प्राथमिक समूह का अर्थ, परिभाषा एवं लक्षण

प्राथमिक समूह के कई दृष्टाान्त है, परिवार, मित्र मण्डली, जनजातीय समाज, पड़ोस और खेल समूह। इनके सदस्यों के बीच में घनिष्ठ अनौपचारिक, प्रत्यक्ष संबंध होते है। इस समूह के सदस्यों में अपनवत् की भावना होती है। भारतीय गाँव एक प्राथमिक समूह है। गाँव के लोग न केवल एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप् से जानते है, वे …

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नातेदारी का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

नातेदारी शब्द के कई अर्थ है। हमारे नातेदार दो तरह के हो सकते हैं एक तो वे, जो हमसे रक्त द्वारा जुड़े हुए होते हैं। इन्हें हम सम्बन्धी नातेदार कहते हैं। दूसरे प्रकार के नातेदार विवाह से जुड़े होते हैं। इन्हें हम विवाह सम्बन्धी नातेदार कहते हैं। नातेदारी के प्रकार  समाज में कई संस्थाएं होती है। नातेदारी …

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जाति का अर्थ और परिभाषा

शब्दोप्पति के विचार से जाति शब्द स्पेद भाषा के कास्टा शब्द से बना है जिसका अर्थ नस्ल कुल या वंश शोधना अथवा वंश परम्परा से प्राप्त गुणों की जटिलता है। पुर्तगालियों ने इस शब्द का प्रयोग भारत में रहने वाले ‘जाति’ नाम से प्रसिद्ध लोगों के वर्गों के लिए किया थ्ज्ञा। अंग्रेजी का ‘कास्ट’ शब्द मौलिक …

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सामाजिक वर्ग का अर्थ एवं परिभाषा

सामाजिक वर्ग किसी समाज में निश्चित रूप से समान सामाजिक प्रतिष्ठा वाले लोगों को एकत्रित स्वरूप को कहते है। यह समुदाय का एक भाग अथवा ऐसे लोगों का एकत्रण है। जिनका आपस में एक दूसरे के साथ समानता का सम्बन्ध या व्यवहार होता है और जो समाज के अन्य भागों से मान्यता और स्वीकृत प्राप्त ऊँच-नीच …

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सामाजिक परिवर्तन की अवधारणा, परिभाषा और विशेषताएँ

मनुष्य को इस धरती पर रहते हुए कोई 5 लाख से अधिक वर्ष हो गये है। कृषि और आवास उसके जीवन के साथ कोई 10-12 हजार वर्ष हजार वर्ष पहले जुड़े है। इतिहासकारों की अटकल है कि दुनिया में सभ्यता का सूत्रपात कोई 6 हजार वर्ष से अधिक पुराना नहीं हैं। आज जब सामाजिक परिवर्तन का …

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सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत

सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या समाजशास्त्रियों ने कतिपय सिद्धांतों के संदर्भ में की है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को हम किस उपागम से देखते है। यह उपागम ही सामाजिक परिवर्तन का सिद्धांत है। उदाहरण के लिये इतिहासकार टोयनबी या समाशास्त्री सोरोकनी जब सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या करते है तो उन्हें लगता है …

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सामाजिक समूह की परिभाषा

सामाजिक समूह की अवधारणा का अंतर हमें इससे मिलती-जुलती दो और धारणाओं से करना चाहिए। ये धारणाएँ है : (1) समुच्चय, और (2) सामाजिक कोटियाँ। समुच्चय और सामाजिक कोटियाँ निश्चित रूप से व्यक्तियों का जोड़ है। सामाजिक समूह की परिभाषा  सामाजिक समूह न तो अनेक व्यक्तियों का समुच्चय है और न ही यह एक सामाजिक कोटि …

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कृषि विपणन की परिभाषा, प्रभावी विपणन के उद्देश्य

राष्ट्रीय कृषि आयोग के अनुसार कृषि विपणन एक प्रक्रिया है, जो विक्रय योग्य क्षेत्र समुदाय के लिये उत्पादन के निर्णय से प्रारंभ होती है और तकनीकी, आर्थिक विचार, फसल की कटाई पूर्व व बाद की क्रियाओं, एकत्रीकरण, श्रेणीकरण, भण्डारण, परिवहन व वितरण पर आधारित कार्यात्मक और संस्थागत प्रणाली की विपणन संरचना के सभी उद्यानिकी फसलों का …

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कृषि वित्त एवं कृषि साख से तात्पर्य, कृषि वित्त या साख की आवश्यकता

कृषि वित्त एवं कृषि साख से तात्पर्य उस वित्त (साख) से होता है जिसका उपयोग कृषि से संबंधित विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए होता है। कृषि वित्त की आवश्यकता सामान्यत: भूमि पर स्थायी सुधार करने, बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि यंत्रा पर क्रय करने, सिंचाई की व्यवस्था करने, मालगुजारी देन, विपणन से सम्बद्ध कार्य अथवा …

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महाभारत के पर्व के नाम

‘महाभारत’ का प्रणयन 18 पर्वों या खण्डों में हुआ है, जिनके नाम इस प्रकार हैं- आदि, सभा, वन, विराट्, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शान्ति, अनुशासन, अश्वमेध, आश्रमवासी, मौसल, महाप्रस्थानिक तथा स्वर्गारोहण। प्रत्येक पर्व में वर्णित विषयों की सूची इस प्रकार है- महाभारत के पर्व आदि पर्व-  महाभारत की रचना की कथा, ब्रह्मा की …

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