ईश्वर क्या है ?

शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से र्इश्वर शब्द र्इश धातु में वरच् प्रत्यय लगाकर बना है जिसका अर्थ है ऐश्वर्य युक्त, समर्थ, शक्तिशाली, स्वामी, प्रभु, मालिक, राजा, शासक आदि। हिन्दी संस्कृत कोश के अनुसार र्इश्वर शब्द का प्रयोग परमेश्वर, जगदीश्वर, परमात्मन, परमेश, स्वामी, शिव आदि अनेक रूपों में किया गया है। ऋग्वेद में र्इश धातु का प्रयोग …

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पतंजलि योग सूत्र का परिचय एवं परिभाषा

योग सूत्र का परिचय आप जानते होंगे कि भारत में बहुत से सूत्र ग्रन्थ लिखे गए, जिनमें सार-रूप में बहुत सी जानकारियाँ उपलब्ध होती हैं। इन ग्रन्थों की अपनी एक परम्परा है। योग सूत्र भी इन्हीं सूत्र ग्रन्थ परम्परा का एक हिस्सा है। जिसमें योग परक विभिन्न दार्शनिक सिद्धान्तों को सार रूप में प्रस्तुत करने का …

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क्रियायोग क्या है ?

महर्षि पतंजलि ने मध्यम कोटि के साधकों की चित्तशुद्धि के लिए क्रियायोग का उपदेश दिया है। यहाँ पर पाठकों के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि साधक से क्या तात्पर्य है। बी.के.एस. आयंगर के अनुसार ‘‘साधक वह है जो अपने मन व बुद्धि को लगाकर क्षमतापूर्वक, समर्पण भाव से व एकचित्त होकर साधना करता …

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आसन क्या है ?

स्थिर और सुखकर शारीरिक स्थिति मानसिक संतुलन लाती है और मन की चंचलता को रोकती है। आसनो की प्रारंभिक स्थिति में अनेक प्रकारान्तरों के द्वारा अपने शरीर को अन्तिम स्थिति के अभ्यास के लिए तैयार किया जाता है। महर्षि घेरण्ड, घेरण्ड संहिता में आसनों के सन्दर्भ में बताते हैं कि इस संसार में जितने जीव-जंतु हैं, …

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प्राणायाम क्या है ?

प्राणायाम योग का एक प्रमुख अंग है। हठयोग एवं अष्टांग योग दोनों में इसे स्थान दिया गया है। महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग में चौथे स्थान पर प्राणायाम रखा है। प्राणायाम नियंत्रित श्वसनिक क्रियाओं से संबंधित है। स्थूल रूप में यह जीवनधारक शक्ति अर्थात प्राण से संबंधित है। प्राण का अर्थ श्वांस, श्वसन, जीवन, ओजस्विता, ऊर्जा …

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प्रत्याहार क्या है ?

प्रत्याहार दो शब्दों ‘प्रति’ और ‘आहार’ से मिलकर बना है। ‘प्रति’ का अर्थ है विपरीत अर्थात इन्द्रियों के जो अपने विषय हैं उनको उनके विषय या आहार के विपरीत कर देना प्रत्याहार है। इंद्रियॉं विषयी हैं, ये विषय को ग्रहण करती हैं। ये विषय हैं- पंच तन्मात्राएँ। चेतना ज्ञान प्राप्त करना चाहती हैं और चित्त उसका …

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धारणा का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

धारणा का अर्थ धारणा मन की एकाग्रता है, एक बिन्दु, एक वस्तु या एक स्थान पर मन की सजगता को अविचल बनाए रखने की क्षमता है। ‘‘योग में धारणा का अर्थ होता है मन को किसी एक बिन्दु पर लगाए रखना, टिकाए रखना। किसी एक बिन्दु पर मन को लगाए रखना ही धारणा है। धारणा शब्द …

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ध्यान का अर्थ एवं परिभाषा

जब धारणाभ्यासी देश-विशेष में मन को लगाते हुए मन को ध्येय के विषय पर स्थिर कर लेता है तो उसे ध्यान कहते हैं। यह समाधि-सिद्धि के पूर्व की अवस्था है। ध्यान अष्टांग योग का सातवाँ अंग है। पहले के छ: अंग ध्यान की तैयारी के रूप में किए जाते हैं। ध्यान से आत्मसाक्षात्कार होता है। ध्यान …

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मोक्ष क्या है ?

मोक्ष का सामान्य अर्थ दुखों का विनाश है। दुखों के आत्यन्तिक निवृत्ति को ही मोक्ष या कैवल्य कहते हैं। प्राय: सभी भारतीय दर्शन यह मानते हैं कि संसार दुखमय है। दुखों से भरा हुआ है। किन्तु ये दुख अनायास नहीं है, इन दुखों का कारण है। उस कारण को समाप्त करके हम सभी प्रकार के दुखों …

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फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त

मनोविज्ञान के क्षेत्र में सिगमण्ड फ्रायड के नाम से प्राय: सभी लोग परिचित है। फ्रायड ने व्यक्तित्व के जिस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, उसे व्यक्तित्व का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त कहा जाता है। फ्रायड का यह सिद्धान्त उनके लगभग 40 साल के वैदानिक अनुभवों पर आधारित है। क्या आप जानते हैं कि व्यक्तित्व का अध्ययन करने वाला सर्वप्रथम …

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