गीता संस्कृत साहित्य काल में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व का अमूल्य ग्रन्थ है। यह भगवान श्री कृष्ण के मुखारबिन्द से निकली दिव्य वाणी है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। इसके संकलन कर्ता महर्षि वेद ब्यास को माना जाता है। आज गीता का विश्व की कर्इ भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। जिससे इसकी …

Read more

श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व

गीता तात्पर्य -श्रीमदभगवदगीता विश्व के सबसे बडे महाकाव्य महाभारत के “भीश्मपर्व” का एक अंश है। भगवदगीता भगवान कृष्ण द्वारा कुरूक्षेत्र युध्द में दिया गया दिव्य उपदेश है जब अर्जुन मोहग्रस्त होकर किंकर्तव्यविमूढ़ कि स्थिति में पहुच चुके थे। इस प्रकार अर्जुन को केन्द्र में रखकर दिया गया यह भगवान का गीता अमृत रूपी वाणी से समन्वित …

Read more

ऋग्वेद का परिचय

ऋग्वैद धार्मिक स्तोत्रों की एक अत्यंत विशाल राशि है, जिसमें नाना देवाताओं की भिन्न-भिन्न ऋषियों ने बड़े ही सुंदर तथा भवाभिव्यंजक शब्दों में स्तुतियों एवं अपने अभीष्ट की सिद्धि के निर्मित पार्थनायें की है। द्वितीय मंडल से लेकर सप्तम मंडल तक एक ही विशिष्ट कुल के ़षियों की प्रार्थनायें संगृहीत हैं। अष्टम मंडल में अधिकतर मंत्र …

Read more