श्रमिक शिक्षा क्या है ?

किसी भी विकासशील देश में आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने के एक साधन के रूप में श्रमिकों की शिक्षा के महत्व को कम नहीं किया जा सकता। यह ठीक ही कहा गया है कि ‘‘किसी औ़द्योगिक दृष्टि से विकसित देश का बड़ा पूंजी भण्डार इसकी भौतिक सामग्री में नहीं वरन् जांचे हुए निष्कर्शो से इकट्ठा …

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औद्योगिक दुर्घटना के कारण एवं निवारण

भारत में औद्योगीकरण के विकास के साथ विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा समस्या उत्पन्न हुर्इ है। प्रत्येक वर्ष, औद्योगिक दुर्घटना के मामले लाखों में दिखार्इ देते है, जिनमें वृहद, दुर्घटना, आंशिक नि:शक्तता, पूर्ण नि:शक्तता विभिन्न कारखानों, रेलवे, पत्रों, गोदी, तथा खानों में देखने को मिलती है। हमारे सांख्यिकीय कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 1000 …

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मजदूरी एवं वेतन प्रशासन का अर्थ

मानवीय संसाधनों की अधिप्राप्ति के पश्चात् यह अत्यन्त आवश्यक होता है कि उन्हें संगठन के प्रति उनके योगदानों के लिए न्यायोचित रूप से पारिश्रमिक प्रदान किया जाये। पारिश्रमिक वह प्रतिपूरण है, जिसे एक कर्मचारी संगठन के लिए अपने योगदान के बदले में प्राप्त करता है। मजदूरी एवं वेतन पारिश्रमिक प्रक्रिया के प्रमुख अंग होते हैं, जिनका …

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सामाजिक सुरक्षा क्या है ?

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का …

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श्रम विधान क्या है ?

आधुनिक प्रचलन में ‘विधान’ शब्द से उच्च प्राधिकार से युक्त तथा जनता का प्रचुरता से प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट राजकीय अभिकरणों द्वारा बनाए गए विधि के नियमों का बोध होता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, विधान के अन्तर्गत मुख्यत: जनता के समर्थन प्राप्त विधानमंडलों तथा अन्य मान्यता प्राप्त सक्षम प्राधिकारियों द्वारा बनाए गए कानून सम्मिलित होते …

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मजदूरी से संबंधित अधिनियम

श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदायगी के तरीके, मजदूरी-भुगतान के अंतराल, उससे कटौतियां तथा उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बातें भी महत्वपूर्ण होती है। मजदूरी की संरक्षा से संबद्ध कानूनों के बनाए जाने के पहले मजदूरी के भुगतान में कर्इ तरह के अनाचार हुआ करते थे। उदाहरणार्थ, …

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कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 क्या है ?

अस्थायी आंशिक अशक्तता- अस्थायी आंशिक अशक्तता वह अषक्कतता है, जिससे कर्मकार की उस नियोजन में उपार्जन क्षमता अस्थायी अवधि के लिए कम हो जाती है, जिसमें वह दुर्घटना के समय लगा हुआ था। स्थायी आंशिक अशक्तता – स्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की हर ऐसे नियोजन में उपार्जन-क्षमता स्थायी रूप में कम हो …

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कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 क्या है ?

कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ  1. समुचित सरकार-  केन्द्रीय सरकार या रेलवे-प्रशासन के नियंत्रण में प्रतिष्ठानों, महापत्तनों, खानों या तेलक्षेत्रों के संबंध में समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार तथा सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में समुचित सरकार राज्य सरकार है। 2. कर्मचारी-  ‘कर्मचारी’ का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जो अधिनियम के अधीन आने वाले किसी कारखाना या स्थापन में …

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कर्मचारी भविष्य-निधि एवं प्रकीर्ण प्रावधान अधिनियम, 1952

अधिनियम का नाम, विस्तार, उद्देश्य तथा लागू होना  औद्योगिक विकास के साथ ही कुछ नियोजकों ने अपने कर्मकारों के कल्याण के लिए भविष्य निधि स्कीम लागू किये। लेकिन ऐसी योजनाएं शुद्ध रूप से प्राइवेट और ऐच्छिक थीं। छोटे उद्योगों में कार्यरत मजदूर इस लाभ से वंचित थे। इससे असन्तोष और र्इश्र्या होना स्वाभाविक था। ऐसी योजना …

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पत्रकारिता के कार्य, सिद्धांत एवं प्रकार

‘पत्रकारिता’ के मुख्य कार्य सूचना, शिक्षा, मनोरंजन, लोकतंत्र का रक्षक एवं जनमत से आशय एवं पत्रकारिता के सिद्धान्त की चर्चा की गर्इ है। इसके साथ ही पत्रकारिता के विभिन्न प्रकार की चर्चा भी सविस्तार से की गर्इ है। पत्रकारिता के कार्य  प्रारंभिक अवस्था में पत्रकारिता को एक उद्योग के रूप में नहीं गिना जाता था । इसका …

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