व्यावसायिक सम्प्रेषण क्या है ?

सम्प्रेषण ही वह साधन है जिसके द्वारा व्यवहार को क्रियान्वित किया जाता है, परिवर्तनों को लागू किया जाता है, सूचनाओं को उत्पादक बनाया जाता है एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। सम्प्रेषण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचनाओं का आदान-पद्रान शामिल होता है। आधुनिक संचार क्रान्ति के युग में समस्त व्यावसायिक उपक्रमों …

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व्यापार चक्र क्या है ?

आखिर व्यापार-चक्र होता क्या है? व्यापार चक्र की कोर्इ उचित परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है। प्रो0 डब्लू0सी0 मिचेल (W.C. Mitchell) के शब्दों में, ‘‘व्यापार चक्रों से आशय संगठित समुदायों की आर्थिक क्रियाओं में होने वाले उच्चावचनों की श्रृंखला से होता है।’’ (Busines cycles are a series of fluctuations in the economic activities of organised communities) …

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हरी खाद के लाभ एवं बनाने की विधि

हरी खाद से अभिप्राय उन फसलों से तैयार की जाने वाली खाद से है जिन्हें केवल खाद बनाने के उद्देश्य से ही लगाया जाता है तथा इन पर फल-फूल आने से पहले ही इन्हें मिट्टी में दबा दिया जाता है। ये फसलें सूक्ष्म जीवों द्वारा विच्छेदित होकर भूमि में ह्यूमस तथा पौधों की वृद्धि के लिए …

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गोबर से खाद बनाने की विधियाँ

गोबर से खाद बनाने की कर्इ विधियाँ प्रचलन में हैं जिनमें सर्वाधिक लोकप्रिय है- इन्दौर विधि, बंगलौर विधि, श्री पुरुषोत्तम राव विधि, श्री प्रदीप तापस विधि, तथा नाडेप विधि। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय तथा उपयोगी विधि ‘‘नाडेप विधि’’ के प्रमुख विवरण निम्नानुसार हैं- खाद बनाने की नाडेप विधि कम से कम मात्रा में गोबर का उपयोग करके अधिकाधिक …

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वर्मीकम्पोस्ट अथवा केंचुआ खाद

खाद बनाने की विभिन्न विधियों में से सर्वाधिक उपयोगी विधि है वर्मी कम्पोस्टिंग। वस्तुत: वर्मीकम्पोस्टिंग वह विधि है जिसमें कूड़ा कचरा तथा गोबर को केंचुओं तथा सूक्ष्म जीवों की सहायता से उपजाऊ खाद अथवा ‘‘वर्मीकास्ट’’ में बदला जाता है यही वर्मी कम्पोस्ट अथवा केंचुआ खाद कहलाती है। वर्मी कम्पोस्ट के लाभ  वर्मी कम्पोस्ट अन्य खादों की …

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सींग खाद बनाने की विधि

सींग खाद बनाने के लिए मुख्यतया दो वस्तुओं की आवश्यकता होती है- मृत गाय के सींग का खोल तथा दूध देती गाय का गोबर। यह सभी जानते हैं कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण है तथा गाय का गोबर नक्षत्रीय एवं आकाशीय प्रभावों से युक्त होता है। नक्षत्रीय प्रभाव नार्इट्रोजन बढ़ाने वाली ताकतों …

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सफेद मूसली की खेती कैसे करें

सफेद मूसली को मानव मात्र के लिए प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य उपहार कहा जाए तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी। अनेकों आयुर्वेदिक एलोपैथिक तथा यूनानी दवार्इयों के निर्माण हेतु प्रयुक्त होने वाली इस दिव्य जड़ी-बूटी की विश्वभर में वार्षिक उपलब्धता लगभग 5000 टन है जबकि इसकी माँग लगभग 35000 टन प्रतिवर्ष आँकी गर्इ है। यह औषधीय पौधा …

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अश्वगंधा की खेती कैसे करें

अश्वगंधा (असगंध) जिसे अंग्रेजी में विन्टर चैरी कहा जाता है तथा जिसका वैज्ञानिक नाम विदानिया सोम्नीफेरा (Withania somnifera)है, भारत में उगार्इ जाने वाली महत्वपूर्ण औषधीय फसल है जिसमें कर्इ तरह के एल्केलॉइड्स पाये जाते है। अश्वगंधा को शक्तिवर्धक माना जाता है। भारत के अलावा यह औषधीय पौधा स्पेन, फेनारी आर्इलैण्ड, मोरक्को, जार्डन, मिस्र, पूर्वी अफ्रीका, बलुचिस्तान …

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सर्पगंधा की खेती कैसे करें

भारतीय महाद्वीप की जलवायु में सफलतापूर्वक उगाए जा सकने वाले औषधीय पौधों में न केवल औषधीय उपयोग बल्कि आर्थिक लाभ एवं मांग की दृष्टि से भी सर्पगंधा कुछ गिने चुने शीर्ष पौधों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दक्षिण पूर्वी एशिया का यह मूल निवासी पौधा भारतवर्ष के साथ-साथ बर्मा, बांग्लादेश, श्री लंका, मलेशिया, इंडोनेशिया तथा …

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सतावर की खेती कैसे करें

सतावर अथवा शतावरी भारतवर्ष के विभिन्न भागों में प्राकृतिक रूप से पार्इ जाने वाली बहुवष्र्ाीय आरोही लता है। नोकदार पत्तियों वाली इस लता को घरों तथा बगीचों में शोभा हेतु भी लगाया जाता है। जिससे अधिकांश लोग इसे अच्छी तरह पहचानते हैं। सतावर के औषधीय उपयोगों से भी भारतवासी काफी पूर्व से परिचित हैं तथा विभिन्न …

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