वित्तीय पूर्वानुमान क्या है ?

वित्त की उपादेयता निर्विवाद है, भावी वित्तीय आवश्यकताओं का पूर्वानुमान वित्तीय पूर्वानुमान कहलाता है। वित्तीय पूर्वानुमान एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत कोष प्रवाह विवरणों, भूतकालीन लेखों, वित्तीय अनुपातों इत्यादि के आधार पर भावी वित्तीय दषाओं का निरूपण किया जाता है। इसके अन्र्तगत सम्भाव्य रोकड़ अन्तर्वाहों (Inflows) तथा रोकड़ बहिर्वाहों (Outflows) का आंकलन किया जाता है। वास्तविक …

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पूंजी की लागत का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, महत्व एवं वर्गीकरण

पूँजी की लागत का अर्थ एवं परिभाषा पूंजी की लागत एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे अनेक अर्थो में प्रयुक्त किया जाता है। पूंजी प्रदाता या विनियोक्ता के दृष्टिकोण से यह उस त्याग का पुरस्कार है जिसको वह वर्तमान उपभोग को स्थगित करके भविष्य में विनियोग के बदले प्राप्त करने की इच्छा रखता है। उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण …

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जोखिम एवं आय विश्लेषण

जोखिम एवं आय की प्रारम्भिक विचारधारा यह है कि आधुनिक व्यवसाय में आय का सम्बन्ध जोखिम से सम्बन्धित है। वर्तमान समय में व्यवसाय में लाभ कमाना जोखिम के ऊपर निर्भर करता है। जिस व्यवसाय या पेशें में जितना अधिक जोखिम होता है, उस व्यवसाय एवं पेशा में उतना अन्धिाक लाभ की सम्भावना अधिक होती है। किसी …

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पूंजी बजटन क्या है ?

पूंजी बजटन का आशय के विभिन्न स्त्रोतों से पूंजी प्राप्त करने केलिए बजट बनाने से नहीं है, बल्कि यह एक विनियोजन निर्णय है। इसलिए कि पूंजी बजटन पूंजी के दीर्घकालीन नियोजन से सम्बन्धित एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत पूंजीगत विनियोग की भावी लाभोत्पादकता का अध्ययन करना, उसकी पूंजी लागत की गणना करके अर्जन और लागत की …

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वित्त के स्रोत

किसी भी संगठन में वित्त के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके आधार पर एक संगठन अथवा संस्था का जन्म होता है। दीर्घकालीन, मध्यकालीन एवं अल्पकालीन वित्त के साधन संगठन के जीवन क्रम में अपरिहार्य है। प्रस्तुत इकार्इ में इनकी क्रमानुसार व्याख्या की गर्इ है जो एक कम्पनी के जीवन चक्र को निश्चित करते हैं …

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कार्यशील पूंजी का अर्थ, आवश्यकता, महत्व, प्रकार एवं स्रोत

किसी भी संगठन में कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी …

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स्कन्ध प्रबंध का अर्थ

स्कन्ध का प्रबन्ध  स्कन्ध का आशय स्कन्ध के भौतिक सत्यापन से होता है जिसमें गणना प्रधान क्रिया मानी जाती है। परन्तु आजकल इसका अर्थ व्यापक रूप से लगाया जाता है। स्कन्ध में विभिन्न वस्तुओं की रखी गयी मात्रा से होता है अर्थात यदि तैयार माल का स्कन्ध उचित है तो ग्राहकों की सेवा उचित ढंग से …

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रोकड़ प्रबंध क्या है ?

रोकड़ एक ऐसी महत्वपूर्ण चल सम्पत्ति है जिसके बिना किसी व्यवसाय का सफल संचालन करना संभव नहीं होता। रोकड़ में सर्वाधिक तरलता का गुण रहता है। इस कारण रोकड़ का प्रबन्ध वित्त प्रबन्धकों की सबसे बड़ी समस्या है। रोकड़ प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य संस्था की तरलता एवं लाभदायकता में वृद्धि करना होता है। कार्यशील पूंजी के …

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लाभांश नीति का अर्थ, आवश्यक तत्व एवं प्रकार

लाभांश नीति एक बहुत ही लोचपूर्ण एवं व्यापक शब्द है। लाभांश नीति दो शब्दों लाभांश नीति से मिलकर बना है। लाभांश से अभिप्राय कम्पनी की आय में से अंशधारियो को मिलने वाले हिस्से से नीति से अभिप्राय ‘व्यवहार के तरीके’ या ‘कार्य करने के सिद्धान्तों’ से होता है। अत: लाभांश नीति का अर्थ लाभांश वितरित करने …

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लाभांश के प्रकार

लाभांश नीतियों में लाभांश के प्रकारों को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। कम्पनी विभिन्न प्रकार के लाभांश का वितरण कर अंशधारियों को कम्पनी के ्प्रति निष्ठावान होने के लिए प्रेरित करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के लाभांशों का वर्णन किया जा रहा है। जो कम्पनी की लाभांश नीतियों को प्रभावित करते हैं। और कम्पनी अपने भावी …

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