मंत्रिपरिषद का आकार, रचना और कार्यकाल

संविधान के अनुच्छेद 74(9) में मंत्रिपरिषद की व्यवस्था है। 44वें संविधान संशोधन के बाद इस अनुच्छेद का स्वरूप इस प्रकार है- राष्ट्रपति को अपने कार्यों का संपादन करने में सहायता और मंत्रणा देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान, प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति अपने कार्यों के निर्वहन में उसकी मंत्रणा के अनुसार चलेंगे। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद है …

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राजनीतिक आधुनिकीकरण क्या है इसकी विशेषताएं

राजनीतिक आधुनिकीकरण, आधुनिकीकरण का एक पक्ष है जिसका सम्बन्ध आधुनिकीकरण के राजनीतिक पक्ष से है। राजनीतिक आधुनिकीकरण की अवधारणा आधुनिकीकरण की अवधारणा पर आधारित है। आधुनिकीकरण की धारणा को समझकर ही राजनीतिक आधुनिकरण को समझा जा सकता है। आधुनिकरण की धारणा एक बहुत व्यापक और विशाल धारणा है। इसका सम्बन्ध जीवन के हर क्षेत्र में होने …

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गद्य शिक्षण की विधियाँ, महत्व, उद्देश्य

गद्य साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसमें छन्द अलंकार योजना रस विधान आदि का निर्वाह करना आवश्यक नहीं। गद्य की विशेषता तथ्यों को सर्वमान्य भाषा के माध्यम से, ज्यों का त्यों प्रस्तुत करने में होती है। गद्य साहित्य की अनेक विधाएँ है- कहानी नाटक, उपन्यास निबन्ध, जीवनी, संस्मरण, आत्मचरित रिपोर्ताज व्यंग्य आदि। गद्य शिक्षण की विधियाँ …

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्य एवं शक्तियां

संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रमुख अंगों में सबसे बड़ा तथा सबसे अधिक लोकप्रिय अंग महासभा है। यह संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्रीय निकाय है। जैसा कि ई0पी0चेज ने लिखा है : “महासभा संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्र बिन्दु है। यह न तो अपना स्थान त्याग सकती है और न अपनी महत्वपूर्ण स्थिति के लिए किसी दूसरे अंग को भागीदार …

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भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान को 26 जनवरी, 1950 को देश भर में लागू किया गया । इस सभा का गठन इसलिए किया गया क्योंकि आजादी के बाद भारत के अपने संविधान की आवश्यकता हुई, जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष डाॅ. भीमराव अम्बेडकर थे । किसी भी देश का संविधान उस देश की सर्वोच्च निधि …

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना की मुख्य विशेषताएं

प्रत्येक संविधान के प्रारंभ में एक प्रस्तावना होती है । जिसमें संविधान के मूल उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाता है । यह संविधान का मूल्यवान अंग होने के कारण संविधान की आत्मा, कुंजी तथा मानदण्ड है । यह भारत के प्रजातांत्रिक राज्य का एक संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण घोषणा-पत्र है । भारतीय संविधान की प्रस्तावना …

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लोक व्यय क्या है? लोक व्यय में वृद्धि के कारण

लोक व्यय उस व्यय को कहते हैं, जो लोक सनाओं-अर्थात् केन्द्र, राज्य तथा स्थानीय सरकारों के द्वारा या तो नागरिकों की सामूहिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किया जाता है अथवा उन के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण में वृद्धि करने के लिए। आजकल सरकारी व्यय की मात्रा, संसार के प्राय: सभी देशों में निरन्तर बढ़ रही …

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सार्वजनिक ऋण के उद्देश्य

सार्वजनिक ऋण, राज्य द्वारा आय प्राप्त करने का एक साधन है। लोक अथवा सार्वजनिक ऋण उस ऋण को कहते हैं जिसे कि राज्य (state) अपनी प्रजा से अथवा अन्य देशों के नागरिकों से लेता है। सरकार जब उधार लेती है तो उससे लोक ऋण का जन्म होता है। सरकार बैंकों, व्यावसायिक संगठनों, व्यवसाय गृहों तथा व्यक्तियों …

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एक कर प्रणाली एवं बहुकर प्रणाली के गुण और दोष

एक कर प्रणाली के अंदर राज्य द्वारा केवल एक कर लगाया जाता है जो या तो कृषि उत्पादन पर हो सकता है, आय पर हो सकता है अथवा अन्य किसी वस्तु पर हो सकता है। एक कर प्रणाली एक कर- केवल कृषि पर – प्रकृतिवादी -अर्थशास्त्रियों का विचार था कि केवल कृषि उत्पादन पर कर लगाया जाये …

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प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं प्रत्यक्ष कर के गुण और दोष क्या है?

सामान्य तौर पर प्रत्यक्ष कर वे कर होते हैं जिनका भुगतान एक ही बार में कर दिया जाता है तथा इन कर का वे ही व्यक्ति भुगतान करते हैं जिन पर वह लगाया जाता है उन के भार को दूसरों पर टाला नहीं जा सकता। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष कर वे होते हैं जिनका भुगतान पहले तो …

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