समता पर व्यापार (Trading on Equity) क्या है समता पर व्यापार के प्रकार ?

जब कोई कम्पनी समता अंश पूँजी की बजाय ऋण पूँजी के आधार पर अपने व्यवसाय का संचालन करती है तो इसे समता पर व्यापार करते हैं। कुल पूंजीकरण में ऋण पूँजी का अनुपात अधिक रखकर समता अंशों पर आय बढ़ाई जा सकती है। गेस्टर्नबर्ग के अनुसार-‘‘जब कोई व्यक्ति या निगम स्वामित्व पूँजी के साथ ऋण पूँजी …

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कार्यशील पूंजी किसे कहते हैं? तथा उसके निर्धारक कारकों का वर्णन

प्रत्येक व्यावसायिक संस्था को दो प्रकार की पूंजी की आवश्यकता होती है- स्थिर पूंजी व कार्यशील। व्यवसाय के संचालन में स्थायी रूप में प्रयोग हेतु कुछ सम्पत्तियों की आवश्यकता पड़ती है, जिन्हें स्थायी सम्पत्ति कहते हैं और इनमें लगायी गयी पूजीं स्थायी या स्थिर पूंजी कहलाती है। इसके विपरीत, व्यवसाय के संचालन सम्बन्धी दिन प्रतिदिन की …

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पूंजी बजटन क्या है? पूंजी बजटन की विशेषतायें बताते हुए इसके उद्देश्यों का वर्णन।

पूंजी बजटन प्रबंध की वह तकनीक है जिसके अनतर्गत पूंजीगत व्यय का इस प्रकार नियोजन होता है जिससे इन व्ययों के उद्देश्य को सरलता पूर्वक प्राप्त किया जा सके। इसके अन्तर्गत पूंजीगत पूंजी विनियोग के समस्त अवसरों एवं विकल्पों का विश्लेषण कर सर्वश्रेष्ठ विकल्प/अवसर का चुनाव किया जाता है। पूंजी बजटनः अर्थ व परिभाषाएँ पूंजी बजटन …

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लाभांश नीति के प्रकार

लाभांश नीति के निर्धारण के लिए ऐसा कोई सूत्र नहीं दिया जा सकता है जो प्रत्येक स्थिति में लागू होता हो, क्योंकि यह कम्पनी की परिस्थितियों एवं प्रबंधकों की नीतियों पर निर्भर करती है। ऐसी नीति जो अंशधारियों एवं कम्पनी दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों, उसे ही सुदृढ़ व सुसंगत नीति कहा जा सकता है। …

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लाभांश नीति को प्रभावित करने वाले तत्व

लाभांश नीति को प्रभावित करने वाले तत्व  लाभांश नीति का उद्देश्य यही होता है कि अंशधारियों की अधिक लाभांश आशा को पूरा किया जाए और बकाया आय द्वारा कम्पनी की विनियोग आवश्यकताओं को पूरा कर उसके कल्याण का भी ध्यान रखा जाए । इस कार्य के लिए यह निर्णय लेना आवश्यक हो जाता है कि कितना …

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दीर्घकालीन वित्त क्या है ? दीर्घकालीन वित्त की आवश्यकता एवं महत्व का वर्णन

औद्योगीकरण के इस व्यापक प्रचार के साथ-साथ ही दीर्घकालीन वित्त का महत्व एवं आवश्यकता भी उसी अनुपात में बढ़ी है। कुछ विद्वान उद्योग एवं व्यापार में 10 वर्ष से अधिक की वित्तीय आवश्यकताओं को दीर्घकालीन वित्त कहते हैं। परन्तु सामान्य स्वीकार्य अवधारणा एवं भारतीय योजना आयोग द्वारा निर्धारित अवधि के अनुसार भारत में उन सभी वित्तीय …

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भारत में औद्योगिक वित्त निगम की स्थापना कब हुई थी इसके उद्देश्य एवं कार्य?

भारतीय औद्योगिक वित्त निगम की स्थापना जुलाई 1948 को औद्योगिक वित्त निगम अधिनियम 1948 के अन्तर्गत वैधानिक निगम के रूप में की गयी। 1 जुलाई 1993 को निगम की प्रकृति में परिवर्तन करके इसे एक कम्पनी का रूप प्रदान कर दिया गया है। इस प्रकार अब इसका नाम भारतीय औद्योगिक वित्त निगम लिमिटिड हो गया है। …

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भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) की स्थापना कब हुई इसके उद्देश्य और कार्य ?

भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) की स्थापना 1 जुलाई 1964 को रिजर्व बैंक की एक सहायक संस्था के रूप में की गयी थी। 1 सितम्बर 1964 से पुनर्वित्त निगम का विलय इसमें कर दिया गया तथा 16 फरवरी 1976 से यह बैंक पूर्णरूप से केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण में आ गया है।  औद्योगिक विकास बैंक की स्थापना …

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मर्चेंट बैंकिंग क्या है ? मर्चेंट बैंकर कौन कौन से कार्य करते हैं?

प्रारम्भिक अवस्थाओं में जो छोटे छोटे व्यापारी कमीशन लेकर ऋण देने एवं दिलाने का कार्य करते थे उन्हें मर्चेंट बैंकर कहा (merchant banker) जाता था। वर्तमान मर्चेंट बैंकिंग (merchant banking) इससे कहीं अधिक परिवर्तित, परिमार्जित एवं व्यापक अवधारणा है। वर्तमान समय में मर्चेंट बैंकिंग में कम्पनियों एवं निगमों की ओर से पूंजी बाजार में सार्वजनिक निर्गमन …

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क्रेडिट रेटिंग क्या होती है? What is Credit Rating?

भारत में सर्वप्रथम सन् 1987 में पहली साख क्षमता मूल्यांकन संस्था Credit Rating & Information Services of India Ltd. (CRISIL) स्थापित की गयी। वर्तमान समय इस क्षेत्र में दो अन्य संस्थायें Credit Analysis and Research Ltd. (CARE) ,oa Information and Credit Agency of India Ltd. (ICRAL) भी कार्य कर रही हैं। वर्तमान प्रतियोगी युग में प्रत्येक …

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