ग्रामीण विकास का अर्थ, परिभाषा, ग्रामीण विकास से सम्बन्धी मुद्दे

ग्रामीण विकास एवं बहुआयामी अवधारणा है जिसका विश्लेषण दो दृष्टिकोण के आधार पर किया गया है: संकुचित एवं व्यापक दृष्टिकोण। संकुचित दृष्टि से ग्रामीण विकास का अभिप्राय है विविध कार्यक्रमों, जैसे- कृषि, पशुपालन, ग्रामीण हस्तकला एवं उद्योग, ग्रामीण मूल संरचना में बदलाव के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना।  वृहद दृष्टि से ग्रामीण विकास का अर्थ …

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मानव विकास के उद्देश्य एवं महत्व

विकास की अवधारणा के विविध आयाम है: आर्थिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक।  आर्थिक विकास का आशय है प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, कुल राष्ट्रीय उत्पाद एवं सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी। आर्थिक विकास वह विधि है जिसके द्वारा कोई राष्ट्र सामाजिक प्रगति का लक्ष्य प्राप्त करता है।  यह माना जाता है कि आर्थिक विकास वह माध्यम …

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ग्रामदान क्या है ग्रामदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुये विनोबा जी ने इसके 7 लाभ बतायें हैं

यदि किसी गॉव में रहने वाले 80 प्रतिशत भू-स्वामी अपनी भूमि का स्वामित्व भूमिहीनों को प्रदान कर दें तथा प्रदान की गयी यह भूमि सम्पूर्ण भूमि के 51 प्रतिशत से अधिक हो तो गॉव का ग्रामदान में मिली हुयी भूमि का स्वामित्व सम्पूर्ण समुदाय का होता है, किसी एक व्यक्ति का नहीं । ग्रामदान के महत्व …

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सहकारी आंदोलन क्या है सहकारी आंदोलन के स्तर ?

सहकारिता के विचार ने भारत में ठोस रूप सबसे पहले उस समय ग्रहण किया जब गॉवों में विधमान ऋृण भार का सामना करने के लिए 1904 में सहकारी ऋण समितियां अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम में केवल ऋण समितियों की रचना के लिए ही व्यवस्था की गयी थी इसलिए गैर ऋण समितियों की रचना के लिए …

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विकास के सिद्धांत का अर्थ, परिभाषा एवं विकास के प्रारूप

विकास का व्यक्ति, समूह और समाज पर प्रभाव पड़ता है और सामाजिक परिवर्तन का विकास से सह-सम्बन्ध है। विकास का प्रारूप आर्थिक हो अथवा सामाजिक, राजनैतिक हो अथवा संसथागत, भौतिक हो अथवा अभौतिक जन-भावना की सन्तुश्टीकरण से सैद्धान्तिक रूप से जुड़ा है। विकास के सिद्धांत का अर्थ एवं परिभाषा विकास एक उध्र्वगामी प्रक्रिया है जिसे नियोजित …

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स्वयंसेवी संस्था क्या है स्वयंसेवी संस्था के नियम, मापदंड, विशेषताएं

स्वयंसेवी शब्द लैटिन भाषा के शब्द, जिसका अर्थ है ‘इच्छा’ अथवा ‘स्वतंत्रता’ से लिया गया है। भारतीय संविधान की धारा 19 (1) (ऋ) के अन्तर्गत भारतीय नागरिकों को समुदाय बनाने का अधिकार प्राप्त है। स्वयंसेवी संस्था बनाने के नियम स्वयंसेवी समाज सेवाओं की विभिन्न परिभाषाओं की समीक्षा करते हुए इनकी चार प्रमुख विशेषताएं बतलायी हैं :- …

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वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा, विशेषताएँ, उद्देश्य

भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित रूप …

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संचार किसे कहते हैं परिभाषा व प्रकार

जब मनुष्य अपने हाव-भाव, संकेतों और वाणी के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, तो संचार कहते है। दूसरे शब्दों मे हम किसी के साथ सूचना या विचार या दृष्टिकोण का आदान-प्रदान करते हैं संचार कहते हैं। संचार का अर्थ  संचार अंग्रेजी भाषा के कम्युनिकेशन (Communication) शब्द से बना है जिसकी व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के …

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स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन || स्वामी विवेकानंद जी के शैक्षिक विचार / शैक्षिक दर्शन

स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता के एक प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त के घर हुआ। माता प्रेम से उन्हें वीरेश्वर कहती थी पर नामकरण संस्कार के समय उनका नाम नरेन्द्रनाथ रखा गया। उनकी माता जी धार्मिक विचारों की थी। उनका परिवार एक पारंपरिक कायस्थ परिवार था, स्वामी विवेकानंद के 9 भाई-बहन …

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संचार का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, संचार प्रक्रिया एवं तत्व

संचार एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में मनुष्य आपस में बातचीत करते हैं और अपने अनुभवों का आपस में आदान-प्रदान करते हैं। इसके बिना में मनुष्य की प्रगति संभव नहीं है। संचार संबंध जोड़ने की एक महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके द्वारा अपने एवं अन्य व्यक्तियों के ज्ञान एवं अनुभव को साझा (Share) किया जा सकता है। मनुष्य …

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