व्यापार चक्र का अर्थ, परिभाषा, अवस्थाएं, सिद्धांत

किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय के बाद आर्थिक क्रियाओं में होने वाले बदलाव को व्यापार चक्र कहते है। किसी देश के आर्थिक विकास के लिए आर्थिक क्रियाओं में होने वाले उतार चढ़ाव को सामान्यत: व्यापार चक्र कहते है। व्यापारिक-चक्र के चढ़ाव के दौरान ऊँची राष्ट्रीय आय, अधिक उत्पादन, अधिक रोज़गार तथा ऊँची कीमतें पाई जाती हैं। …

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लाभांश किसे कहते हैं लाभांश के प्रकार?

कंपनी के लाभ का वह भाग जो अंशधारियों को उनकी पूंजी पर, विनियोजन पर देय होता है, लाभांश कहलाता है। लाभांश में अंतिम तथा अंतरिम लाभांश का समावेश होता है। कंपनी में लाभांश की दर कंपनी के संचालकों द्वारा निश्चित की जाती है और कंपनी की वार्षिक साधारण सभा में अंशधारियों द्वारा अनुमोदित की जाती है। …

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लाभांश नीति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, एक सुदृढ़ लाभांश नीति के आवश्यक तत्व

लाभांश नीति का अर्थ है कि वितरण और बकाया कोष रखने के लिए एक नियमित पहुंच को अपनाना कि वर्ष दर वर्ष किसी अस्था्ई निर्णय को लेना। यह लाभांश की अदायगी के समय और मूल्य पर भी ध्यान देती है । उपयुक्त लाभांश नीति बनाना प्रबन्ध् के लिए बड़ा सोच विचार का कार्य है क्योंकि इससे …

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रोकड़ प्रबंध क्या है इसके उद्देश्य Cash Management in hindi

रोकड़ एक ऐसी महत्वपूर्ण चल सम्पत्ति है जिसके बिना किसी व्यवसाय का सफल संचालन करना संभव नहीं होता। रोकड़ में सर्वाधिक तरलता का गुण रहता है। इस कारण रोकड़ का प्रबंध वित्त प्रबंधकों की सबसे बड़ी समस्या है। रोकड़ प्रबंध का मुख्य उद्देश्य संस्था की तरलता एवं लाभदायकता में वृद्धि करना होता है। कार्यशील पूंजी के …

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स्कन्ध प्रबंध (Inventory Management) क्या है ?

स्कन्ध का आशय स्कन्ध के भौतिक सत्यापन से होता है जिसमें गणना प्रधान क्रिया मानी जाती है। परन्तु आजकल इसका अर्थ व्यापक रूप से लगाया जाता है। स्कन्ध में विभिन्न वस्तुओं की रखी गयी मात्रा से होता है अर्थात यदि तैयार माल का स्कन्ध उचित है तो ग्राहकों की सेवा उचित ढंग से की जा सकेगी। …

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कार्यशील पूंजी का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं स्रोत

कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यकता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी भी संगठन में एक …

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अल्पकालीन वित्त के स्रोत/short term sources of finance

किसी भी संगठन में वित्त के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके आधार पर एक संगठन अथवा संस्था का जन्म होता है। दीर्घकालीन, मध्यकालीन एवं अल्पकालीन वित्त के साधन संगठन के जीवन क्रम में अपरिहार्य है। प्रस्तुत इकाई में इनकी क्रमानुसार व्याख्या की गई है जो एक कम्पनी के जीवन चक्र को निश्चित करते हैं …

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पूंजी संरचना का अर्थ, परिभाषा एवं सिद्धांत

किसी व्यावसायिक उपक्रम की कुल दीर्घकालीन पूंजी में पूंजी प्राप्ति के विभिन्न स्रोतों अर्थात स्वामिगत पूंजी एवं ऋणगत पूंजी के अनुपात का उचित संयोजन ही पूंजी संरचना कहलाता है। पूंजी संरचना का अर्थ पूंजी संरचना से अभिप्राय स्वामिगत तथा ग्रहीत निधि उधार कोषों के मिश्रण से है। एक अनुकूल पूंजी संरचना वह होती है जिसमें ऋण …

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पूंजी बजटन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ

पूंजी बजटन का आशय के विभिन्न स्रोतों से पूंजी प्राप्त करने के लिए बजट बनाने से नहीं है, बल्कि यह एक विनियोजन निर्णय है। इसलिए कि पूंजी बजटन पूंजी के दीर्घकालीन नियोजन से सम्बन्धित एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत पूंजीगत विनियोग की भावी लाभोत्पादकता का अध्ययन करना, उसकी पूंजी लागत की गणना करके अर्जन और लागत …

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पूंजी लागत का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, वर्गीकरण

पूंजी की लागत एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे अनेक अर्थो में प्रयुक्त किया जाता है। पूंजी प्रदाता या विनियोक्ता के दृष्टिकोण से यह उस त्याग का पुरस्कार है जिसको वह वर्तमान उपभोग को स्थगित करके भविष्य में विनियोग के बदले प्राप्त करने की इच्छा रखता है। उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण से पूंजी की लागत पूंजी का उपभोग …

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