चित्रकूट का सामान्य परिचय

प्राकृतिक सौन्दर्य एवं खनिज सम्पदाओं से भरपूर जनपद – चित्रकूट भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक आस्था का प्राचीन केन्द्र रहा है। चित्रकूट का वर्णन सृष्टि के आदिकाल से मिलता है। त्रेता युग में इच्छवाकु की 65वीं पीढी में उत्पन्न बनवासी श्री राम की लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष तक यह पावन स्थली कर्मस्थली रही है। चित्रकूट अपनी प्रभु विस्मयता …

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जौहर प्रथा क्या है? जौहर प्रथा का इतिहास

राजपूत जाति की नारियाँ सतीत्व का बहुत अधिक ध्यान रखतीं थीं । इसी कारण उनमें जौहर प्रथा का प्रचलन हुआ । जौहर की प्रथा प्रायः राजपूतों तक ही सीमित थी । यद्यपि अन्य उदाहरण की भी कमी नहीं है ।’ जब युद्ध में राजपूत सरदार और उनके योद्धा पराजय के निकट आ जाते तो वे बहुधा …

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हरम क्या है?

तुर्की भाषा का शब्द हरम अरबी के हारूमा से निष्पन्न हुआ । जिसका अर्थ होता है प्रतिबन्धित, अनुमत या अवैध, पर साथ-ही-साथ, पूरी तरह सुरक्षित और अलंघ्य । इस शब्द का इसके अर्थ की उपेक्षा करते हुए जितना प्रयोग हुआ है उतना किसी और शब्द का न हुआ होगा । साधारणतः इसका अर्थ घर के एक …

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सामाजिक प्रगति किसे कहते हैं | सामाजिक प्रगति के मापदण्ड

किसी सुनिश्चित लक्ष्य व आदर्श की दिशा में होने वाले परिवर्तनों को सामाजिक प्रगति कहते हैं । जब समाज का विकास उस दिशा में होता है, जिसे हम उचित समझते हैं और हमारे आदर्शों व मूल्यों के अनुरूप है तभी हम कह सकते हैं कि समाज प्रगति कर रहा है, अन्यथा हम उसे प्रगति नहीं मानते …

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वेदों की उत्पत्ति का सम्पूर्ण वर्णन

विश्व साहित्य का सबसे प्राचीनतम् ग्रन्थ ‘वेद’ है। वेद न केवल भारतीय समाज द्वारा समाहत है अपितु विश्व के महान विद्वानों ने भी इन्हें श्रद्धा की दृष्टि से देखा है तथा उनकी महत्वता को स्वीकारा है। वेद भारतीय संस्कृति के मूल स्रोत है, अतः वेदों में ज्ञान-विज्ञान, धर्म-दर्शन, सदाचार-संस्कृति, सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन से सम्बन्धित सभी …

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संगीत की उत्पत्ति के सिद्धांत

संगीत विभिन्न ध्वनियों को मिलाने वाली वह कला है जिसके द्वारा मनोभावों के प्रदर्शन में रोचकता, माधुर्य एवं सुन्दरता आती है। संगीत की परिभाषा केवल मानवीय गायन तक ही सीमित नहीं बल्कि इसके अन्तर्गत पशुओं की चहचहाहट इत्यादि भी सम्मिलित है।  भारतीय संगीत के इतिहास का सर्वांगीण विवेचन अथवा यथार्थ चित्रण कर देना सरल कार्य नहीं …

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मानवाधिकारों के 30 अनुच्छेद

सामान्य अर्थो में ‘मानवाधिकार’ (Human rights) से तात्पर्य होता है कि ‘मानव’ चाहे वह किसी भी लिंग, वर्ग या जाति का हो, किसी भी देश, प्रदेश या क्षेत्र में रहता हो अथवा किसी भी धर्म, सम्प्रदाय या मत का मानने वाला गरीब हो या अमीर हो सभी को अपने समुचित विकास और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का …

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निम्बार्क सम्प्रदाय का इतिहास

निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्क, निम्बादित्य या नित्यानन्द तेलुगु ब्राह्मण थे जो कि बेलारी जिले में निम्ब या में रहते थे। इनके पिता का नाम जगन्नाथ एवं माँ का नाम सरस्वती था । निम्बकाचार्य का दार्शनिक सिद्धान्त द्वैताद्वैतवाद अर्थात जीव एवं जगत ईश्वर के आश्रित तथा ईश्वर आश्रय है।’ वैष्णव धर्म के मूल प्रवर्तक परम प्राचीन …

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वल्लभाचार्य की रचनाएं

विक्रम की 13वीं शताब्दी में विष्णुस्वामी सम्प्रदाय की उच्छिन्न गद्दी पर श्री वल्लाभाचार्य जी बैठे और उन्होंने श्री विष्णुस्वामी के सिद्धान्तों से प्रेरणा लेकर शुद्धाद्वैत सिद्धान्त तथा भगवद् अनुग्रह अथवा पुष्टि द्वारा प्राप्त प्रेम भक्ति के मार्ग की स्थापना की। हिन्दी ब्रज भाषा के अष्टछाप कवि इसी सम्प्रदाय के भक्त थे। इनके पिता का नाम लक्ष्मण …

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उन्नाव का संक्षिप्त परिचय

1. स्थिति : जनपद-उन्नाव उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित हैं । यह 26 अंश 7 मिनट 30 सेकेण्ड (26° 7 30 ) उत्तरी अक्षांश से लेकर 27 अंश 1 मिनट 30 सेकेण्ड (27° 2′ 30 ” ) उत्तरी अक्षांश के मध्य तथा 80 अंश 3 मिनट (80° 3′) पूर्वी देशान्तर से लेकर 81 अंश 4 मिनट (81° …

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