दान क्या है और उसके प्रकार?

शब्द शास्त्र की दृष्टि से ‘दान’ शब्द का अर्थ किसी वस्तु से अपना सत्व (अर्थात् अधिकार) निवृत्ति करके दूसरे का अधिकार स्थापित कर देना है। दान देना धर्म का एक श्रेष्ठ अंग कहा जाता है।  शास्त्रों के अनुसार, दान से बढ़कर कोई धर्म नही है- ‘दानधर्मात् परोधर्मो भूतानां नेह विद्यते’ । जब कोई व्यक्ति अपनी न्यायोपार्जित …

Read more

Enhancing Financial Operations: Unveiling the Potential of Free Invoice Template & Receipt Maker Tools by Luzenta

Enhancing Financial Operations: Unveiling the Potential of Free Invoice Template & Receipt Maker Tools by Luzenta In the ever-evolving landscape of modern business, efficient financial management stands as a pillar of success. Among the myriad responsibilities that businesses undertake, the creation of invoices and receipts emerges as a crucial facet. In the age of digital innovation, …

Read more

अहिंसा किसे कहते हैं?

अहिंसा का शब्दानुसार अर्थ ‘हिंसा न करना’ है। ‘न+हिंसा’ इन दो शब्दो से अहिंसा बना है। इसका परिभाषिक शब्द निषेधात्मक और विध्यात्मक दोनों है। रागद्वेषात्मक प्रवृत्ति न करना, प्राण वध न करना या प्रवृत्तिमात्र का निरोध करना निषेधात्मक अहिंसा है। सत-प्रवृत्ति करना, स्वाध्याय, अध्यात्मसेवा, उपदेश, ज्ञान-चर्चा आदि आत्महितकारी क्रिया करना विध्यात्मक अहिंसा है। महर्षि वेदव्यास के …

Read more

धर्म किसे कहते हैं धर्म की कुछ मौलिक विशेषताएं?

धर्म आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास पर आधारित एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें प्रथाएं एवं पवित्रता से सम्बद्ध मूल्य पाये जाते हैं। यह अलौकिक इकाइयों एवं शक्तियों से सम्बन्धित होता है, जिन्हें मानव समूहों सांसारिक अस्तित्व का अन्तिम लक्ष्य माना जाता है। मनुष्य ने अपने दैनिक जीवन को संचालित करने के लिए कई क्रिया-तन्त्रों का विकास किया …

Read more

वराहमिहिर का जीवन परिचय

माहर अवन्ति के सूर्यभक्त वराहमिहिर का स्थान ज्योतिषजगत् में वस्तुतः सूर्य के सदृश हैं। इनका नाम भारत में ही नहीं, विश्व में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं खगोलशास्त्री के रूप में लिया जाता है।” वराहमिहिर का जन्मस्थान आचार्य वराहमिहिर ने अपने जन्मस्थान के बारे में कुछ भी नहीं लिखा है । ये आर्यभट्ट के समकालीन बताये जाते हैं। …

Read more