औद्योगिक सम्प्रेषण या औद्योगिक संचार

सम्प्रेषण विचारों के आदान-पद्रान की ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है, उसके विचार समझ सकता है तथा दूसरे को अपने बारे में या अपने विचारों से अवगत करा सकता है। इस प्रकार, सम्प्रेषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे एक व्यक्ति को किसी वक्ता के …

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सामूहिक सौदेबाजी का अर्थ

ऐतिहासिक दृष्टि से सामूहिक सौदेबाजी की अवधारणा का विकास सामूहिक सम्बन्धों के विकास के तृतीय चरण में हुआ। उत्पादन कार्य को प्रारम्भिक स्थिति में फल की प्राप्ति शक्ति के आधार पर की जाती थी दूसरी स्थिति में सामाजिक विधान के आधार पर और तीसरे तीसरी स्थिति में पारस्परिक विचार-विमर्श एवं समझौते के आधार पर सामूहिक समझौते …

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अनुवाद का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

भारत में अनुवाद की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। कहते हैं अनुवाद उतना ही प्राचीन जितनी कि भाषा। आज ‘अनुवाद’ शब्द हमारे लिए कोर्इ नया शब्द नहीं है। विभिन्न भाषायी मंच पर, साहित्यिक पत्रिकाओं में, अखबारों में तथा रोजमर्रा के जीवन में हमें अक्सर ‘अनुवाद’ शब्द का प्रयोग देखने-सुनने को मिलता है। …

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अनुवाद की प्रकृति और प्रकार

अनुवाद की प्रकृति (अर्थात् अनुवाद-क्रिया कला के अन्तर्गत आता है या विज्ञान के या शिल्प के) के साथ-साथ अनुवाद के विविध प्रकार एवं प्रभेद की भी चर्चा की जा रही है। अनुवाद की प्रकृति  ‘अनुवाद’ एक कर्म के रूप में बेहद जटिल क्रिया है और एक विधा के रूप में बहुत संश्लिष्ट। यही कारण है कोर्इ …

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अनुवाद की प्रक्रिया, स्वरूप एवं सीमाएँ

अनुवाद के स्वरूप, अनुवाद-प्रक्रिया एवं अनुवाद की सीमाओं के बारे में की चर्चा की जा रही है। सबसे महत्त्वपूर्ण है- ‘अनुवाद की प्रक्रिया’। अनुवाद के व्यावहारिक पहलु को जानने के लिए अनुवाद-प्रक्रिया को समझना जरूरी है। इसलिए प्रस्तुत अध्याय में नाइडा, न्यूमार्क और बाथगेट- तीनों विद्वानों द्वारा प्रतिपादित अनुवाद-प्रक्रिया को सोदाहरण प्रस्तुत किया गया है। अनुवाद …

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अनुवाद एवं भाषाविज्ञान

अनुवाद एक भाषिक कला है। सामान्य अर्थ में, एक भाषा में कही गर्इ बात को दूसरी भाषा में कहना ‘अनुवाद’ है। यहाँ कथन या अभिव्यक्ति का माध्यम है ‘भाषा’। स्पष्ट है कि अनुवाद क्रिया पूर्णत: भाषा पर आधारित है। कदाचित इसीलिए भोलानाथ तिवारी जी ने अनुवाद को ‘भाषान्तर’ कहा है। एक भाषिक क्रिया होने के नाते …

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अनुवाद की महत्ता एवं आवश्यकता

उत्तर-आधुनिक युग में अनुवाद की महत्ता व उपादेयता को विश्वभर में स्वीकारा जा चुका है। वैदिक युग के ‘पुन: कथन’ से लेकर आज के ‘ट्रांसलेशन’ तक आते-आते अनुवाद अपने स्वरूप और अर्थ में बदलाव लाने के साथ-साथ अपने बहुमुखी व बहुआयामी प्रयोजन को सिद्ध कर चुका है। प्राचीन काल में ‘स्वांत: सुखाय’ माना जाने वाला अनुवाद …

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समाचार का अर्थ, महत्व एवं स्रोत

समाचार का सीधा सम्बन्ध मनुष्य की सतत जिज्ञासा से है। नया जानने की इच्छा ही समाचार का प्रमुख आकर्षण है और समाचार प्राय: हमें कुछ न कुछ नया ही देता है। जो कुछ नया होता है वह एक तरह से समाचार है और जो कुछ जानने की यह जिज्ञासा मनुश्य में सदा सर्वदा से रही है। …

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रिपोर्टर का अर्थ, महत्व, योग्यता एवं उत्तरदायित्व

पत्रकारिता को महज एक रोजगार नहीं माना जा सकता है। पत्रकारिता तो एक शौक है, एक जज्बा है, एक जुनून है। पत्रकारिता एक जोखिम भरा काम है तो पत्रकारिता बेहद जिम्मेदारी का भी काम है। पत्रकार को हर समय अपने आस-पास की हर हलचल के प्रति सजग रहना पड़ता है। छोटी से छोटी घटना भी उसके …

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समाचार पत्र का इतिहास

इक्कीसवीं सदी की हमारी दुनिया आज इतनी छोटी हो गर्इ है कि इसे ग्लोबल विलेज कहा जाने लगा है। दुनिया को इतना छोटा बनाने का काम जिस अकेली चीज ने सबसे ज्यादा किया है उसे कहते हैं, सूचना तकनीक। क्षण भर में इंटरनेट के जरिए, फोन के जरिए आप दुनिया के किसी दूसरे कोने में बैठै …

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