ज्ञान मुद्रा के लाभ, विधि एवं सावधानियां

यह सबसे मौलिक योग मुद्रा है जो एकाग्रता और ज्ञान को बेहतर बनाने में मदद करता है। ज्ञान मुद्रा करने की विधि फर्श पर बिल्कुल आराम से पदमासन की मुद्रा में बैठ जाये। इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली को मोड़े और अंगूठे के ऊपर सटाएं। बाकी तीन उंगलियों को बिल्कुल सीधा रखें और ये तीनों उंगलियां …

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कंप्यूटर के विकास का संक्षिप्त इतिहास

कंप्यूटर का इतिहास तीन हजार वर्ष पुराना है। उस समय गिनतारे का उपयोग अंकगणितीय कार्यों के लिए होता था। जिसे आज हम रोमन गिनतारा कहते हैं। उसका उपयोग 2400 ईसा पूर्व के प्रारम्भ में बेबीलोनिया में हुआ था। गिनतारे को ।इंबने भी कहते हैं। ये तारों का एक फ्रेम होता है, इन तारों में पकी हुई …

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अंकेक्षण कार्यपत्र क्या है अंकेक्षण कार्य पत्र रखने का उद्देश्य क्या है?

अंकेक्षण कार्य पत्र यानि अंकेक्षक द्वारा अंकेक्षण कार्य करते समय जो प्रपत्र तैयार किए जाते है। अंकेक्षण कार्य पत्र अंकेक्षक की निजी संपत्ति होती है, जिसे नियोक्ता को देने की आवश्यकता नहीं होती। उदा. नियुक्ति आदेश, अंकेक्षण कार्यक्रम पत्रिका, अंकेक्षण टिप्पणी पुस्तिका, अधिकोष समाधान विवरण आदि। अंकेक्षण कार्य पत्र से जो दस्तावेज तथा प्रमाण तैयार होते …

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चंद्रगुप्त प्रथम कौन था ? चन्द्रगुप्त प्रथम का साम्राज्य विस्तार एवं समय

चन्द्रगुप्त प्रथम इतिहासकारों के अनुसार गुप्त वंश का प्रथम स्वतंत्र शासक था। गुप्त वंश को एक साम्राज्य के रूप में स्थापित करने का कार्य उसने ही किया। अभिलेखों में चन्द्रगुप्त प्रथम के लिए महाराजाधिराज पदवी का प्रयोग हुआ है। पूर्ववर्ती दोनों शासकों की अपेक्षा उसकी पदवी बड़ी है और उसके बड़े राज्य का शासक होने का …

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पुरुषार्थ क्या है और कितने प्रकार के होते हैं?

पुरुषार्थ का शाब्दिक अर्थ है – पुरुष द्वारा प्राप्त करने योग्य। हिन्दू विचार शास्त्रियों ने चार पुरुषार्थ माने हैं। धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष। धर्म का अर्थ है- जीवन का नियामक तत्व, अर्थ का तात्पर्य है-जीवन के भौतिक साधन, काम का अर्थ है-जीवन की वैध कामनाएं और मोक्ष का अभिप्राय है जीवन के सभी बन्धनों से …

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सरकारी अंकेक्षण क्या है ?

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा-2(45) के अनुसार सरकारी कंपनी वह कंपनी है, जिसकी प्रदत्त पूंजी का 51% या उससे अधिक हिस्सा केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा दोनों के पास होता है, तो उसे सरकारी कंपनी कहते हैं। सरकारी कंपनी का अंकेक्षण, यह सरकारी अंकेक्षण है तथा उसे वैधानिक अंकेक्षण भी कहा जाता है। केंद्र अथवा …

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संगीत में श्रुति की परिभाषा और प्रकार

संगीतोपयोगी नाद जो कान को साफ-साफ सुनाई पड़े ‘श्रुति’ कहलाती है। शास्त्रकार श्रुति की परिभाषा इस प्रकार करते हैं- ‘‘ श्रुयते इति श्रुतिः’’ अर्थात जो आवाज कान को सुनाई दे वह ‘श्रुति’ है। ध्यान से देखें तो यह परिभाषा अपने में पूर्ण नही है, क्योंकि संगीतोपयोगी आवाज को छोड़कर और भी आवाजें कान को सुनाई पड़ती …

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निष्पादन बजट क्या है? निष्पादन बजट एवं परम्परागत बजट के अन्तर

निष्पादन बजट शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1949 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हूवर कमीशनने अपनी रिपोर्ट में किया था, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि बजट ऐसा होना चाहिए, जो कार्यों, कार्यक्रमों एवं क्रियाकलापों पर आधारित हो। वास्तव में निष्पादन बजट की अवधारणा प्रबन्धकीय कुशलता में वृद्धि से सम्बन्धित है, जो कार्यों एवं कार्यक्रमों पर …

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गुरु नानक का जीवन परिचय

गुरूनानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवण्डी (पाकिस्तान) में हुआ था। आज यह स्थान ‘ननकाना साहिब’ के नाम से जाना जाता है। गुरूनानक जी की माता का नाम तृप्ता था। गुरूनानक जी के पिता का नाम मेहता कल्याणदास था। बड़ी बहन ‘नानकी’ के अनुकरण पर गुरूनानक जी का नाम ‘नानक’ रखा गया। कुछ लोग इसे …

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विटामिन B12 के स्रोत, कार्य, कमी से होने वाले रोग

विटामिन B12 (सायनोकोबेलामिन) इस विटामिन के जल में घुलनशील लाल वर्ण के क्रिस्टल होते हैं। विटामिन B12 के स्रोत यह दूध, माँस, अण्डे, यकृत, वृक्क आदि में मिलता है। आमाशय में केवल अन्तःस्थ कारक की उपस्थिति में इसका अवशोषण होता है। अतः इस विटामिन को बहिरस्थ कारक भी कहते है। अवशोषित होकर यह विटामिन यकृत में …

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