ई-वाणिज्य के लाभ एवं प्रकार – E-commerce

इंटरनेट आज सफलता की ओर अग्रसर होता उद्योग है। तकनीकी विकास की तेज दर के साथ-साथ अधिक से अधिक लोग कम्प्यूटर एवं इंटरनेट का उपयोग करने लगे हैं। अपनी दिन-प्रतिदिन की आवश्यकताओं के कारण वे कम्प्यूटर का अिध्काध्कि उपयोग करना सीखने लगे हैं। यहाँ ई-वाणिज्य वैबसाइटें सबसे आगे हैं क्योंकि आपके उत्पाद जैसे उत्पादों अथवा सेवाओं …

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उपभोक्ता किसे कहते हैं उपभोक्ता के अधिकार और उत्तरदायित्व

सरल शब्दों में, उपभोक्ता उस व्यक्ति को कहते हैं, जो विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं का या तो उपभोग करता है अथवा उनको उपयोग में लाता है। वस्तुओं में उपभोक्ता वस्तुएं (जैसे गेहूं, आटा, नमक, चीनी, फल आदि) एवं स्थायी वस्तुएं (जैसे टेलीविजन, रेफरीजरेटर, टोस्टर, मिक्सर, साइकिल आदि) सम्मिलित है। जिन सेवाओं का हम क्रय करते हैं, …

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संस्कृति एवं सभ्यता में अन्तर

संस्कृति शब्द का प्रयोग हम दिन-प्रतिदिन के जीवन में (अक्सर) निरन्तर करते रहते हैं। साथ ही संस्कृति शब्द का प्रयोग भिन्न-भिन्न अर्थों में भी करते हैं। उदाहरण के तौर पर हमारी संस्कृति में यह नहीं होता तथा पश्चिमी संस्कृति में इसकी स्वीकृति है। समाजशास्त्र विज्ञान के रूप में किसी भी अवधारणा का स्पष्ट अर्थ होता है …

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भारतीय नृत्य के प्रकार और इतिहास

ऋग्वेद में ‘नृति’ तथा नृतु का उल्लेख मिलता है तथा उषा काल की सुन्दरता की तुलना सुन्दर बेशभूषायुत्तफ नृत्यांगना से की है। जैमिनी तथा कौशीतकी ब्राह्मण ग्रन्थों में नृत्य और संगीत का एक साथ उल्लेख किया गया है। महाकाव्यों में स्वर्ग तथा पृथ्वी पर नृत्य के अनेक उदाहरण मिलते हैं। संगीत के समान भारतीय नृत्य की …

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भारत की सामाजिक समस्याएँ

कुछ आवश्यक सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याएं जिनसे आज निपटना है, वे हैं जातिवाद, दहेज, साम्प्रदायिकता, शराब, मादक द्रव्यों का सेवन आदि। जिन समस्याओं पर यहा! चर्चा की जा रही हैं वे पर्याप्त नहीं हैं। और भी ऐसी अनेक समस्याए! हैं जिनका सामना सामान्य रूप से हमारे देश को और विशेष रूप से प्रदेशों और समुदायों को करना पड़ …

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गैट का उद्देश्य और सिद्धांत – GATT

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी थी तो इस चरमराती हुई अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए तथा 1930 की विश्व व्यापी मन्दी की समस्याओं से निजात पाने के लिए जुलाई 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में हैमशायर नामक स्थान पे यह तय हुआ कि तीन अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएं स्थापित की …

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आर्थिक संवृद्धि एवं आर्थिक संवृद्धि को प्रभावित करने वाले तत्व

संसार में आज के समय सबसे बडी आर्थिक समस्या आर्थिक संवृद्धि और विकास की है। आधुनिक युग में आार्थिक विकास प्रमुख चिंतन का विषय है। मायर एवम् बाल्डविन के अनुसार ‘‘राष्ट्रों की निर्धनता का अध्ययन राष्ट्रों के धन के अध्ययन से भी अधिक महत्वपूर्ण है।’’ आर्थिक विकास का महत्व सभी देशों के लिए है लेकिन अल्पविकसित …

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पूंजी निर्माण क्या है || भारत में पूँजी निर्माण की स्थिति

किसी समय, किसी देश में ‘पूंजी निर्माण’, वह धनराशि है जो वर्ष के दौरान (1) सकल स्थायी परिसम्पत्ति अर्थात् भूमि, इमारतों, संयंत्रों और ईमानदारी तथा (2) कच्चे माल तैयार माल तथा प्रक्रियाधीन काम के स्टाक में निवेशित की जाती है। संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी कार्यक्रम के अनुसार देशीय पूंजी-निर्माण देश के वर्तमान उत्पादन तथा आयात का वह …

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संत रविदास जी का सम्पूर्ण इतिहास

संत रविदास का जन्म वर्तमान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अवध प्रान्त के प्रसिद्ध ऐतिहासिक धर्मस्थली काशी नगरी (बनारस) छावनी से लगभग 04 किलोमीटर दूर माण्डूर (मंडवाडीह) नामक गाँव में हुआ था। चौदहवीं शताब्दी में जन्में संत रविदास की जन्मतिथि के बारे में विद्वानों में मत भिन्नता देखने को मिलती है। उनके जन्म तिथि के संदर्भ में …

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केन्द्रीय सतर्कता आयोग के कार्य एवं अधिकार

केन्द्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना सन 1964 में की गयी थी। केन्द्रीय सतर्कता आयोग के गठन की सिफारिश संथानम समिति (1962-64) द्वारा की गयी थी, जिसे भ्रष्टाचार रोकने से सम्बन्धित सुझाव देने के लिए गठित किया गया था। केन्द्रीय सतर्कता आयोग सांविधिक दर्जा (statutory status) प्राप्त एक बहुसदस्यीय संस्था हे। केन्द्रीय सतर्कता आयोग किसी भी कार्यकारी …

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