मानव का क्रमिक विकास

मानव का क्रमिक विकास मानव के सबसे नजदीकी पूर्वजों के क्रमिक विकास को दो श्रेणी में विभाजित किया जा सकता हैः  होमो-पूर्व और  होमो प्रजाति का क्रमिक विकास 1. होमो-पूर्व यह वर्ग होमिनिड के जीवाश्म साक्ष्यों से वर्गीकृत किया गया है जो मानव के नजदीकी सादृश्य तो हैं, लेकिन यह वानर से अधिक समीप्य हैं। ड्रियोपिथिकस …

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कृत्रिम गर्भाधान किसे कहते हैं ? इससे क्या लाभ है

कृत्रिम गर्भाधान यांत्रिक विधि से पशुओं के शुक्राणु को मादा पशु की योनी में लाकर निषेचन कराना एवं गर्भ स्थापित करना कृत्रिम गर्भाधान कहलाता है। इस विधि के द्वारा वांछित नर का शुक्राणु एकत्र करके मादा के ऋतुकाल के समय प्रजनन प्रक्रिया करायी जाती है ताकि गर्भाधारण हो सके।  कृत्रिम गर्भाधान से लाभ  कृत्रिम गर्भाधान से …

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त्राटक क्या है?।। त्राटक करने के फायदे

सम्माहित या एकाग्र चित्त हुआ मनुष्य निश्चल दृष्टि से सूक्ष्म या लघु पदार्थों को तब तक देखें जब तक अश्रुपात न हो जावें। इससे अनिन्द्रा और नेत्र रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है। मत्स्येन्द्र आदि मुनियों ने इसे त्राटक कार्य कहा है। त्राटक शुद्धिकरण की पॉंचवी प्रक्रिया है। त्राटक का अर्थ है किसी एक …

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कपालभाति प्राणायाम कैसे करें और इसके क्या फायदे हैं?

कपाल का अर्थ है मस्तिष्कए व भॉंति का अर्थ होता है चमकाना,अर्थात प्रकासित करना। कपालभाति की क्रिया में मतिष्क का का शोधन होता है। वस्तुतः कपालभाति शोधन की ही क्रिया है परन्तु कई जगह इसे प्राणायाम की क्रिया भी कहा गया है।कपालभाति की एक प्रक्रिया में श्वाास-प्रश्वाोस को जोड़ा जाता है। चूँकि यह प्रक्रिया प्राणायाम (श्वास-प्रश्वास) …

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समाधि क्या हैं ? समाधि के भेद या प्रकार को स्पष्ट करते हुए प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन

हठयोग के कई ग्रंथों जैसे हठयोग प्रदीपिका, योगसूत्र, घेरण्ड संहिता आदि में अनेकों मनीषियों ने समाधि का वर्णन अलग-अलग तरह से किया है। कहा जाता है कि समाधि एक अवस्था है जिसमें व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार हो जाता है। सभी शास्त्रों और ग्रन्थों में जिस अवस्था को ब्रह्मज्ञान के नाम से जाना जाता है, वह स्वयं में …

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क्रेत्समर एवं शेल्डन का व्यक्तित्व सिद्धांत – Kretschmer and Sheldon’s personality theory

क्रेत्समर एवं शेल्डन के अनुसार व्यक्तित्व की अवधारणा- क्रेत्समर एवं शेल्डन दोनों ने ही मानवीय व्यक्तित्व का आधार शरीर की संरचना एवं क्रियाविधि को माना है। अर्थात्- मनुष्य का शारीरिक गठन तथा उसके उसकी शारीरिक गतिविधियों के आधार पर किसी प्राणी के व्यक्तित्व का विश्लेषण किया जा सकता है।  क्रेत्समर एवं शेल्डन दोनों ही विद्वानों का …

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मैस्लो का व्यक्तित्व का मानवतावादी सिद्धांत क्या है? इसकी सीमायें एवं गुण क्या-क्या है

एब्राहम मैस्लो का व्यक्तित्व सिद्धांत। मैस्लों का व्यक्तित्व सिद्धांत मानवतावादी आन्दोलन से प्रेरित है, जिसमें मानवीय व्यक्तित्व के विकास में बाह्य कारकों की तुलना में व्यक्तिगत मूल्यों, आत्मनिर्देश तथा व्यक्तिगत वर्धन इत्यादि मानवीय एवं आन्तरिक कारकों पर अधिक बल दिया गया है।  मैस्लों द्वारा व्यक्तित्व विकास में आन्तरिक कारकों पर अत्यधिक बल दिये जाने के कारण …

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सर्वनाम किसे कहते हैं इसके कितने भेद होते हैं ?

संज्ञा के बदले में आने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है – सबका नाम। जैसे – वह, मैं, तुम, तू, आप इत्यादि। सर्वनाम शब्द का अर्थ है- सब का नाम। वाक्य में संज्ञा की पुनरुक्ति को दूर करने के लिए संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम …

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संज्ञा किसे कहते हैं उदाहरण सहित

किसी प्राणी, वस्तु, स्थान या भाव के  नाम को संज्ञा कहते हैं जैसे- रवि, पेंसिल, दिल्ली, बुढ़ापा आदि। संज्ञा किसे कहते हैं किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव, अवस्था, गुण या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे आलोक, पुस्तक, जोधपुर, दया, बचपन, मिठास, गरीबी आदि।  परिभाषा – किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का बोध …

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विशेषण किसे कहते हैं इसके कितने भेद हैं ?

विशेषण वो शब्द या शब्दों का समूह (उपवाक्य) होते हैं जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषण बताते हैं या फिर उस संज्ञा या सर्वनाम के बारे में कुछ अतिरिक्त सूचना देते हैं। ये भी कह सकते हैं कि विशेषण किसी संज्ञा या सर्वनाम का वर्णन करते हैं। विशेषण किसे कहते हैं वे शब्द, जो किसी संज्ञा …

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