लेखन कौशल का विकास

रचना भावों एवं विचारों की कलात्मक अभिव्यक्ति है- लेखन। वह शब्दों को क्रम से लिपिबद्ध सुव्यवस्थित करने की कला है। भावों एवं विचारों की यह कलात्मक अभिव्यक्ति जब लिखित रूप में होती है तब उसे लेखन अथवा लिखित रचना कहते है। अभिव्यक्ति की दृष्टि से लेखन तथा वाचन परस्पर पूर्वक होते है। वाचन से लेखन कठिन …

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सार्वभौमिकता किसे कहते हैं? सार्वभौमिकता की विशेषताएँ

सार्वभाौमिकता की अवधारणा स्थानीयकरण की अवधारणा के विपरीत है। शाब्दिक दृष्टि से सार्वभौमिकता का आशय किसी संस्कृति विशेषता का प्रत्येक स्थान में प्रसार होना है। मैकिम मेरियट ने सार्वभौमिकता की प्रक्रिया का उल्लेख किसी ऐसी स्थिति के लिए किया है, जिसमें स्थानीय एवं लघु परम्पराओं से धीरे‘-धीरे बहुल परम्परा का निर्माण होता है। किसी भी समाज …

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वस्तुनिष्ठता का अर्थ एवं परिभाषा?

वस्तुनिष्ठता किसी अध्ययन से सम्बन्धित वह विशेषता है जो यथार्थ अवलोकन पर आधारित होती है। जब हम अपने धर्म, जाति प्रजाति, विष्वास-क्षेत्र एवं निजी विचारों से पृथक रहकर कोई अध्ययन करता है, तब ऐसे अध्ययन को हम वस्तुनिष्ठ अध्ययन कहते हैं। ऐसे अध्ययन का उद्देश्य किसी तथ्य की अच्छाई-बुराई अथवा उससे सम्बन्धित उचित और अनुचित को …

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शब्दकोश किसे कहते है | शब्दकोश के प्रकार

शब्दकोश, एक या एक से अधिक विशिष्ट भाषाओं में शब्दों का एक संग्रह है जिसमें, सूचना, परिभाषाएं, उच्चारण, अनुवाद, अर्थ अन्य जानकारियां उपलब्ध रहती हैं अर्थात शब्दकोश उस ग्रंथ को कहते हैं जिसमें अक्षरक्रम/वर्णक्रम से शब्द और उनके अर्थ दिए गए होते हैं। ऐसा ग्रन्थ जिसमें किसी भाषा के शब्दों का वर्णक्रम में संग्रह तथा उसी …

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डिस्लेक्सिया किसे कहते हैं? डिसलेक्सिक बालक की पहचान

डिसलेक्सया (Dyslexia) ग्रीक भाषा से निकाला गया है। Dys से तात्पर्य निर्धन या अपर्याप्त और Lexis का अर्थ है शब्द। विद्यार्थी जिन्हें डिसलेक्सया है वह पठन स्पेलिंग भाषा को समझने में जो वह सुनते हैं या बोलने तथा लिखने में कठिनाई अनुभव करते हैं। डिसलेक्सया की परिभाषा वल्र्ड फेडरेशन आफ न्युरोलाॅजी ने दी है। वह है …

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अभिक्षमता : अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, प्रकार व मापन

दैनिक जीवन में हम यह देखते है कि उसे किसी विशिष्ट कार्य में रूचि है, हर बच्चें की हर छात्र की रूचियाँ भिन्न-भिन्न होती है, किसी बच्चे संबंध में हम कह सकते है कि इस बच्चे का बडा होकर डाॅक्टर बनना चाहिए अथवा यह लडकी बडी होकर जरूर एक शिक्षिका बन सकती है। इस प्रकार के …

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शिक्षा आयोग या कोठारी आयोग (1964-66) क्या है ?

भारत सरकार नें 14 जुलाई, 1964 को अपने प्रस्ताव में शिक्षा आयोग की नियुक्ति की। इस आयोग के अध्यक्ष प्रो.डी.एस.कोठारी थे। उनके नाम पर इस आयोग को कोठारी कमीशन भी कहा जाता है। शिक्षा आयोग या कोठारी आयोग का गठन  सन् 1964 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U G C) के तत्कालीन अध्यक्ष श्री दौलत सिंह कोठारी …

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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के प्रमुख उद्देश्य

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की शुरूआत सन् 2009 से हुई। इस योजना के किन्वान्यन का प्रारम्भ सत्र 2009-10 से हुआ है।  राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा की सभी तक पहुंच सुनिश्चित करना एवं इसके गुणवत्ता में सुधार लाना है। इस योजना के अन्य उद्देश्य माध्यमिक …

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लोकतंत्र में शिक्षा के उद्देश्य एवं आवश्यकता

डयूवी ने लिखा है कि ‘‘लोकतंत्र केवल सरकार का रूप न होकर, उससे भी कुछ अधिक है। यह मुख्यत: सहयोगी जीवन और सम्मिलित रूप से किये गये अनुभव की विधि है।’’ इस प्रकार से यह निश्चित है कि शिक्षा लोगों को तैयार करे। शिक्षा को लोगों में सहजीवन व सहअस्तित्व की भावना विकसित करनी चाहिये। लोकतंत्र …

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धर्मनिरपेक्षता क्या है धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की विशेषताएं ?

धर्मनिरपेक्षता वह तत्व है, जिसके अनुसार राज्य के कार्यों में धर्म तथा धार्मिक कार्यों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।’’ धर्मनिरपेक्षता अति उच्चस्तरीय धार्मिक व्यापकता तथा सहिष्णुता है, जो किसी संकीर्ण धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित न होकर सहनशीलता, स्वतंत्रता, धैर्य, मानवीयता व सार्वभौमिक भातृत्वभाव पर आधारित है।उपर्युक्त विवेचना से भारतीय धर्म-निरपेक्ष राज्य-व्यवस्था के बारे में निम्नांकित बातें …

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