जॉन स्टुअर्ट मिल का जीवन परिचय

उपयोगितावाद के अन्तिम प्रबल समर्थक जॉन स्टुअर्ट मिल का जन्म 20 मई, सन् 1806 ई0 को लन्दन में हुआ। वह अपने पिता जेम्स मिल (1773-1836) की प्रथम सन्तान था। उसके पिता स्वयं उपयोगितावादी सुधारक होने के नाते उसे उपयोगितावादी शिक्षा देना चाहते थे। जॉन स्टुअर्ट मिल स्वयं भी एक प्रतिभाशाली बालक था। उसने मात्र 3 वर्ष …

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जेरेमी बेंथम का जीवन परिचय एवं राजनीतिक विचार

असाधारण प्रतिभा के धनी उपयोगितावादी विचारक जेरेमी बेन्थम का जन्म 15 फरवरी 1748 ई0 को लन्दन के एक प्रतिष्ठित वकील परिवार में हुआ। उसने अपनी विलक्षण बुद्धि के बल पर मात्र 4 वर्ष की आयु में ही लेटिन भाषा का ज्ञान प्राप्त कर लिया। उसने 13 वर्ष की आयु में मैट्रिक तथा 15 वर्ष की आयु …

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शिक्षण की विशेषताएं, विधि एवं प्रविधि

शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है और शिक्षण का अर्थ सम्बन्ध स्थापित करना है शिक्षक शिक्षार्थी एवं विषय के मध्य।शिक्षा के तीन केन्द्र बिन्दु है- शिक्षक, विद्यार्थी एवं विषय/पाठ्यचर्या। इन तीनों में आदान-प्रदान होते रहते हैं। यह आदान-प्रदान शिक्षण क्रिया द्वारा होता है। दूसरे शब्दों में शिक्षण उक्त तीनों बिन्दुओं में स्थापित किया जाने वाला सम्बन्ध है। …

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एक अच्छे शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण गुण क्या है?

शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। कोई उसे गुरू कहता है, कोई शिक्षक कहता है, कोई आचार्य कहता है, तो कोई अध्यापक या टीचर कहता है। ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं जो सभी को ज्ञान देता है और सिखाता है।  किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य …

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प्रधानाध्यापक का विद्यालय के प्रति उत्तरदायित्व कर्तव्य और कार्य

प्रधानाध्यापक को विद्यालय में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। प्रधानाध्यापक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री पी.सी. रैन ने लिखा है कि विद्यालय स्वस्थ अथवा अस्वस्थ, मानसिक, नैतिक एवं भौतिक परिस्थितियों में सम्पन्न तथा पतनोन्मुख अच्छे अथवा बुरे होते हैं जबकि प्रधानाध्यापक योग्य, उत्साही एवं उच्च आदर्शपूर्ण अथवा उसके प्रतिकूल होता है। महान प्रधानाध्यापक …

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विद्यालय का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं आवश्यकता

विद्यालय का कार्य परंपरागत रूप से ज्ञान देने हेतु ही किया जाता रहा है । वास्तव में, समाज के इस संस्था का निर्माण ही व्यक्ति तथा समाज की जरूरतों की पूर्ति हेतु किया गया है । यहाँ शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक शिक्षा दी जाती है । विद्यालय का अर्थ संस्कृत में विद्या + आलय अर्थात् विद्या …

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हिन्दू धर्म के सोलह 16 संस्कार I 16 Sanskar details in hindi

संस्कार शब्द की व्युत्पत्ति सम पूर्वक ‘कृन्’ धातु से ‘‘धम’’ प्रत्यय करने पर होती है। सम् + कृ + धन = संस्कार। विभिन्न स्थलों पर भिन्न-भिन्न सन्दर्भों में इसका उपयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। प्रसंग के अनुसार संस्कार शब्द के अर्थ, शिक्षा, संस्कृति प्रशिक्षण, व्याकरण सम्बन्धी शुद्धि संस्करण, परिष्करण, शोभा, आभूषण, प्रभाव, स्वरुप, स्वभाव …

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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की प्रमुख रचनाएँ

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म सन् 1896 ई. में बसन्त पंचमी के दिन बंगाल के महिषादल नामक स्थान पर हुआ। निराला की जन्म तिथि के विषय में विद्वान में पर्याप्त मतभेद भी पाये जाते है। निराला के पिता पं. राम सहाय, गढ़ा कोला, जिला उन्नाव के रहने वाले थे आर्थिक परिस्थिति के कारण कलकत्ता में जाकर पुलिस …

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सुमित्रानंदन पंत की प्रमुख रचनाएँ

सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई  सन 1900 ई. रविवार को कौसानी में हुआ। यह स्थान अल्मोड़ा नगर से 53 किलोमीटर की दूरी पर हिमालय की सौन्दर्य  पुलकित घाटी में स्थित है। सुमित्रानंदन पंत 1910 ई में अल्मोड़ा गए। यही 15-16 वर्ष  की आयु से नियमित कविता लिखना शुरू किया। आठवी कक्षा से ही सुमित्रानंदन पंत ने हिन्दीकविता …

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छायावादी कवि के नाम और उनकी रचनाएँ

छायावादी काव्य का प्रारम्भ कब हुआ? यह प्रश्न आज भी विवाद का विषय बना हुआ है। स्थूल  रूप से यह माना जाता है कि द्विवेदी युग  सन् 1920 के बाद निष्पभाव हो गया था। वस्तुतः आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित पत्रिका ‘‘सरस्वती‘‘ ही संपादन अवधि को ही द्विवेदी युग की संज्ञा देना उपयुक्त है। उनके कार्यकाल …

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