भक्ति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं महत्व
भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज’ सेवायाम् धातु में ‘ क्तिन्’ प्रत्यय लगाने पर बनता है। वस्तुत: ‘क्तिन्’ प्रत्यय भाव अर्थ में होता है। ‘भजनं भक्ति:’ परन्तु वैयाकरणों के अनुसार कृदन्तीय प्रत्ययों में अर्थान्तर अर्थ परिवर्तन प्रक्रिया का अंग है। अत: वही ‘क्तिन्’ प्रत्यय अर्थान्तर में भी हो सकता है।“भजनं भक्ति:”, “भज्यते अनया इति भक्ति:”, “भजन्ति अनया …