दिनचर्या का अर्थ, परिभाषा, महत्व, दिनचर्या के पालनीय नियम

दिनचर्या शब्द दिन चर्या दो शब्दों से मिलकर बना है। दिन का अर्थ है दिवस तथा चर्या का अर्थ है। चरण अथवा आचरण से हैं। अर्थात् प्रतिदिन की चर्या को दिनचर्या कहते हैं। दिनचर्या एक आदर्श समय सारणी है जो प्रकृति की क्रमबद्धता को अपनाती है, तथा उसी का अनुसरण करने का निर्देश देती है।  दिनचर्या …

Read more

वामपंथी आंदोलन क्या है

भारत में वामपंथी आंदोलन का उद्भव बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। सन् 1917 ई. में हुई रूस की साम्यवादी राज्यक्रांति की सफलता ने भारतीय उग्र राष्ट्रवादियों की भावना को समाजवाद की आरे मोड़ दिया। असहयोग आंदोलन की असफलता ने उनके इस विचार को दृढ़ता प्रदान की। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् बढ़ती हुई मंहगाई और बेरोजगारी …

Read more

भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का विकास : प्रथम चरण

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की एक पृथक धारा क्रांतिकारी आंदोलन है। भारत के नवयुवकों का एक वर्ग हिंसात्मक संघर्ष को राजनीतिक प्राप्ति के लिए आवश्यक मानते थे। वे स्वयं को मातृभूमि के लिए बलिदान करने को तैयार थे और हिंसक माध्यमों से ब्रिटिश शासन को भयभीत कर, आतंकित कर देश से निकाल देना चाहते थे। यह आक्रामक …

Read more

(अम्ल पित्त) एसिडिटी का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार

अम्लपित्त का अर्थ है आमाशय में अत्यधिक अम्ल का बनना। यह रोग पाचन संस्थान के उपरी भाग अर्थात् आमाशय एवं ग्रसनी को प्रभावित करता है। पाचन संस्थान का स्वस्थ रहना उत्तम स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है क्योंकि स्वस्थ पाचन संस्थान शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का आधार स्तंभ माना गया है। जीवन को सुखपूर्वक व्यतित करने …

Read more

गोलमेज सम्मेलन : (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तीव्रता को देखकर ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं ब्रिटिश राजनीतिज्ञों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया जाएगा। इसमें साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर भारत की राजनीतिक समस्या पर विचार-विमर्श होगा। प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर 1930-19 जनवरी 1931) प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड की …

Read more

भारत सरकार अधिनियम 1919 की मुख्य धाराऐं

सन 1919 में जलियावाला बाग की दुर्घटना के विरोध में दिल्ली, लाहौर आदि स्थानों में उपद्रव हुए और पंजाब के कुछ भागों में फौजी शासन लगा दिया गया। नेताओं की गिरफ्तारी से असंतोष की अग्नि और भडक उठीं इस तूफान तथा विपत्ति के वातावरण में 1918 की रिपाटेर् में की गई शिफारिशों से युक्त एक बिल …

Read more

लखनऊ समझौता क्या है || लखनऊ समझौते की मुख्य बातें || lucknow pact in hindi

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का दिसंबर 1916 में लखनऊ में अधिवेशन होना तय था। अधिवेशन के अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की विभाजित कांग्रेस के खेमों ने अलगाववाद को त्याग दिया है, और  एकता के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। लखनऊ अधिवेशन का महत्व इसलिये भी है क्योंकि इस अधिवेशन …

Read more

उग्रवादी आंदोलन के कारण, उद्देश्य, प्रगति

उग्रवादी आंदोलन के कारण उग्रवादी आंदोलन के राजनीतिक कारण  उग्रवादी आंदोलन के आर्थिक कारण उग्रवादी आंदोलन के धार्मिक तथा सामाजिक कारण  उग्रवादी आंदोलन के राजनीतिक कारण –  सरकार द्वारा कांग्रेस की मांगों की उपेक्षा करना – 1892 ई. के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा जो भी सुधार किये गये थे, अपर्याप्त एवं निराशाजनक थे। लाला लाजपत राय ने …

Read more

स्वदेशी आंदोलन क्या है?

स्वदेशी आंदोलन क्या है? बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं …

Read more

लार्ड कर्जन के प्रशासनिक सुधार

लाॅर्ड कर्जन 1899 से 1905 तक भारत का गवर्नर जनरल रहा। लाॅर्ड कर्जन का जन्म 1859 में हुआ था। लाॅर्ड कर्जन ने प्रशासन, न्याय, शिक्षा, सेना एवं सिंचाई सहित अनेक क्षेत्रों में सुधार कार्य किये। कर्जन का वायसराय काल आधुनिक भारत के इतिहास का परिवर्तन काल माना जाता है। लाॅर्ड कर्जन 1899 ई. में भारत का …

Read more