प्रबंध की संकल्पना एवं संरचना

बहुधा प्रबन्ध शब्द का प्रयोग सुव्यवस्थित, सुसंगठित तथा क्रमबद्ध रूप से कार्यों के सम्पन्न होने के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में, कम्पनियों का संचालन करने वाले व्यक्तियों के संदर्भ में भी इसका प्रयोग करते हैं। इन कम्पनियों के संचालन हेतु व्यवसायिक रूप से प्रशिक्षित प्रबंधकों की आवश्यकता होती है। इन प्रबन्धकों की सफलता उनके …

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प्रबंध के सम्प्रदाय

प्रबन्ध की विचारधारा का जन्म कब हुआ, इसका स्रोत क्या था? इस विषय में चिरकाल से आजतक स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किन्तु इस सम्बन्ध में यह तो स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि जितनी पुरानी हमारी मानव सभ्यता है उतना ही पुराना प्रबन्ध की विचारधारा का जन्म। इसके सम्बन्ध …

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प्रबंध के सिद्धांत

सिद्धान्त शब्द का प्रयोग प्राय: एक मूलभूत सार्वभौमिक सच्चार्इ अथवा तर्कयुक्त वाक्य से होता है जो कार्य तथा कारण के बीच सम्बन्ध को स्थापित करता है तथा विचार उद्देश्य और कार्य का पथ प्रर्दशन करता है। इस प्रकार सिद्धान्त समझने तथा किन कार्यों से क्या परिणाम होंगे, का पूर्वानुमान लगाने में सहायक होते हैं। इस प्रकार …

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नियोजन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं सिद्धान्त

नियोजन भविष्य में किये जाने वाले कार्य के सम्बन्ध में यह निर्धारित करता है कि अमुक कार्य को कब किया जाय, किस समय किया जाय कार्य को कैसे किया जाय कार्य में किन साधनों का प्रयोग किया जाय, कार्य कितने समय में हो जायेगा आदि । उदाहरण : श्री शिवम से उनके व्यवसायिक सहयोगी श्री सत्यम …

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निर्णयन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं प्रक्रिया

निर्णयन का शाब्दिक अर्थ, किसी निष्कर्ष पर पहुचने से लगाया जाता है। व्यवसाय में प्रवर्तन से समापन तक निर्णय ही लेने पड़ते हैं। प्रबन्धकों को उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में से श्रेष्ठतम विकल्प का चयन करना पड़ता है जिससे न्यूनतम लागत पर, कम समय में, कुशलतापूर्वक कार्यों को सम्पन्न किया जा सके। पीटर एफ. ड्रकर के शब्दों …

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विभागीकरण का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व

किसी व्यावसायिक संगठन को विभिन्न विभागों व उप-विभागों में विभक्त करना ही विभागीकरण कहलाता है। किसी निर्माणी संस्था में पाये जाने वाला क्रय विभाग, उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, विक्रय विभाग, उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, विक्रय विभाग, शोध एवं विकास विभाग, से विवर्गीय विभागीकरण ही है। व्यवसाय की प्रकृति एवं आकार को ध्यान में रखते हुए विभागीय …

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समन्वय क्या है

किसी भी संगठन में समन्वय एक महत्वपूर्ण प्रकार्य है जो संगन के सभी अंगों को आपस में जोड़कर रखता है। प्रस्तुत इकार्इ में समन्वय का अर्थ, महत्व, सिद्धान्त एवं समन्वय को प्रबन्ध के सार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समन्वय को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रबन्ध का केन्द्र बिन्दु माना गया है। समन्वय की प्रारम्भिक …

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संघर्ष प्रबंधन क्या है ?

पूंजीवादी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता औद्योगिक संघर्ष है। इसका तात्पर्य मालिकों और श्रमिकों के मध्य होने वाले मतभेदों से है जिनका परिणाम हड़ताल, तालाबंदी, काम की धीमी गति, घेराव तथा इस प्रकार की अन्य समस्याओं के रूप में सामने आता है। अत: औद्योगिक संघर्ष वह मतभेद है जो रोजगार देने या न देने अथवा …

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वित्तीय प्रबंध की प्रकृति, क्षेत्र तथा उद्देश्य

मनुष्य द्वारा अपने जीवन काल में प्राय: दो प्रकार की क्रियाएं सम्पादित की जाती है आर्थिक क्रियायें  अनार्थिक क्रियाएं । आर्थिक क्रियाओं के अन्र्तगत हम उन समस्त क्रियाओं को सम्मिलित करते हैं जिनमें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से धन की संलग्नता होती है जैसे रोटी, कपड़े, मकान की व्यवस्था आदि। अनार्थिक क्रियाओं के अन्तर्गत पूजा-पाठ, व …

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वित्त कार्य क्या है ?

वित्त कार्य से अभिप्राय किसी भी संगठन में वित्त सम्बन्धी कार्यों से है। अर्थात औद्योगिक एवं व्यावसायिक संगठनों में वित्तीय प्रबन्धक द्वारा संगठन में जो भी कार्य किये जाते हैं, उन्हें वित्त कार्य कहा जाता है। वित्त कार्य को हम प्रमुखतया तीन संदर्भों में परिभाशित कर सकते हैं। प्रथम संदर्भ में वित्त कार्य से आशय संगठन …

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