परामर्श के प्रकार : निदेशात्मक, अनिदेशात्मक, समन्वित परामर्श

परामर्श के प्रकार परामर्श के प्रकार paramarsh ke prakar कुछ विद्वानों ने परामर्श के तीन प्रकारों का उल्लेख किया है यथा- निदेशात्मक परामर्श-इस प्रकार के परामर्श में परामर्शक ही सम्पूर्ण प्रक्रिया का निर्णायक होता है। प्रत्याशी परामर्शदाता के ओदशों के अनुकूल अपने को ढालता है। इसे कभी-कभी आदेशात्मक परामर्श भी कहते हैं। इस क्रिया के मूल में …

Read more

परामर्श की प्रक्रिया के अंग, चरण, लक्ष्य एवं सिद्धांत

परामर्श प्रक्रिया के आवश्यक तत्व मिस ब्रेगडन ने इन परिस्थितियों के उत्पन्न होने पर परामर्श की आवश्यकता को इंगित किया है- वह परिस्थिति जब कि व्यक्ति न केवल सही सूचनायें चाहता है वरन् अपने व्यक्तिगत समस्याओं का भी समाधान चाहता है। जब विद्यार्थी अपने से अधिक बुद्धिमान श्रोता चाहता है जिससे वह अपनी समस्याओं का समाधान …

Read more

व्यक्तिगत निर्देशन क्या है व्यक्तिगत निर्देशन की आवश्यकता क्या है?

व्यक्ति की कुछ निजी समस्याएँ भी होती है जिनका समाधान वह स्वयं नहीं कर पाता। मानव जीवन के सम्यक उत्थान के लिए आवश्यक है कि उसका जीवन समस्या रहित हो, वास्तव में निजी समस्याएँ उसके सम्पूर्ण जीवन के विकास को प्रभावित कर देती है। तनावग्रस्त शरीर, मन एवं जीवन किसी अन्य क्षेत्र में विकास एवं समायोजन …

Read more

निर्देशन के सिद्धांत और निर्देशन की प्रविधियां

आज के भौतिकवादी जीवन में हताशा, निराशा एवं कुसमायोजन की समस्याओं ने भयावह रूप ले लिया है। इन सभी समस्याओं ने जीवन के प्रत्येक चरण में निर्देशन की आवश्यकता को जन्म दिया। निर्देशन प्रक्रिया कुछ परम्परागत मान्यताओं पर निहित होता है। ये मान्यतायें हैं- 1. व्यक्ति भिन्नताओं का होना-व्यक्ति अपनी जन्मजात योग्यता, क्षमता, अभिवृतियों एवं रूचियों …

Read more

निर्देशन का अर्थ, परिभाषा, प्रकृति, क्षेत्र एवं उद्देश्य

निर्देशन एक प्रक्रिया है जिसके अनुसार एक व्यक्ति को सहायता प्रदान की जाती है जिससे कि वह अपने समस्या को समझते हुए आवश्यक निर्णय ले सके और निष्कर्ष निकालते हुये अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सके। यह प्रक्रिया व्यक्ति को उसे व्यक्तित्व ,क्षमता, योग्यता तथा मानसिक स्तर का ज्ञान प्राप्त कराती है यह व्यक्ति को उसकी …

Read more

परीक्षण मानक का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

शिक्षा, मनोविज्ञान व समाजशास्त्र के अधिकांश चरों की प्रकृति अपरोक्ष होती है जिसके कारण उनके मापन की किसी एक सर्वस्वीकृत मानक ईकाई का होना सम्भव नही हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्राप्तांकों को अर्थयुक्त बनाने या उसकी व्याख्या करने की समस्या उत्पन्न होती है। इसके लिए परीक्षण निर्माता कुछ ऐसे सन्दर्भ बिन्दु निर्धारित करता है …

Read more

परीक्षण वैधता क्या है परीक्षण वैधता के प्रकार?

परीक्षण वैधता का परीक्षण के उद्देश्यों से घनिष्ठ सम्बन्ध है। एक अवैध परीक्षण कभी भी निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता। कोई परीक्षण जितनी शुद्धता और सार्थकता से अपने उद्देश्यों का मापन करता है वह परीक्षण उतना ही वैध होता है। अत: किसी परीक्षण की वैधता उसकी वह मात्रा है जिस सीमा तक वह उस वस्तु …

Read more

भारत की पंचवर्षीय योजनाएं क्या है?

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ भारत में आथिर्क नियोजन के लगभग छ: दशक पूरे हो चुके है। इन वर्षों में नियोजन के अन्तगर्त कितना आर्थिक विकास हुआ, क्या विकास के दर पयार्प्त है।? क्या विकास उचित दिशा में हो रहा है? इत्यादि बातों का अध्ययन हम यहां करेगें। भारत की पंचवर्षीय योजनाएं  प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) यह …

Read more

शैक्षिक माप मूल्यांकन और मूल्यांकन क्या है शैक्षिक मापन तथा मूल्यांकन तकनीक की जानकारी क्यों आवश्यक है।

शैक्षिक मापन तथा मूल्यांकन का शिक्षण प्रक्रिया की गुणवत्ता के निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह केवल वर्तमान स्थिति की ही व्याख्या नहीं करता वरन भविष्य में होने वाले परिवर्तन की रूपरेखा भी तैयार करता है। चूंकि आज लिया जाने वाला कोई भी निर्णय तुरन्त कोई परिणाम नहीं देता बल्कि उसका असर भविष्य में दिखता है …

Read more

मापन – शैक्षिक मापन ( मापन एवं मूल्यांकन ) – अर्थ, परिभाषा, महत्व, उद्देश्य, कार्य

हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षण अपने चारों ओर हो रहे परिवर्तनों के प्रति सजग रहते हैं तथा उन प्रत्येक परिवर्तनों का मात्रात्मक आंकलन करते हैं जो हमें किसी न किसी प्रकार प्रभावित करते हैं। शिक्षा सतत् गत्यात्मक प्रक्रिया में इससे जुडे़ प्रत्येक व्यक्ति, छात्र, अभिभावक, अध्यापक, प्रशासक तथा नीति निर्माता सदैव किसी न किसी रुप …

Read more