मुस्लिमों के त्योहार कौन कौन से है ?

मुस्लिमों के प्रमुख त्यौहार ईद-उल-अजहा अथवा ईद – ए – कुर्बान इस त्यौहार को ईद-उल-जुहा या बकरी ईद-ए-कुर्बानी के त्यौहार के रुप में मनाया जाता था। यह मुसलमानी वर्ष जु-ए-हिजा की दसवी मुस्लिम वर्ष के 12वें महीने में मनायी जाती थी । मुस्लिम पर्वों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। भारत में इसे प्रायः इब्राहीम द्वारा ईश्वर …

Read more

उपनिषदों की संख्या कितनी है?

उपनिषद का अर्थ है ‘समीप बैठना । विद्वानों ने इससे अर्थ लगाया है कि जिस रहस्य विद्या का ज्ञान गुरु के समीप बैठकर प्राप्त किया जा सकता था उसे उपनिषद कहते है। संस्कृति एवं सामाजिक संरचना की जानकारी देने में उपनिषद् अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है। उपनिषदों को विदेशी इतिहासकार ज्ञान दर्शन का भण्डार मानते है । …

Read more

मुसलमान किसे कहते हैं मुसलमान कितने प्रकार के होते हैं?

अल्लाह और उसके पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब पर विश्वास करने वाले ‘मुसलमान’ कहलाते है। उनका धर्म है ‘ईमान’ । इस्लाम के पाँच स्तम्भ हैं:- ईमान, नमाज़, रोजा, जकात और हज़। मक्का-मदीना के अलावा ख्वाजा की दरगाह दिल्ली की जामा मस्जिद, लखनऊ का इमामबाड़ा आदि पवित्र माने जाते हैं। मुस्लिम समुदाय के यहाँ अल्लाह का नाम जपा …

Read more

दासता क्या है दास कितने प्रकार के होते हैं?

दासता वह है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के अधीन हो जाता है। विजेता पराजित व्यक्तियों को पूर्ण तथा अपने अधिकार में कर लेता था। बाद में ऋण न चुका सकने पर, शर्त हार जाने पर, या अकाल की अवस्था में भरण-पोषण में असमर्थ व्यक्ति दूसरे के दास बन जाता था।  दासों के प्रकार कौटिल्य ने …

Read more

ग्वालियर घराने का परिचय, ग्वालियर घराने की विशेषता

ख्याल गायकों के संदर्भ में ग्वालियर घराना सर्व प्रसिद्ध घराना माना जाता है। इस घराने की शुरूआत नत्थन पीरबख्श (लगभग 18वीं शती) से मानी गई है। डॉ० परांजपेजी के अनुसार, “ग्वालियर घराना लखनऊ घराने से निकला। लखनऊ के प्रसिद्ध कव्वाली गायक गुलाम रसूल के प्रपौत्र शक्कर खाँ और मक्खन खाँ लखनऊ के प्रसिद्ध गायक थे । …

Read more

वल्लभाचार्य का जीवन परिचय

मध्ययुगीन जनमानस की वीणा पर कृष्ण भक्ति की जो रागिनी अवतरित हुई, वल्लभाचार्य उसके अमर गायकों में से हैं। वल्लभाचार्य भक्ति सम्प्रदाय के आचार्यों में अंतिम प्रमुख आचार्य है । वल्लभाचार्य ने भक्ति के शास्त्रप्रतिपादित रुप को ही अधिक महत्व दिया। उत्तर भारत में कृष्ण भक्ति के दृढ़ीकरण में आचार्य वल्लभ का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। …

Read more

चैतन्य महाप्रभु का जीवन परिचय

महाप्रभु चैतन्य का जन्म 18 फरवरी 14861 ई० को नदिया जिले के मायापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र तथा माता का नाम शची देवी था। कुछ समय व्यतीत हो जाने के बाद इन्हें पाठशाला भेजा गया। गुरु सुदर्शन की दीक्षा के अनुसार कुछ ही समय में संस्कृत व्याकरण में विशेष …

Read more

कवि नाभादास का जीवन परिचय

श्री नाभादास कृत भक्तमाल हिन्दी साहित्य का अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रंथ है। भक्तमाल हिन्दी साहित्य में रामचरितमानस के पश्चात् अपना एक विशेष महत्व रखता है । भक्तमाल बड़ा ही लोकप्रिय ग्रंथ रहा है। भक्त मंडली में इस ग्रंथ का सदैव से ही सम्मान किया गया है। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है …

Read more

विधवा का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

विधवा शब्द ‘वि’ उपसर्ग और ‘धव’ से निर्मित है’ । ‘धव’ शब्द के अनेक अर्थ होते हैं। उदाहरणार्थ- हिलना-डुलना, कम्पन, मनुष्य, पति, मालिक, स्वामी, बदमाश, ठग और एक प्रकार का वृक्ष’। ‘धव’ शब्द से उसका स्त्रीलिंग शब्द ‘धवा’ बनता है । ‘वि’ उपसर्ग लगाने से विधवा शब्द का निर्माण होता है जिसका अर्थ होता है बिना …

Read more

वर्ण व्यवस्था का अर्थ और प्राचीन भारतीय साहित्य में वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति

प्राचीन हिन्दू शास्त्रकारों ने वर्ण व्यवस्था का विधान समाज की विभिन्न श्रेणियों के लोगों में कार्यो का उचित बँटवारा करके सामाजिक संगठन बनाए रखने के लिए किया ताकि प्रत्येक मनुष्य अपने-अपने निर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करते हुए आपसी मतभेदों एवं वैमनस्य से मुक्त होकर अपना तथा समाज का पूर्ण विकास कर सके। यह सामूहिक पद्धति से …

Read more