भारत में प्रमुख बॉक्साइट उत्पादक क्षेत्र

एल्यूमीनियम के अयस्क (आक्साइड) को बाॅक्साइट कहा जाता है। बाॅक्साइट में एल्यूमिनियम आक्साइड का प्रतिशत 50 से 68 के मध्य मिलता है। बाॅक्साइट से प्राप्त एल्यूमिनियम एक बहुउपयोगी अलौह धातु है, जिसका उपयोग वाहनों, विद्युत यन्त्रों, रासायनिक उद्योग, सैनिक हथियार, शस्त्र तथा टेलीफोन के तारों के निर्माण के लिए किया जाता है। भारत में बाॅक्साइट उत्पादन …

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श्रीनिवास रथ का जीवन परिचय

श्रीनिवास रथ अर्वाचीन संस्कृत के उन कवियों में प्रमुख है श्रीनिवास रथ का जन्म 1933 में ओडिशा के पुरी में हुआ था। उन्होंने ग्वालियर, मध्य प्रदेश और वाराणसी के मुरैना में पढ़ाई की। श्रीनिवास रथ के पिता एक पारंपरिक संस्कृत पंडित थे और रथ साहिब ने उनके साथ व्याकरण और अन्य शास्त्र सीखें। श्रीनिवास रथ ने …

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जानकी वल्लभ शास्त्री का जीवन परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ

श्री जानकी वल्लभ शास्त्री का जन्म 5 फरवरी, 1916 में बिहार के मैगरा गांव में हुआ था। श्री जानकी वल्लभ शास्त्री के पिता का नाम श्री रामानुग्रह शर्मा था। श्री जानकी वल्लभ शास्त्री के पिता का देहांत जानकी वल्लभ के बचपन के समय में ही हो गया था। उन्हें पशुओं का पालन करना बहुत ही पसंद …

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किरातार्जुनीयम् का परिचय और विषय-वस्तु का वर्णन

kiratarjuniyam ka parichay ‘किरातार्जुनीयम्’ में दो शब्द हैं- ‘किरात’ और ‘अर्जुनीयम्’। भगवान् शिव किरात अथवा वनेचर का रूप धारण करके आए थे और अर्जुन को पाशुपत-अस्त्र देने से पहले उसकी परीक्षा लेने के लिए भयंकर युद्ध किया था। इस प्रमुख घटना के आधार पर ही इस महाकाव्य का नाम ‘किरातार्जुनीयम्’ रखा गया है। किरातार्जुनीयम् का परिचय …

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भारत में तांबा उत्पादक क्षेत्र के नाम

भारत में तांबे का प्रयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। तांबे के सिक्कों तथा बर्तनों का प्रचलन यहाँ काफी लम्बे समय से रहा है। वर्तमान में विद्युत के तार मिश्रित धातु के रूप में, टेलीग्राफ के तारों, बर्तन बनाने में तांबे का प्रयोग किया जा रहा है।  भारत में तांबा उत्पादक क्षेत्र भारत में …

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भारत में सिंचाई का महत्व एवं आवश्यकता

भारत में सिंचाई ईसा पूर्व से हो रही है। उदाहरण के लिए कावेरी नदी पर ग्राण्ड एनीकट बाँध का निर्माण पहली सदी में ही हो गया था। आधुनिक सिंचाई प्रणाली का विकास सन् 1882 में उत्तर प्रदेश में पूर्वी यमुना नहर के निर्माण के साथ प्रारम्भ हुआ था। प्रथम पंचवर्षीय योजना के आरम्भ तक लगभग 226 …

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ईसुरी का जीवन परिचय, रचनाएँ / फाग

ईसुरी का जन्म सन् 1841 में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में हुआ था। ईसुरी के गांव का नाम मऊरानीपुर मेंढ़की था। ईसुरी का विवाह श्यामबाई के साथ हुआ था लेकिन वे ईसुरी का लम्बे समय तक साथ नहीं निभा पाई। एक बेटी को जन्म देने के बाद श्यामबाई चल बसी और ईसुरी जीवन भर ‘रजऊ’ …

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बुंदेली भाषा का इतिहास और क्षेत्र

बुंदेली भी एक बोली है जो एक निश्चित क्षेत्र में बोली जाती है। बुंदेली भाषा का इतिहास बुंदेली भाषा का समृद्ध इतिहास है। यह भाषा शौरसेनी अपभ्रंश के ‘मध्यदेशीय’ से विकसित पश्चिमी हिन्दी की एक प्रमुख बोली है। यह तथ्य सर्वविदित है कि हिन्दी की लोकभाषाओं का उदय मध्यदेशीय शौरसेनी अपभ्रंश से माना गया है। शौरसेनी …

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बघेली भाषा का परिचय एवं इतिहास

आदिभाषा संस्कृत को हिन्दी भाषा की जननी कहा जाता है। संस्कृत-पालि- प्राकृत-अपभ्रंश-हिन्दी के अनुक्रम में हिन्दी का विकास हुआ। भौगोलिक व ऐतिहासिक दृष्टि से हिन्दी प्रदेश के भूखण्ड में पांच प्राकृत भाषाएं थीं। अपभ्रंश, शौरसैनी, अर्धमागधी, मागधी और खस, इन्हीं पांच प्राकृतों से हिन्दी की पांच उपभाषाएं- राजस्थानी हिन्दी, पश्चिमी हिन्दी, पूर्वी हिन्दी, बिहारी हिन्दी और …

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भारत में वर्षा के प्रकार

जल वाष्प द्रवीभूत होकर धरातल पर बूँदों के रुप में गिरता है तो उसे वर्षा कहा जाता है। वाष्प के द्रवीभूत होकर धरातल पर बूँदों के रुप में गिरने से पहले अत्य आवश्यक परिवर्तन होते हैं। जैसे- हवा का ठण्डा होकर ओस बिन्दु तक पहुँचना, बादल बनना तथा जल सीकरों का बूँदों में परिवर्तित होना आदि। …

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