समाचार का अर्थ, परिभाषा एवं लेखन प्रक्रिया

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह एक जिज्ञासु है। मनुष्य जिस समूह में, जिस समाज में और जिस वातावरण में रहता है वह उस बारे में जानने को उत्सुक रहता है। अपने आसपास घट रही घटनाओं के बारे में जानकर उसे एक प्रकार के संतोष, आनंद और ज्ञान की प्राप्ति होती है। आज ‘समाचार’ शब्द …

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समाचार संपादन

‘समाचार संपादन’ में ‘समाचार’ संकलन एवं समाचार लेखन की चर्चा की गर्इ है। इसके साथ ही समाचार संपादन कैसे होता है उस पर भी चर्चा की गर्इ है। फीचर लेखन, लेख लेखन, साक्षातकार की चर्चा भी सविस्तार से की गर्इ है। समाचार संकलन  एक पत्रकार को समाचार संकलन में यह स्रोत ही काम आता है क्योंिक …

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पत्रकारिता के विविध आयाम

मुद्रण के आविष्कार के बाद संदेश और विचारों को शक्तिशाली और प्रभावी ढंग से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना मनुष्य का लक्ष्य बन गया। समाचार पत्र पढ़ते समय पाठक हर समाचार से अलग अलग जानकारी की अपेक्षा रखता है। कुछ घटनाओं के मामले में वह उसका विवरण विस्तार से पढना चाहता है तो कुछ अन्य …

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पत्रकारिता और अनुवाद

पत्रकारिता में अनुवाद की समस्या से परिचय कराने की दृष्टि से प्रस्तुत लेख ‘पत्रकारिता और अनुवाद’ में समाचार माध्यमो के लिए लिखे जाने वाले समाचारो के अनुवाद की समस्या की चर्चा की गर्इ है। इसके साथ ही पत्रकारिता की भाषा के अनुवाद, शैली, शीर्षक-उपशीर्षक, मुहावरे एवं लाक्षणिक पदबंधों, पारिभाषिक शब्दावली के अनुवाद की समस्या और उसके …

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भाषा का अर्थ, परिभाषा एवं माध्यम

भाषा : सामान्य परिचय  भाषा एक सामाजिक क्रिया है, किसी व्यक्ति की कृति नहीं। समाज में यह विचार-विनिमय का साधन है। मनुष्य और मनुष्य के बीच, वस्तुओं के विषय में अपनी इच्छा और मति का आदान-प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि-संकेतों का जो व्यवहार होता है, उसे भाषा कहते हैं। भाषा किसी-न-किसी वस्तु के बारे में …

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हिन्दी भाषा के विविध रूप

भाषा का सर्जनात्मक आचरण के समानान्तर जीवन के विभिन्न व्यवहारों के अनुरूप भाषिक प्रयोजनों की तलाश हमारे दौर की अपरिहार्यता है। इसका कारण यही है कि भाषाओं को सम्प्रेषणपरक प्रकार्य कर्इ स्तरों पर और कर्इ सन्दर्भों में पूरी तरह प्रयुक्ति सापेक्ष होता गया है। प्रयुक्ति और प्रयोजन से रहित भाषा अब भाषा ही नहीं रह गर्इ …

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मानक भाषा का अर्थ एवं परिभाषा

मानक भाषा को कर्इ नामों से पुकारते हैं। इसे कुछ लोग ‘परिनिष्ठित भाषा’ कहते हैं और कर्इ लोग ‘साधु भाषा’। इसे ‘नागर भाषा’ भी कहा जाता है । अंग्रेजी में इसे Standard Language’ कहते हैं। मानक का अर्थ होता है एक निश्चित पैमाने के अनुसार गठित। मानक भाषा का अर्थ होगा, ऐसी भाषा जो एक निश्चित …

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सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी

भारत जैसे बहुभाषा-भाषी देश में सम्पर्क भाषा की महत्ता असंदिग्ध है। इसी के मद्देनजर ‘सम्पर्क भाषा (जनभाषा) के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस अध्याय में सम्पर्क भाषा का सामान्य परिचय देने के साथ-साथ सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी के स्वरूप एवं राष्ट्रभाषा और सम्पर्क भाषा के अंत:सम्बन्ध पर भी विचार किया गया है। सम्पर्क भाषा …

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राष्ट्रभाषा तथा राजभाषा के रूप में हिन्दी

‘राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस लेख में राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा का सामान्य परिचय व उनके स्वरूप की चर्चा की गर्इ है। इसके अलावा राजभाषा की विशेषताएँ एवं उसके प्रयोग क्षेत्र पर भी सविस्तार विचार किया गया है। राष्ट्रभाषा बनाम राजभाषा  समाज में जिस भाषा का प्रयोग होता है साहित्य की भाषा उसी …

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हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण

‘हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण’ शीर्षक इस लेख में हिन्दी वर्तनी के मानकीकरण एवं उसकी आवश्यकता पर सविस्तार चर्चा की गर्इ है। साथ ही मानक वर्तनी के प्रयोग का उदाहरण समझाया गया है। हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण  भारत के संविधान में हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। साथ ही कुछ अन्य …

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