विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि क्या है विश्लेषण विधि तथा संश्लेषण विधि में अंतर?

विश्लेषणात्मक एवं संश्लेषणात्मक, वो अलग – अलग विधि है। इसलिए इन्हें अलग – अलग समझने की आवश्यकता है। विश्लेषण विधि विश्लेषण शब्द का अर्थ है चीजों को छोटे छोटे हिस्सों में तोड़ना इसमें हम समस्या को हल करने के लिए उसे सरल हिस्सों में तोड़ देते है। इस विधि में हम अज्ञात से ज्ञातकी ओर अग्रसर …

Read more

ह्यूरिस्टिक विधि क्या है? ह्यूरिस्टिक विधि के गुण और दोष

Hemsitic शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के “Heurisko” शब्द से हुई हैं जिसका अर्थ है – ‘‘ मैं खोजता हूँ ’’ (I findout) ह्यूरिस्टिक विधि के जनक हेनरी एडवर्ड आर्मस्ट्रांग हैं।  ह्यूरिस्टिक विधि के उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक प्रवृत्तियों का विकास करना। छात्रों को अन्वेषण तथा अनुसंधानकर्ता के रूप में पहचानना। छात्रों को स्वयं ज्ञान, सत्य …

Read more

क्रियात्मक शोध क्या है क्रियात्मक शोध के सोपान (चरण) , क्षेत्र एवं प्रक्रियाएं ?

अनुसंधान एक उद्देश्यपूर्ण और सविचार प्रक्रिया है इसका मुख्य उद्देश्य ज्ञान वर्धन करना एवं परिमार्जित कर उपयोगी बनाना है। यह एक वैज्ञानिक एवं बौद्धिक प्रक्रिया है। क्रियात्मक अनुसंधान द्वारा समस्याओं का अध्ययन निर्णय एवं क्रियाओं में निर्देशन सुधार एवं मूल्यांकन किया जाता है। अधिकतर क्रियात्मक अनुसंधान कक्षा कक्ष की विभिन्न स्थितियों की समस्याओं का निराकरण, निदानात्मक …

Read more

आधुनिक राजनीति विज्ञान की विशेषताएं

राजनीति शास्त्र की नवीन परिभाषाओं के संदर्भ में इसका अध्ययन निम्न रूपों में किया जाता है –  राजनीति शास्त्र मानवीय क्रियाओं का अध्ययन है।  राजनीति शास्त्र शक्ति का अध्ययन है।  राजनीति शास्त्र राजनीतिक व्यवस्था का अध्ययन है।  राजनीति शास्त्र निर्णय प्रक्रिया का अध्ययन है।  आधुनिक राजनीति विज्ञान के क्षेत्र आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान के …

Read more

पाठ्यपुस्तक किसे कहते है? पाठ्य पुस्तक की आवश्यकता एवं महत्व

किसी विषय के ज्ञान को जब एक स्थान पर पुस्तक के रूप में संगठित ढंग से प्रस्तुत किया जाता है तो उसे पाठ्य-पुस्तक की संज्ञा प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय पाठयचर्या रूपरेखा 2005 में पाठयपुस्तक को एक शिक्षण अधिगम सामग्री के पैकेज का भाग माना है एवं कहा है ‘‘पाठयपुस्तक एक मार्गदर्शिका के रूप में प्रयोग …

Read more

भाषा की प्रकृति एवं विशेषताएं

“भाषा” शब्द संस्कृति की “भाष्” धातु से बना है। जिसका अर्थ है- बोलना या कहना अर्थात्, जिस माध्यम से बोला या कहा जाए उसे भाषा कहते हैं। भाषा के संबंध में भाषा वैज्ञानिकों ने अनेक परिभाषाएं दी हैं। वैसे कहा जाता है कि किसी भी शब्द को परिभाषा में बांधना संभव नहीं है।  भाषा शब्द का …

Read more

भाषा के विविध रूप

भावाभिव्यक्ति के संदर्भ में विश्व की सभी भाषाएं सामान्यतः समान होती है, क्योंकि सभी भाषाएं विचार-विनिमय के मुख्य साधन के रूप में प्रयुक्त होती है। मन के भावों और अभिव्यक्ति की भिन्नता के कारण भाषा में भिन्नता होती है। इसका कारण है – इतिहास, भूगोल, संस्कृति तथा प्रयोक्ता संबंधी भिन्नता।  भाषा के विविध रूप भाषा वैज्ञानिकों …

Read more

वर्ण एवं वर्णमाला का अर्थ

वर्ण – वे मूल ध्वनियां वर्ण कहलाती हैं, जिनके खंड न हो सकें। जैसे, पुस्तक में- प्+उ+स्+त्+अ+क्+अ- इन सात ध्वनियों में किसी का भी खंड नहीं हो सकता, अतः ये वर्ण हैं। वर्णमाला – किसी भाषा के समस्त वर्ण-समूह को वर्णमाला कहा जाता है। हिंदी भाषा की वर्णमाला में जो वर्ण हैं, उन्हें स्वर और व्यंजन …

Read more

नए और पुराने राजनय में अंतर

राज्यों के मध्य राजनयिक सम्बन्ध अति प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। ये उतने ही प्राचीन हैं जितने कि राज्य। यूनान, रोम व प्राचीन भारत में राजनयिक सम्बन्ध अति व्यापक थे तथा इन सम्बन्धों को निर्धारित करने वाले नियम भी प्रतिपादित किये जा चुके थे। पुराने राजनय का अर्थ प्राचीन कालीन राजनय से कदापि नहीं …

Read more

लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियाँ और कार्य

संघीय संसद के निम्न सदन या लोकप्रिय सदन को लोकसभा का नाम दिया गया है। लोकसभा की सदस्य संख्या समय-समय पर परिवर्तित होती रही है। संविधान में उपबन्ध है कि लोकसभा के 530 से अधिक सदस्य राज्यों में प्रादेशिक निर्वाचन दलों से प्रत्यक्ष रीति से चुने जाएंगे और 20 से अनाधिक सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों का …

Read more