अधिगम असमर्थता के कारण और प्रकार

अधिगम विकृति का संबंध सीखने में होने वाली अक्षमता से होता है यह अक्षमता कई प्रकार के कौशलों एवं संज्ञानात्मक विकास से संबंधित हो सकती है। जब किसी बालक को अन्य हमउम्र बालकों की तुलना में पढ़ाई लिखाई अथवा गणित आदि विषयों में पिछड़ा हुआ पाया जाता है। और उसका यह पिछड़ना सामान्य नहीं होता बल्कि …

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सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है सामान्यीकृत चिंता विकार के कौन से कारण अथवा कारक जिम्मेदार हैं।

जब अधिक चिंता दीर्घकाल तक बनी रहती है तो वह सामान्यीकृत चिंता विकार का रूप ले लेती है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों ने सामान्यीकृत चिंता विकार को परिभाषित किया है इन परिभाषाओं के अवलोकन से हम सामान्यीकृत चिंता विकार के संप्रत्यय को भली भॉंति समझ सकते हैं। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक रोनाल्ड जे कोमर ने अपनी पुस्तक ‘फण्डामेंटल्स ऑफ …

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मनोरोग के प्रकार

अधिकतर शारीरिक स्थितियों को हेतुकी एवं संरचात्मक विकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कुछ सामान्य चिकित्सकीय स्थितियों जैसे माइग्रेन,ट्राईजेमिनल न्यूरालजिया को अभी तक इस प्रकार से वर्गीकृत नहीं किया जा सका है, जिसके कारण उनका वर्गीकरण केवल लक्षणों के आधार पर ही किया गया है। मानसिक विकार मुख्य रूप से इस दूसरे प्रकार …

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आकाश तत्व का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

संसार में पंच महा भूतो में आकाश तत्व प्रधान होता है। यह सबसे अधिक उपयोगी एवं प्रथम तत्व है। जिस प्रकार परमात्मा असीम एंव निराकार है उसी प्रकार आकाश तत्व का असीम एवं निराकार है। आकाश तत्व का उसी प्रकार नाश नही हो सकता जिस प्रकार ईश्वर को कभी नश्ट नहीं किया जा सकता। भारतीय मान्यताओं …

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प्राकृतिक चिकित्सा का अर्थ एवं परिभाषा || भारत में प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

प्राकृतिक तत्वों जैसे- धूप, मिट्टी, जल, हवा आदि द्वारा रोग पर तुरन्त नियंत्रण प्राप्त करने की पद्धति को प्राकृतिक चिकित्सा कहते है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों को जड़ से समाप्त करने में सक्षम है। प्राकृतिक चिकित्सा सभी चिकित्सा प्रणालियों में सर्वाधिक पुरानी चिकित्सा पद्धति है। प्राचीन काल से पंचमहाभूतों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश तत्व की …

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पैरा थायराइड ग्रंथि का कार्य क्या है?

पैरा थायराइड ग्रंथि (Parathyroid gland) मसूर के दाने के आकार की चार छोटी-छोटी ग्रंथियों का समूह है, जिनमें से प्राय: दो-दो थाइरॉइड ग्रंथि के प्रत्येक खण्ड की पोस्टीरियर (पिछली सतह) में स्थित रहती है। ये लगभग 3-4 मि0मी0 व्यास की होती है और पीले भूरे रंग की होती है। जिन कोशिकाओं से ये बनी होती है, …

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थायराइड ग्रंथि की संरचना एवं कार्यो का वर्णन कीजिए |

थायराइड ग्रंथि ग्रीवा में श्वास प्रणाल (Trachea) के सामने निचले सर्वाइकल और प्रथम थोरेसिक वर्टिब्रा के स्तर पर स्थित रहती है। यह दो खण्डों में विभक्त रहती है जो लेरिक्स (स्वर यंत्र) और ट्रेकिया (श्वास प्रणाल) के मध्य जोड़ के दोनों तरफ स्थित रहती है। एक सामान्य वयस्क में थायराइड ग्रंथि का वजन लगभग 25-40 ग्राम …

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अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए |

हमारे शरीर में दो अधिवृक्क ग्रंथियाँ Adrenal gland होती हैं तथा दोनों गुर्दों की चोटी पर स्थित होती है। यह connective tissue capsule से घिरी होती हैं और आंशिक रूप से वसा के एक द्वीप में दबी रहती हैं। अधिवृक्क ग्रंथि को Suprarenal Glands भी कहा जाता है । एड्रीनल कॉर्टेक्स एड्रीनल मैड्यूला (Adrenal Cortex) (Adrenal Medulla) …

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पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) की संरचना एवं कार्य

पीयूष ग्रंथि क्या है? मानव शरीर रचना में पीयूष ग्रंथि Pituitary Gland या Hypophysis एक मटर के आकार की अंत:स्रावी ग्रंथि है। मनुष्यों में इसका वजन 0.5 ग्राम (0.02 ओस) होता है। यह  Sella Turnica या  Hypophysial Fosa में Hypothalamus के नीचे स्थित होती है। पीयूष ग्रंथि Pituitary Gland एक अति महत्वपूर्ण अंत:स्रावी ग्रंथि है जिसे …

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मानव नेत्र की संरचना और कार्य

मानव नेत्र की संरचना (1) श्वेत पटल – यह आंख के गोले के उपरी सतह पर एक मोटी सख्त, सफेद एवं अपारदर्शक झिल्ली के रूप में होता है। यह नेत्र की बाहरी चोट से रक्षा करता है  (2) कार्निया या स्वच्छ मण्डल – यह नेत्र के सामने श्वेत पटल के मध्य का कुछ उभरा हुआ पारदर्शी …

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