राजनीतिक दल और दबाव समूह में अन्तर

समाज में विभिन्न प्रकार के हित पाये जाते हैं, जैसे-मजदूर, कृषक, उद्योगपति, शिक्षक व्यवसायी आदि। जब कोई छोटा अथवा बड़ा हित संगठित रूप धारण कर लेता है तब उसे हित-समूह कहा जाता है। इस समूह का उद्देश्य अपने सदस्यों के विविध सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक हितों की रक्षा करना होता है। जब कोई हित-समूह अपने उद्देश्यों …

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पूर्व पाषाण युग की विशेषताएं

सामान्यतः पचास हजार ई. पू. से दस हजार ई. पू. तक के काल को पूर्व-पाषाण युग माना जाता है। खुदाई में प्राप्त सामग्री से पता चलता है कि इस काल में नीयंडरथल, पिल्ट डाउन, त्रिनिल, रोडेशियन, काकेशस, पिथकैथ्रोपस, हिडलवर्ग आदि मानव रहते थे। पूर्व-पाषाण युग के अवशेष जर्मनी,फ्रांस, इंग्लैंड आदि यूरोपीय देशों के अतिरिक्त भारत, जावा …

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भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेद

  भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेद अनुच्छेद 1-  संघ का नाम औ राज्य क्षेत्र – संविधान में अनुच्छेद 1 में कहा गया है कि इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा। भारत का क्षेत्र इसमें शामिल होगा: राज्यों के क्षेत्र, केंद्रशासित प्रदेश और भविष्य में प्राप्त किए जा सकने वाले क्षेत्र। अनुच्छेद 2-  नए राज्यों का प्रवेश या …

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शैक्षिक अनुसंधान का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता एवं क्षेत्र

शैक्षिक अनुसंधान से तात्पर्य उस अनुसंधान से होता है, जो शिक्षा के क्षेत्र में किया जाता है। उसका उद्देश्य शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, आयामों, प्रक्रियाओं आदि के विषय में नवीन ज्ञान का सृजन, वर्तमान ज्ञान की सत्यता का परीक्षण, उसका विकास एवं भावी योजनाओं की दिशाओं का निर्धारण करना होता है।  शैक्षिक अनुसंधान का अर्थ शिक्षा …

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शिक्षा की राष्ट्रीय नीति 1986 के लक्ष्य एवं उद्देश्य

शिक्षा की राष्ट्रीय नीति का मुख्य केन्द्र व उद्देश्य शैक्षणिक विकास एवं शिक्षा के सभी स्तरों पर पिछड़ी जातियों/पिछड़े वर्गों के लोगों व गैर पिछड़ी जातियाँ व गैर पिछड़े वर्गों के लोगों में समानता लाना है ।  शिक्षा की राष्ट्रीय नीति1986 के लक्ष्य एवं उद्देश्य शिक्षा की राष्ट्रीय नीति 1986 के लक्ष्य एवं उद्देश्य इस प्रकार …

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मूल्यांकन अनुसंधान क्या है ?

आज अधिकांश देश नियोजित परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वे कल्याणकारी राज्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। जो देश अपने लोगों की खुशहाली के लिए विकास कार्यक्रमों पर अरबों-खरबों रुपया खर्च करता है, वह यह भी ज्ञात करना चाहता है कि आखिर उन कार्यक्रमों का उन लोगों पर क्या प्रभाव …

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परीक्षणात्मक अनुसंधान कितने प्रकार के होते हैं?

इसे प्रयोगात्मक अनुसंधान या व्याख्यात्मक अनुसंधान के नाम से पुकारते हैं। चेपिन ने लिखा है, समाजशास्त्रीय अनुसंधान में परीक्षणात्मक प्ररचना की अवधारणा नियंत्रण की दशाओं के अंतर्गत अवलोकन द्वारा मानवीय संबंधों के अध्ययन की ओर संकेत करती है। स्पष्ट है कि जिस प्रकार भौतिक विज्ञानों में विषय को नियंत्रित अवस्थाओं में रखकर उसका अध्ययन किया जाता …

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शोध प्ररचना क्या है शोध प्ररचना का चुनाव तथा नियोजन के कार्य में कुछ आवश्यक बाते

कोई भी सामाजिक शोध बिना किसी लक्ष्य या उद्देश्य के नहीं होता है। इस उद्देश्य या लक्ष्य का विकास और स्पष्टीकरण शोध-कार्य के दौरान नहीं होता, अपितु वास्तविक अध्ययन आरंभ होने से पूर्व ही इसका निर्धारण कर लिया जाता है। शोध के उद्देश्य के आधार पर अध्ययन-विषय के विभिन्न पक्षों को उद्घाटित करने के लिए पहले …

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कार्ल मार्क्स के सामाजिक परिवर्तन का सिद्धांत की संक्षिप्त व्याख्या

मार्क्स के अनुसार, समाज कोई अस्थायी ढांचा नहीं बल्कि गतिशील परिपूर्णता है। इस परिपूर्णता को आर्थिक कारक ही गति प्रदान करता है। आर्थिक कारक पर अपने सम्पूर्ण सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत को आधारित करते हुए मार्क्स ने लिखा है, राजनीतिक, न्यायिक, दार्शनिक, साहित्यिक और कलात्मक विकास आर्थिक विकास पर निर्भर होता है। लेकिन ये एक-दूसरे पर …

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वर्ग संघर्ष का क्या अर्थ है वर्ग संघर्ष सिद्धांत का महत्व, निष्कर्ष, आलोचना?

वेपर के अनुसार मार्क्स के चिन्तन में वर्ग संघर्ष की धारणा का विशिष्ट महत्व है। उसका वर्ग संघर्ष का सिद्धांत उसकी इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या और अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत पर आधारित है। सेबाइन के अनुसार मार्क्स वर्ग संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मानता है और आदिकाल में अब तक के समस्त परिवर्तनों को उसी …

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