फ्रांस की सामान्य दशा का वर्णन || फ्रांस की राज्यक्रांति के प्रधान कारणों की व्याख्या

18वीं शताब्दी के आरंभ में 1715 ई. में लुई चतुर्दश की मृत्यु उपरांत उसका पुत्र लुई पंद्रहवें के नाम से फ्रांस के राज्य सिंहासन पर बैठा। उसके शासनकाल में दिन प्रतिदिन देश का पतन होता चला गया। जिसके कारण लुई पंद्रहवें का शासनकाल अराजकता, अव्यवस्था, अशांति ओर अभावों का युग कहलाता है। उस समय फ्रांस में …

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1776 ई. अमेरिकी क्रांति के 3 मुख्य कारण

सोवियत संघ के विखण्डन के पश्चात् विश्व की प्रथम शक्ति के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका की पहचान निर्विवाद है परन्तु यही देश अठारहवी सदी के पूर्वार्द्ध में ग्रेट ब्रिटेन के अधीन था। यह अधीनता अठारहवीं शताब्दी में यूरोप एवं अमेरिका में उभरे दो आदर्शों स्वतंत्रता एवं समानता के सामने बनी न रह सकी। 1775 ई. …

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औद्योगिक क्रांति पहले इंग्लैण्ड में ही क्यों हुई? औद्योगिक क्रांति के कुछ महत्त्वपूर्ण कारणों का वर्णन।

औद्योगिक क्रांति का अर्थ यह है कि उद्योगों की प्राचीन, परम्परागत और धीमी गति को छोड़कर नये, वैज्ञानिक तथा तेजी से उत्पादन करने वाले यंत्रों व मशीनों का प्रयोग। घरों में तथा घरेलू उद्योगों में हाथ से बनने वाली वस्तुएँ इस परिवर्तन के कारण बड़े-बड़े कारखानों में तथा मशीनों से बनने लगीं। इस क्रांति ने ऐसे …

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कृषि क्रांति और उनके जनक | Krishi Kranti Ke Janak

बारहवीं सदी में कृषि तकनीक के क्षेत्र में काफी परिवर्तन हुए। पुराने हल्के हल का स्थान भारी हल ने ले लिया जो कि गहराई तक जमीन में जुताई कर सकता था। पहले जुए को बैल के सींगों पर बाँधा जाता था, परंतु अब हल के जुए को सींगों के स्थान पर बैल के कंधों पर बाँधा …

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यूरोप में उपनिवेशवाद के आरंभ के कारण थे

1453 ई. में तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लेने के पश्चात् स्थल मार्ग से यूरोप का एशियायी देशों के साथ व्यापार बंद हो गया। अत: अपने व्यापार को निर्बाध रूप से चलाने हेतु नये समुद्री मार्गों की खोज प्रारंभ हुई। कुतुबनुमा, गतिमापक यंत्र, वेध यंत्रों की सहायता से कोलम्बस, मैगलन एवं वास्काेि डगामा आदि साहसी …

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यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारण

महात्मा ईसा द्वारा संस्थापित ईसाई धर्म के विभाजन की कहानी बहुत पुरानी है। उनकी मृत्यु के तीन-चार सौ वर्षों के बाद ही ईसाई धर्म दो शाखाओं-रोमन कैथोलिक चर्च और ग्रीक ओर्थोडक्स चर्च में विभाजित हो गया था। यूरोप में रूस तथा बाल्कन क्षेत्र के अलावा अन्य सभी राज्यों में रोमन कैथोलिक चर्च का वर्चस्व कायम रहा। उसका …

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यूरोप में पुनर्जागरण के इन कारणों को इसके लिए उत्तरदायी माना जा सकता है –

पुनर्जागरण एक फ़्रेंच शब्द (रेनेसां) है, पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ है – ‘फिर से जागना’। इसे ‘नया जन्म’ अथवा ‘पुनर्जन्म’ भी कह सकते हैं। परन्तु व्यावहारिक दृष्टि से इसे मानव समाज की बौद्धिक चेतना और तर्कशक्ति का पुनर्जन्म कहना ज्यादा उचित होगा। प्राचीन यूनान और रोमन युग में यूरोप में सांस्कृतिक मूल्यों का उत्कर्ष हुआ था। …

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यूरोप में सामंतवाद के पतन के कारणों की विवेचना

सामंतवाद एक ऐसी मध्ययुगीन प्रशासकीय प्रणाली और सामाजिक व्यवस्था थी, जिसमें स्थानीय शासक उन शक्तियों और अधिकारों का उपयोग करते थे जो सम्राट, राजा अथवा किसी केन्द्रीय शक्ति को प्राप्त होते हैं। सामाजिक दृष्टि से समाज प्रमुखता दो वर्गों में विभक्त था- सत्ता ओर अधिकारों से युक्त राजा और उसके सामंत तथा अधिकारों से वंचित कृषक …

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इतिहास का अर्थ, परिभाषा, विषय क्षेत्र, अध्ययन का महत्व

इतिहास न केवल भूतकाल से सम्बन्धित है वर्तमान और भविष्य से भी इसका सम्बन्ध है। अतीत (भूतकाल) की घटनाओं से हम वर्तमान में प्रेरणा लेकर भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं या भविष्य के प्रति सजग रहते हैं। इतिहास पृथ्वी के धरातल पर घटित सभी घटनाओं का द्योतक है जो चाहे राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक अथवा …

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उपनिषदों की संख्या प्रमुख उपनिषदों का परिचय

उपनिषद् शब्द ‘उप’ एवं ‘नि’ उपसर्ग पूर्वक सद् (सदृलृ) धातु में ‘क्विप्’ प्रत्यय लगकर बनता है, जिसका अर्थ होता है ‘समीप में बैठना’ अर्थात् गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना। धातुपाठ में सद् (सद्लृ) धातु के तीन अर्थ निर्दिष्ट हैं – विशरण, (विनाश होना), गति (प्रगति), अवसादन (शिथिल होना)। इस प्रकार जो विद्या समस्त अनर्थों …

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