अशोक का साम्राज्य विस्तार, अशोक धम्म की प्रमुख विशेषताएं

यद्यपि अशोक का व्यक्तिगत धर्म बौद्ध  धर्म था, परन्तु उसने अपनी प्रजा की नैतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए कुछ नैतिक सिद्धन्तों का प्रसार किया, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘अशोक का धम्म’ कहा जाता है। अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए अशोक ने जिन आचारों की संहिता प्रस्तुत की, उसे ही उसके अभिलेखों में ‘धम्म’ …

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दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 क्या है ?

दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 क्या है इस अधिनियम के अन्तर्गत दहेज लेना और देना दोनों ही प्रतिषेधित है। अधिनियम की धारा 2 के अनुसार ‘दहेज’ का अभिप्राय विवाह के एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष के लिए या विवाह के किसी पक्ष के माता-पिता या अन्य व्यक्ति द्वारा विवाह के दूसरे पक्ष या किसी अन्य व्यक्ति के लिए …

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द्वितीय आंग्ल बर्मा युद्ध के कारण और परिणाम

द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध लार्ड डलहौजी के शासनकाल में हुआ था। लार्ड डलहौजी घोर साम्राज्यवादी था। उसने जिस प्रकार भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का विस्तार किया, उसी प्रकार उसने बर्मा के मामले में भी विस्तारवादी नीति अपनायी। द्वितीय आंग्ल बर्मा युद्ध 1. यान्दूब के बाद की स्थिति बर्मा ने आवा नरेश अंग्रेजों से किसी प्रकार के राजनीतिक या …

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प्राकृतिक चिकित्सा के 10 सिद्धांत || Prakritik Chikitsa Ke Siddhant

मनुष्य प्रकृति का एक हिस्सा है। उसका शरीर इन्हीं प्रकृति तत्व से बना है। प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत नितान्त मौलिक है इनके अनुसार प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करने से रोग पैदा होते है तथा प्राकृतिक नियमों का पालन करते हुए पुन: निरोग हो सकते है। मनुष्य शरीर में स्वाभाविक रूप एक ऐसी प्रकृति प्रदत्त पायी …

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पूनिक युद्धों के कारण प्रभाव क्या थे?

कार्थेज अफ्रीका के उतरी किनारे पर स्थित है तथा ये लोग अच्छे नाविक थे तथा अटंलाटिक तथा भूमध्यसागर पर इनका एकाधिकार कायम था। इनके स्पेन, पुर्तगाल और सार्दमिया (Sardmia) द्वीपों से अच्छे संबध थे। रोम के विस्तार के कारण रोमन तथा कार्थेज का आपस में युद्ध शुरू हो गया। प्रथम प्यूनिक युद्ध का मुख्य कारण सिसली …

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रोमन साम्राज्य के पतन के कारण

रोम एक बहुत बडा साम्राज्य था जिसमें इंग्लैड, स्पेन पुर्तगाल, जमर्नी, ग्रीस, एशिया, माइनर, मिश्र तथा उत्तरी अफ्रीका का बडा क्षेत्र जिसमें कार्थेज इत्यादि थे यह साम्राज्य एक ही दिन में बन कर खडा नही हो गया तथा न ही इसका पतन एक ही दिन में हुआ बल्कि इसके पतन में एक लम्बी अवधि लगी न …

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हीगल के द्वंद्वात्मक सिद्धांत की व्याख्या

हीगल का द्वन्द्ववाद का विचार उसके सभी महत्त्वपूर्ण विचारों में से एक महत्त्वपूर्ण विचार है। यह विश्व इतिहास की सही व्याख्या करने का सबसे अधिक सही उपकरण है। हीगल ने इस उपकरण की सहायता से अपने दार्शनिक चिन्तन को एक नया रूप दिया है। इसी विचार के कारण हीगल को राजनीतिक चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण जगह …

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हीगल के राज्य संबंधी विचार, #Hegel

हीगल के राज्य संबंधी विचार सम्पूर्ण राजनीतिक चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण एवं मौलिक विचार हैं। उसके प्रमुख राज्य संबंधी विचार ‘फिनोमिनोलॉजी ऑफ स्पिरिट’ तथा ‘फिलोसॉफी ऑफ राइट’ नामक ग्रन्थों में वर्णित हैं। हीगल ने जर्मनी की तत्कालीन राजनीतिक दुर्दशा को देखकर अपने चिन्तन को खड़ा किया था ताकि जर्मनी का एकीकरण हो सके और जर्मनी एक शक्तिशाली राष्ट्र …

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बेन्थम उपयोगितावाद का सिद्धांत, #जेरेमी बेन्थम

बेन्थम के उपयोगितावाद का सिद्धांत बेंथम की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं अमूल्य देन है। उसके अन्य सभी राजनीतिक विचार उसके उपयोगितावाद पर ही आधारित हैं। लेकिन उसे इसका प्रवर्तक नहीं माना जा सकता। रोचक बात यह है कि बेंथम ने कहीं भी उपयोगितावाद शब्द का प्रयोग नहीं किया।  बेन्थम के उपयोगितावाद का सिद्धांत बेंथम के उपयोगितावादी दर्शन …

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बेंथम के राजनीतिक विचार

इतिहास में यह एक विवादास्पद मुद्दा रहा है कि क्या बेंथम को एक राजनीतिक दार्शनिक माना जाए या नहीं। कई लेखक उसको राजनीतिक दार्शनिक की बजाय एक राजनीतिक सुधारक मानते हैं। उनके अनुसार बेंथम का ध्येय किसी राजनीतिक सिद्धान्त का प्रतिपादन करना नहीं था बल्कि अपने सुधारवादी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि के लिए राज्य के सम्बन्ध में …

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