संविधान में हिन्दी (अनुच्छेद 343 से 351 तक)

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों अंग्रेजों के क्रूर अत्याचार व दमनात्मक शासन के कारण भारतीय जनमानस में अंग्रेजों के प्रति गहरी घृणा छा गर्इ थी। विदेशियों से मुक्ति पाने की छटपटाहट से राष्ट्रीय आन्दोलन का सूत्रपात हुआ। स्वराज्य का सपना, स्वदेशी की चाहत, स्वभाषा की मिठास और स्वतंत्रता की आकांक्षा इसी समय की उपज है। ‘स्वदेशी का …

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राजभाषा हिंदी सम्बन्धी विभिन्न समितियां

हिन्दी सलाहकार समितियाँ  भारत सरकार की राजभाषा नीति के सूचारू रूप से कार्यान्वयन के बारे में सलाह देने के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में हिन्दी सलाहकार समितियों की व्यवस्था की गर्इ। इस समितियों के अध्यक्ष सम्बन्धित मंत्री होते हैं और उनका गठन ‘केन्द्रीय हिन्दी समिति’ (जिसके अध्यक्ष माननीय प्रधानमंत्री जी हैं) सिफारिश के आधार पर बनाए …

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राजभाषा अधिनियम, 1963 क्या है ?

संविधान के अनुच्छेद 343(3) के अनुसार संसद को यह शक्ति प्रदान की गर्इ थी कि वह अधिनियम पारित करके 26 जनवरी, 1965 के बाद भी विनिर्दिष्ट सरकारी कार्य में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रख सकती है। इस शक्ति का उपयोग करके राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित किया गया, जिसे बाद में 1967 में संशोधित किया गया। राजभाषा …

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राजभाषा नियम, 1976 में ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्र का भौगोलिक विभाजन

राजभाषा नियम, 1976  राजभाषा नियम, 1976 सा. का. नि. 1052 केन्द्रीय सरकार -राजभाषा अधिनियम, 1963(1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :-1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-  इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के …

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डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय

भारतीय संविधान के निर्माता और स्वतन्त्र भारत के प्रथम विधि मंत्री डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का नाम अछूतों के मसीहा व एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में जाना जाता हैं। डॉ0 अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रेल, 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी सकपाल तथा माता का भीमाबार्इ था। वे अपने …

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प्रबंध हेतु प्रतिवेदन के उद्देश्य तथा सिद्धांत

प्रबंध हेतु प्रतिवेदन या प्रबंधकीय प्रतिवेदन प्रणाली प्रबंधकीय लेखाविधि का एक महत्वपूर्ण अंग है। किसी भी संस्था से सम्बन्धित सभी अधिकारियों के समक्ष भिन्न-भिन्न प्रकार की सूचनाओं को प्रस्तुत किया जाता है जिनके आधार पर ही वे उचित व सही निर्णय लेते हैं और नीति निर्धारण करते हैं। यह कार्य प्रतिवेदनों एवं अन्य विवरण पत्रों के …

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प्रमाप लागत विधि क्या है ?

प्रमाप लागत लेखा-विधि का विधिवत् अध्ययन करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि प्रमाप लागत से क्या आशय होता है। सामान्यत: प्रमाप लागत से तात्पर्य उन लागतों से होता है ,जो एक दी गयी परिस्थितियों में एक प्रदत्त उत्पादन की मात्रा पर सामान्य रुप में की जा सकती हों। ब्रउन एवं हावर्ड के अनुसार, …

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मानव संसाधन लेखांकन क्या है ?

मानव संसाधन लेखांकन को एक ऐसी लेखांकन पद्धति के रूप में माना जा सकता है, जिसके प्रयोग से मानव संसाधनों को सम्पत्ति के रूप में मान्यता प्रदान की जाती हो और अन्य भौतिक साधनों की भांति जिनके मूल्य को माप कर लेखा पुस्तकों में दर्ज किया जाता हो। इसके माध्यम से मानव संसाधनों के सम्बन्ध में …

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स्फीति लेखा-विधि का अर्थ, उद्देश्य, तकनीक, लाभ एवं दोष

स्फीति लेखा-विधि मूल्य-स्तर के परिवर्तनों का वित्तीय विवरणों पर पड़ने वाले प्रभाव की समस्या के समाधान के लिये वित्तीय लेखापालों द्वारा विकसित की गर्इ लेखा प्रणाली को ही स्फीति लेखा-विधि कहते हैं। यह वह तकनीक है जिसके द्वारा सामान्य मूल्य स्तर के परिवर्तनों को प्रदर्शित करने के लिये वित्तीय विवरण पुनर्वर्णित किये जाते हैं ताकि लेखांकन …

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शून्य आधार बजट क्या है ?

शून्य आधार बजटन ऐसी नियोजन एवं बजटन प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया जाता …

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