विधान सभा अध्यक्ष के कर्तव्य और अधिकार

आजादी के बाद भारतीय संविधान के निर्माताओं ने देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने और शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए केंद्रीय स्तर पर जहाँ संसद की व्यवस्था की वहीं राज्यों में विधानसभा के गठन का प्रस्ताव किया। इसके साथ ही लोकसभा के संचालन और गरिमा बनाए रखने के लिये लोकसभा अध्यक्ष और राज्यों …

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अलसी के बीजों में ये पोषक तत्व होते हैं

अलसी के बीज आपके स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद हो सकते है आइए जानते है इस लेख के माध्यम से अलसी के बीज के फायदे। अलसी के बीज के फायदे अलसी एक ओमेगा 3 रिच फूड है। यह आपके शरीर में एसिडिक फैट बनने से रोकता है। एक बड़े चम्मच पिसे हुए अलसी के बीजों में …

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय, पुस्तकें, सम्मान व पुरस्कार

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर, 1888 को तिरुमनी गाँव, तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव में हुआ था। इनकी माता का नाम सिताम्मा तथा पिता का नाम सर्वपल्ली किरास्वामी था। सर्वपल्ली नाम इस परिवार को विरासत में मिला था। इनके पूर्वज सर्वपल्ली गाँव के रहने वाले थे और 18वीं सदी में तिरुमनी गाँव में …

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रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय एवं प्रमुख शिक्षाएं

रामकृष्ण परमहंस का प्रारंभिक जीवन रामकृष्ण का जन्म 18 फरवरी 1836 ई. में बंगाल के हुगली जिले के कामापुकुर ग्राम में हुआ था। रामकृष्ण परमहंस एवं उनका योगदान पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से भारतीयों को मुक्त कराने के लिये ब्रम्ह समाज एवं आर्य समाज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन हिंदू धर्म की आध्यात्मिक भावना को संतुष्ट …

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सेन वंश का इतिहास तथा उसके अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

बंगाल में रहने वाले आधुनिक सेन लोग अपनी ही तरह प्राचीन सेन वंशी राजाओं को वैद्य मानते हैं। किन्तु यह ऐतिहासिक प्रमाणों से साबित नही होता । सेनवंशी शासकों के पूर्वपुरुषों के मूल स्थान और उत्पत्ति सम्बन्धी उल्लेख विजयसेन के देवपाड़ा अभिलेख एवं लक्ष्मणसेन के माधाइनगर अभिलेख में मिलते हैं। तदनुसार वे चन्द्रवंशी थे और उनका …

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अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक सुधार

अलाउद्दीन खिलजी 19 जुलाई 1296 ई. में सुल्तान जलाउद्दीन खिलजी की हत्या कर स्वयं को सुल्तान घोषित किया। 22 अक्टूबर 1296 ई. में दिल्ली में बलबन के राजमहल में उसने अपना राज्याभिषेक करवाया तथा दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। अलाउद्दीन दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने धर्म को राजनीति से पृथक रखा। उसके शासनकाल में इस्लाम …

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अवसरवादिता का अर्थ

अवसर से अभिप्राय है ‘मौके की तलाश’ से हैं। मानक हिन्दी कोश के अनुसार, “मौके से फायदा उठाने की प्रवृत्ति” अतः उचित समय देखकर उस समय का फायदा उठाकर लाभ अर्जित करना अवसरवादिता कहलाता है । आज प्रत्येक व्यक्ति में अवसरवादिता की प्रवृत्ति किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है । संक्षिप्त हिन्दी शब्द सागर में अवसर का …

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हिन्दी कहानी : विकास के चरण

कहानी का आरंभ कब हुआ होगा यह कहना बड़ा कठिन है। संभवतः मनुष्य ने जब से भावनाओं को अभिव्यक्त करने की कला को सीखा होगा या उसने जब कभी बोलना सीखा होगा तभी से कहानी की शुरुवात हुई होगी। क्योंकि बोलना या अभिव्यक्त करना मनुष्य का सहज स्वभाव है। मनुष्य जब कभी कुछ नया देखता है, सुनता …

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अध्यक्षात्मक सरकार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, गुण एवं दोष

अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली शक्तियों के पृथक्करण पर आधारित शासन प्रणाली है। इसमें कार्यपालिका और विधायिका में आपसी सम्बन्ध संसदीय शासन की तरह घनिष्ठ नहीं होते हैं। इसमें कार्यपालिका विधायिका के नियन्त्रण से मुक्त होती है और उसका कार्यकाल भी निश्चित होता है। उसे विधानमण्डल के समर्थन और सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं होती। इसमें राष्ट्राध्यक्ष की …

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पुरापाषाण काल का इतिहास

लुबाक ने सर्वप्रथम पाषाण युग के भिन्न-भिन्न कालों को विभाजित किया, इनके अनुसार प्रथम पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age) तथा द्वितीय नवपाषाण काल (Nealithic Age) था। इन्होंने यह विभाजन पाषाण उपकरणों के प्रकार तथा तकनीकी विशेषताओं आधार पर किया। 1970 में लारटेट ने पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया। (i) पूर्व पुरापाषाण काल (ii) मध्यपाषाण …

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