पत्रकारिता के क्षेत्र एवं उनकी रिपोर्टिंग

पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण अंग रिपोटिर्ंग है। अगर रिपोर्टिंग ही न हो तो पत्रकारिता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज भी आम आदमी के मन में पत्रकार के रूप में सिर्फ रिपोर्टर की ही छवि बनती है। रिपोर्टर वाकर्इ में पत्रकारिता का सबसे अधिक सार्वजनिक चेहरा है। रिपोर्टर से उसके अखबार की पहचान होती …

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समाचार तथा जनमत के लिए लोगों का साक्षात्कार

आज के जमाने में जन संचार के विभिन्न माध्यमों के कारण हमारी जिन्दगी पर गहरा असर पड़ रहा है। हमारा समाज, हमारी संस्कृति, हमारी जीवन शैली, हमारी विचारधारा यानी हर एक चीज को जनसंचार के अलग-अलग माध्यम गहरार्इ से प्रभावित कर रहें हैं । जनसंचार के अलग-अलग माध्यम जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और समाचार पत्र-पत्रिकाएं जिस …

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विकास की अवधारणा

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही हो सकते हैं। किसी भी समाज, देश, व विश्व में कोर्इ भी सकारात्मक परिवर्तन जो प्रकृति और मानव दोनों को बेहतरी की ओर ले जाता है वही वास्तव में विकास है। अगर हम विश्व के इतिहास में नजर डालें तो पता चलता है कि विकास …

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पंच प्रणाली व पंचायतों का स्वरूप

पंचायती राज का इतिहास कोर्इ नया नहीं अपितु यह आदिकाल से हमारी पुरातन धरोहर है। भारतीय ग्रामीण व्यवस्था में सामुदायिकता की भावना प्राचीन काल से विद्यमान रही है। इसी सामुदायिकता व परम्परागत संगठन के आधार पर पंचायत व्यवस्था का जन्म हुआ। इसीलिए हमारे देश में पंचायतों की व्यवस्था भी सदियों से चली आ रही है। भारतीय …

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भारत में पंचायती राज की स्थिति व सुदृढ़ीकरण के प्रयास

स्वतन्त्रता पूर्व पंचायतों की मजबूती व सुदृढ़िकरण हेतु विशेष प्रयास नहीं हुए इसके विपरीत पंचायती राज व्यवस्था लड़खड़ाती रही। मध्य काल में मुस्लिम राजाओं का शासन भारत के विभिन्न हिस्सों में फैल गया। यद्यपि स्थानीय शासन की संस्थाओं की मजबूती के लिए विशेष प्रयास नहीं किये गये परन्तु मुस्लिम शासन ने अपने हितों में पंचायतों का …

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विकेन्द्रीकरण की अवधारणा, आवश्यकता एवं महत्व

आज विश्व स्तर पर विकेन्द्रीकरण की सोच को विषेश महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन एवं अभिशासन में आम जन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था को अपनाना वर्तमान समय की बहुत बड़ी आवश्यकता है। भारत के सन्दर्भ में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था सम्पूर्ण शासन प्रणाली के समुचित संचालन के लिए बहुत जरूरी …

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स्थानीय स्वशासन का अर्थ और पंचायतें

स्थानीय स्वशासन लोगों की अपनी स्वयं की शासन व्यवस्था का नाम है। अर्थात् स्थानीय लोगों द्वारा मिलजुलकर स्थानीय समस्याओं के निदान एवं विकास हेतु बनार्इ गर्इ ऐसी व्यवस्था जो संविधान और राज्य सरकारों द्वारा बनाए गये नियमों एवं कानून के अनुरूप हो। दूसरे शब्दों में ‘स्वशासन’ गांव के समुचित प्रबन्धन में समुदाय की भागीदारी है। यदि …

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ग्राम सभा की बैठक एवं कार्य

नयी पंचायत व्यवस्था के अन्र्तगत ग्राम सभा को एक महत्वपूर्ण इकार्इ के रूप में माना गया है। एक आदर्श पंचायत की नींव ग्राम सभा होती है। अगर नींव मजबूत है तो सारी व्यवस्था उस पर टिकी रह सकती है अगर नींव ही कमजोर या ढुलमुल है तो व्यवस्था किसी भी समय ढहनी निश्चित है। अत: एक …

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ग्राम पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, कार्य, एवं शक्तियां

संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान की गर्इ है। इस अधिनियम के द्वारा स्थानीय स्वशासन व विकास की इकार्इयों को एक पहचान मिली है। त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ग्राम पंचायत ग्राम विकास की पहली इकार्इ मानी गर्इ है। गांव के लोगों के सबसे नजदीक होने के कारण इसका अत्यधिक महत्व …

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क्षेत्र पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार एवं शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संषोधन के अन्र्तगत नर्इ पंचायत राज व्यवस्था में पंचायतें तीन स्तरों पर गठित की गर्इ है। विकेन्द्रीकरण की नीति ही यह कहती है कि सत्ता, शक्ति व संसाधनों का बंटवारा हर स्तर पर हो। तीनों स्तर पर पंचायतों के द्वारा लोगों की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनायें बनाइर् जाती है। पंचायतों को इस व्यवस्था …

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