इतिहास अतीत का अर्थ, परिभाषा, उपयोगिता, महत्व, प्रकृति व क्षेत्र

इतिहास अतीत क्या है? इस प्रश्न के उत्तर अनेक रूपों में हमारे सामने आते हैं। विभिन्न विद्वानों के द्वारा इसके अनेक उत्तर दिये गये हैं। इतिहास अतीत एक ऐसा विषय है जिसे सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता। इतिहास अतीत हर विषय से सम्बन्धित है। प्राचीनकाल से आज तक इस पृथ्वी पर जो कुछ भी हुआ …

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देवनागरी लिपि तथा हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण

प्राचीन नागरी लिपि का प्रचार उत्तर भारत में नवीं सदी के अंतिम चरण से मिलता है, यह मूलत: उत्तरी लिपि है, पर दक्षिण भारत में भी कुछ स्थानों पर आठवीं सदी से यह मिलती है। दक्षिण में इसका नाम नागरी न होकर नंद नागरी है। आधुनिक काल की नागरी या देवनागरी, गुजराती, महाजनी, राजस्थानी तथा महाराष्ट्री …

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हिंदी की संवैधानिक स्थिति का परिचय

भारत सरकार द्वारा राजभाषा हिंदी प्रचार-प्रसार के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। सभी मंत्रालयों के साथ हिंदी सलाहकार समितियाँ बनाई गई हैं। इन समितियों की बैठक भी त्रैमासिक होने का प्रावधान है। इन बैठकों में राजभाषा प्रयोग के लेखा-जोखा पर विचार किया जाता है। वर्तमान समय में राजभाषा हिंदी के आकर्षक रूप से प्रयोग …

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राष्ट्रभाषा किसे कहते हैं ? राष्ट्रभाषा हिंदी का स्वरूप और विकास

राष्ट्रभाषा किसी भी भाषा का प्रारंभिक रूप बोली होती हैं सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक आदि कारणों से कोई बोली विकसित होकर भाषा का रूप धारण कर लेती है। उसका प्रयोग क्षेत्र विस्तृत हो जाता है। भिन्न-भिन्न बोलियों के प्रयोक्ता समाज-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उस भाषा का प्रयोग करने लगते हैं। विद्वानों के प्रयासों से भाषा …

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संपर्क भाषा किसे कहते हैं ?

भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ भाषाओं की संख्या सैकड़ों में है। बाइस भाषाएँ तो संविधान की अष्टम सूची में ही उल्लिखित हैं। इस दृष्टि में यहाँ संपर्क भाषा का विशेष महत्व है। भारत के इतिहास का अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि यहाँ युगों से ‘मध्य देश’ की भाषा सारे देश की माध्यम भाषा …

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रूप परिवर्तन के कारण एवं दिशाएं

भाषा निरन्तर परिवर्तनशील या विकाशील है। भाषा के विकास के साथ-साथ शब्द-रूपों में परिवर्तन होना स्वाभाविक हैं यही भाषा विज्ञाान में रूप परिवर्तन कहलाता है। रूप परिवर्तन के कारण रूप परिवर्तन के कारण ‘रूप’ का सम्बन्ध ध्वनियों से है।  1. सरलीकरण की प्रवृत्ति – सरलीकरण की प्रवृति मानव की वृत्ति रही है। साथ ही कठिनता से सरलता …

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शब्द किसे कहते हैं/शब्द के कितने भेद होते हैं

ध्वनियों के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिससे कोई अर्थ व्यक्त होता हो। अर्थ ही शब्द का प्रधान लक्षण है। जिस ध्वनि समूह से कोई अर्थ नहीं निकलता वह ध्वनि समूह शब्द नहीं है। उदाहरणत: क, म, ल, ध्वनियाँ हैं जिनका अपने आप में कोई अर्थ नहीं है। किन्तु इन तीनों को मिलाकर “कमल” ध्वनि …

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ध्वनि परिवर्तन के कारण एवं दिशाएं

ध्वनि परिवर्तन का अर्थ किसी भी भाषा के विकास पर विचार करते हुए हम देखते हैं कि उसके प्राचीन और नवीन रूप में पर्याप्त अन्तर आ गया है। यह अन्तर उसमें हुए अनेक प्रकार के परिवर्तनों को सूचित करता है। किसी शब्द में कहीं कोई नयी ध्वनि आ मिली है तो कहीं कोई ध्वनि लुप्त हो …

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ध्वनि उत्पत्ति की प्रक्रिया या ध्वनि की उत्पत्ति कैसे होती है?

जब दो वस्तुओं के आपस में टकराने से वायु में कंपन हो और कर्ण-पटह तक पहुँचने से इसका अनुभव हो, तो उसे ध्वनि कहते हैं। प्रत्येक ध्वनि में कंपन होती है और प्रत्येक कंपन में ध्वनि होती है। कभी-कभी हाथ, पैर, डाली या पत्ती हिलने पर ध्वनि का आभास नहीं होता है। इसका कारण है- ध्वनि …

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ध्वनि का अर्थ, परिभाषा और उसका वैज्ञानिक आधार

किन्हीं दो या दो से अधिक वस्तुओं के  आपस में टकराने से वायु में कंपन होता है। जब यह कंपन कानों तक पहुँचता है, तो इसे ध्वनि कहते हैं। ध्वनि का अर्थ ध्वनि का सामान्य अर्थ है- आवाज, गूँज, नाद, कोलाहल। मेघ गरजते हैं, तूफान चिंघाड़ता है, पशु रम्भते हैं, पक्षी चहचहाते हैं, प्रकृति के अन्य …

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