प्रश्नावली का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

प्रश्नावली अध्ययन विषय से सम्बन्धित प्रश्नों का एक संरचित समूह है जिसमें सूचनायें संकलित करने के लिए वैकल्पिक प्रश्नों में कोश्ठक तथा लिखित उत्तरों के लिए खाली स्थान उपलब्ध रहता है। इस माध्यम के द्वारा विस्तृत क्षेत्र से सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए उत्तरदाता का शिक्षित होना आवश्यक होता है। साथ ही प्रश्नो …

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व्यक्तित्व का अर्थ, परिभाषा एवं निर्धारक

प्रत्येक व्यक्ति में कुछ विशेष गुण या विशेषताएं होती है जो दूसरे व्यक्ति में नहीं होतीं। इन्हीं गुणों एवं विशेषताओं के कारण ही प्रत्येक व्यक्ति दूसरे से भिन्न होता है। व्यक्ति के इन गुणों का संगठन ही व्यक्ति का व्यक्तित्व कहलाता है। व्यक्तित्व का अंग्रेजी रूपान्तरण पर्सनलिटी (Personality) है जो लेटिन भाषा के पर्सोना (Persona) शब्द …

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मन का अर्थ एवं विशेषताएं

मन शब्द से हम सभी परिचित हैं। प्राय: इस शब्द का प्रयोग हम करते देखे जाते हैं। इस इकार्इ में हम इस शब्द के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। मन शब्द का प्रयोग कर्इ अर्थों में किया जाता है। जैसे- मानस, चित्त, मनोभाव तथा मत इत्यादि। लेकिन मनोविज्ञान में मन का तात्पर्य आत्मन्, स्व या …

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अभिवृत्ति की अवधारणा, विशेषताएं एवं निर्माण

अभिवृत्ति सामाजिक मनोविज्ञान का एक केन्द्रीय विषय है। सामाजिक मनोवैज्ञानिकों की रूचि विगत कर्इ दशकों से अभिवृत्ति में रही है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मनुष्य के व्यवहार को अभिवृत्ति बहुत प्रभावित करती है। अभिवृत्ति का अभिप्राय सामाजिक विश्व के किसी पक्ष के हमारे मूल्याँकन से है (फैजिया व रॉस्कॉस-एवोल्डसेन, 1994( ट्रेसर व मार्टिन, 1996)- …

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संचार की अवधारणा, परिभाषा एवं महत्व

संचार की अवधारणा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और संचार करना उसकी प्रकृति है । अपने भावों व विचारों का अदान-प्रदान करना उसकी जन्मजात प्रकृति है । ऐसा माना जा सकता है कि मानव के अस्तित्व में आने के साथ ही संचार की आवश्यकता का अनुभव हो गया हो गया होगा । जोकि मनुष्य की मूलभूत …

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संचार के प्रकार एवं सिद्धान्त

संचार के प्रकार संचार का मानवीय जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, संचार के बिना जीवन की परिकल्पना करना व्यर्थ है। संचार के द्वारा व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सदैव निरन्तरता बनी रहती है। संचार हमारे जीवन को विभिन्न प्रकार से प्रभावित करता है जिसे उद्देश्यों के आधार पर इसे कर्इ प्रकारों में विभाजित किया जा …

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वैयक्तिक समाज कार्य

भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित रूप …

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भारत में सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य के क्षेत्र

सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य में समाज कार्य की एक प्रणाली के रूप में विकास के साथ-साथ इसकी प्रविधियों, आधारभूत मूल्यों, धारणाओं तथा कार्य पद्धति में अन्तर आता गया। प्रारम्भ में वैयक्तिक सेवा कार्य का उद्देश्य सहायता प्रदान करना था। परन्तु बाद में मनोविज्ञान तथा मनोविकार विज्ञान के प्रभाव के कारण व्यक्तित्व एवं व्यवहार सम्बन्धी उपचार भी …

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समाज कल्याण प्रशासन की अवधारणा, प्रकृति एवं कार्य

समाज के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति उचित ढ़ग से करना, जिससे कि वह सुखी और सन्तोषजनक जीवन व्यतीत कर सके, कल्याणकारी राज्य का प्रमुख उदेद्श्य है। प्रभावकारी सेवाओं को विस्तृत स्तर पर लागू करने के लिए, योजना, निर्देशन, समन्वय और नियंत्रण का सामूहिक प्रयास किया जाता है। समाज कार्य की सेवाओं को व्यवसायिक स्वरूप …

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एनजीओ (NGO) के गठन हेतु नियम एवं नियमावली

समाज कल्याण का मूल प्रारम्भ स्वयंसेवी क्रिया में देखा जा सकता है जिसने इसे पिछली अनेक शताब्दियों से वर्तमान तक जीवित रखा है। भारत में सामाजिक हित के लिए स्वयंसेवी कार्य की गौरवपूर्ण परम्परा रही है। स्वयंसेवी शब्द लैटिन भाशा के शब्द, जिसका अर्थ है ‘इच्छा’ अथवा ‘स्वतंत्रता’ से लिया गया है। हैराल्ड लास्की ने समुदाय …

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