आर्थिक नियोजन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य और आवश्यकता

आर्थिक नियोजन का अर्थ एक संगठित आर्थिक प्रयास से है जिसमें एक निश्चित अवधि में सुनिश्चित एवं सुपरिभाषित सामाजिक एवं आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आर्थिक साधनों का विवेकपूर्ण ढंग से समन्वय एवं नियंत्रण किया जाता है।  आर्थिक नियोजन की परिभाषा आर्थिक नियोजन की परिभाषा आर्थिक नियोजन की विद्वानों द्वारा परिभाषाएँ दी गई हैं- डॉ0 …

Read more

यथार्थवाद का अर्थ, परिभाषा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यथार्थवाद एक भौतिकवादी दर्शन है। वस्तु को वास्तविक अथवा यथार्थ मानने के कारण ही इस विचारधारा को वास्तववाद अथवा यथार्थवाद की संज्ञा दी जाती है। यथार्थवाद जगत को मिथ्या कहने वाली भावना का विरोधी स्वर है। यथार्थवाद का अर्थ यथार्थवाद का अर्थ यथार्थवाद के लिए अंग्रेजी का शब्द ‘रियलिज्म’ है। ‘रियल’ शब्द ग्रीक भाषा के रीस …

Read more

व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ एवं परिभाषा, पक्ष तथा विपक्ष में तर्क

आधुनिक काल में नागरिकों के जीवन और समाज पर व्यावसायिक कार्यकलापों का विभिन्न रूप से बहुत बड़ा प्रभाव होता है। पूर्व-आधुनिक काल में व्यवसायी वर्ग के लिए व्यवसाय के ‘सामाजिक’ मूल्य के संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती थी क्योंकि उस समय आशा की जाती थी कि बाजार की शक्तियाँ मूल्य व्यवस्था को स्वयं …

Read more

आर्थिक प्रणाली का अर्थ, परिभाषा, मूल तत्व, कार्य एवं प्रकार

आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है। यदि …

Read more

व्यावसायिक पर्यावरण के प्रकार – Business Environment

व्यावसायिक पर्यावरण मुख्य रूप से आन्तरिक एवं बाह्य पर्यावरण के योग से बनता है। आन्तरिक पर्यावरण के घटक है जो एक फर्म के नियंत्रण में होते हैं। इस प्रकार के घटक फर्म के संसाधनों, नीतियों एवं उद्देश्यों से सम्बन्धित होते हैं। लेकिन जब हम व्यावसायिक पर्यावरण के उन घटकों की बात करते हैं जो गतिशील एवं …

Read more

शून्य आधारित बजट क्या होता है?/What Is Zero-Based Budgeting

शून्य आधार बजट ऐसी नियोजन एवं बजट प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया जाता …

Read more

मानव संसाधन लेखांकन अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, उद्देश्य, लाभ या महत्व

मानव संसाधन लेखांकन को एक ऐसी लेखांकन पद्धति के रूप में माना जा सकता है, जिसके प्रयोग से मानव संसाधनों को सम्पत्ति के रूप में मान्यता प्रदान की जाती हो और अन्य भौतिक साधनों की भांति जिनके मूल्य को माप कर लेखा पुस्तकों में दर्ज किया जाता हो। इसके माध्यम से मानव संसाधनों के सम्बन्ध में …

Read more

प्रमाप लागत विधि क्या है प्रमाप लागत विधि के उद्देश्य ?

प्रमाप लागत नियंत्रण की वह विधि है जिसमें भविष्य में किये जाने वाले उत्पादन के प्रमाप लक्ष्य, पहले से ही पूर्व निर्धारित कर लिए जाते हैं। इसके बाद वास्तविक लागत के कई साधनों (सामग्री, श्रम तथा विचरण) की तुलना प्रमाप लागत (पूर्व निर्धारित लागत) से की जाती है व दोनों के विचरणों या अन्तरों का पता …

Read more

पंचायती राज व्यवस्था क्या है भारत में पंचायती राज की स्थिति व सुदृढ़ीकरण के प्रयास।

‘पंचायत’ का शाब्दिक अर्थ ‘पाँच पंचों की समिति’ से है। प्राचीनकाल म ग्रामों के झगड़ों के निराकरण हेतु पाँच पंचों की समिति की व्यवस्था को अपनाया गया था। इस व्यवस्था के अंतर्गत ‘पंचायत’ शब्द का जन्म हुआ है।  पंचायती राज ग्राम पंचायत का कार्य ग्रामों तक ही सीमित होता है। प्रायः जनसंख्या एवं क्षेत्र के हिसाब …

Read more

विकास क्या है, अर्थ, परिभाषा, समझ एवं स्पष्टता

विकास परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही हो सकते हैं। किसी भी समाज, देश, व विश्व में कोई भी सकारात्मक परिवर्तन जो प्रकृति और मानव दोनों को बेहतरी की ओर ले जाता है वही वास्तव में विकास है।  अगर हम विश्व के इतिहास में नजर डालें तो पता चलता है कि विकास …

Read more