एडलर द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धांत का विवेचन

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धान्त ‘‘नवमनी विश्लेषणात्मक उपागम’’ पर आधारित है। एडलर यद्यपि फ्रायड के काफी नजदीक थे, किन्तु वे व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रायड के कुछ विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने फ्रायड से पृथक होकर एक नये व्यक्तित्व सिद्धान्त को जन्म दिया, जिसका नाम रखा – ‘‘वैयक्तित्व मनोविज्ञान का सिद्धान्त’’ इस सिद्धान्त की खास …

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अरविन्द घोष जीवन परिचय, जीवन दर्शन एवं शिक्षा दर्शन

अरविन्द घोष का जन्म 15 अगस्त 1872 को कलकत्ता में हुआ। अरविन्द घोष के पिता डॉ. कृष्णधन घोष विलायत से डॉक्टरी की पढ़ाई करके लौटे तो अंग्रेजियत के भक्त होकर आये। अरविन्द घोष को जन्म के समय जो नाम दिया गया उसमें बीच में विलायती नाम भी जोड़ा हुआ था – अरविन्द ऐक्रॉइड घोष। घर में …

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आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय || Aadi shankaracharya ka jivan parichay

आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालरी गांव में सन् 684 ई. में हुआ था, उनके पिता का नाम शिवगुरू तथा माता का नाम सती था। शंकराचार्य ने बाल्यकाल से ही सन्यास ले लिया था और वेदान्त की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे महात्मा गोविन्दाचार्य के पास चले गए थे। शिक्षा प्राप्त करने के बाद …

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मंत्रयोग क्या है मंत्रयोग के प्रकार ?

शास्त्रों के अनुसार अनेक प्रकार के योग बताए गये हैं, इन सभी योग की साधना सबसे सरल और सुगम है। मंत्र योग की साधना कोई श्रद्धा पूर्वक व निर्भयता पूर्वक कर सकता है। श्रद्धापूर्वक की गयी साधना से शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर अभीष्ट की प्राप्ति की जा सकती है। अपने लक्ष्य को मंत्र योग द्वारा …

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हठयोग का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य

हठयोग में जब इड़ा और पिंगल नाड़ी, वाम और दक्षिण स्वर जब एक समान चलने लगें तो सुषुम्ना का जागरण होता है। जब सुषुम्ना निरन्तर चलने लगती है तो शरीर में सूक्ष्म रूप में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। जब कुण्डलिनी छरूचक्रों का भेदन करती हुई सहस्रार में जाकर परमशिव से मिलती हैं तो …

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ज्ञानयोग क्या है? ज्ञानयोग की साधना के किन साधनों एवं गुणों की आवश्यकता होती है?

ज्ञान योग बुद्धि और विश्लेषण का मार्ग है। यह विवेक से संबंधित है और इसकी अपनी एक क्रियाविधि होती है। इस क्रियाविधि का केन्द्र श्रवण स्मरण और विश्लेषण (मनन) और ध्यान करने की विधि (निदिध्यासन) के इर्दगिर्द घूमता है। आज वैज्ञानिक युग में मनुष्य काफी तर्कशील हो गया है। आज बौद्धिक शक्ति का बोलबाला है। विश्लेषण …

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भक्ति योग क्या है भक्ति योग के प्रकार?

भक्ति से तात्पर्य है कि ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रेमपूर्ण आसक्ति। यह शब्द भज् (सम्मिलित होने) धातु से निर्मित है और सहभागिता की ओर संकेत करता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाला योगी दिव्य ईश्वर के प्रति स्वयं को समर्पित करता है, भक्ति भाव से सेवा करता है और उनकी पूजा अर्चना में तल्लीन रहकर …

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कर्मयोग का अर्थ, परिभाषा, भेद एवं प्रकार

कर्मयोग उन लोगों के लिए है जो प्रकृति से सक्रिय होते हैं भगवद ्गीता में कर्म  योग के चार मुख्य नियम वर्णित हैं ताकि आप सभी तनावों से एकदम मुक्त होकर अपन े कर्म (कार्य) का हर क्षण आनन्द ले सके। कर्म कर्तव्य समझकर करें, कार्य को बिना आसक्ति से करें, परिणाम की चिंताओ को कभी …

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वेदांत दर्शन क्या है वेदांत दर्शन में योग का स्वरूप?

वेदांत दर्शन उपनिषद वैदिक साहित्य का अन्तिम भाग है इसलिए इसे वेदांत कहते हैं वेदांत का शाब्दिक अर्थ है- वेदों का अन्त (अथवा सार) वेदांत ज्ञानयोग की शाखा है इसका मुख्य श्रोत उपनिषद हैं जो वेद ग्रन्थों का सार समझे जाते हैं । यह महर्षि वेदव्यास रचित है। महर्षि व्यास के अनुसार यह ‘ब्रह्म’ सूत्र हैं …

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आहार आयोजन किसे कहते हैं आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले तत्व?

पोषण के सिद्धान्तों को मानते हुए परिवार की आवश्यकता, समय व धन के अनुसार कल्पना करके भोजन प्रस्तुत करता है। आहार आयोजन द्वारा गृहिणी अपने परिवार को सन्तुलित आहार प्रदान कर सकती है और आहार आयोजन का मुख्य उद्देश्य भी यही है।  आहार नियोजन एक कला है। कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया भोजन हर व्यक्ति …

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