सामाजिक शोध का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं चरण

सामाजिक घटनाओं एवं समस्याओं के सम्बन्ध में नये ज्ञान की प्राप्ति हेतु व्यवस्थित अन्वेषण को हम सामाजिक शोध कहते हैं, जिसके सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक उद्देश्य होते हैं। शोध की सम्पूर्ण प्रक्रिया विविध चरणों से गुजरती हुई पूर्ण होती है। वस्तुनिष्ठता से युक्त सामाजिक शोध से न केवल विषय की समझ विकसित होती है, बल्कि नए ज्ञान …

Read more

शोध प्रारूप क्या है शोध प्रारुप के प्रकार?

‘‘क्या तथ्य इकट्ठा करना है, किनसे, कैसे और कब तक इकट्ठा करना है और प्राप्त तथ्यों को कैसे विश्लेषित करना है कि योजना शोध प्रारूप है।’’ शोध प्रारूप शोध की ऐसी रूपरेखा होती है, जिसे वास्तविक शोध कार्य को प्रारम्भ करने के पूर्व व्यापक रूप से सोच-समझ के बाद तैयार किया जाता है।  शोध की प्रस्तावित …

Read more

सर्वोदय का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, तत्व एवं विशेषताएं

सर्वोदय ऐसी समाज रचना चाहता है जिसमें वर्ण, वर्ग, धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर किसी समुदाय का न तो संहार हो, न बहिष्कार हो। सर्वोदय का अर्थ सर्वोदय अर्थात् सबका उदय, सभी का विकास। सर्वोदय भारत का पुराना आदर्श है। विनोबा जी ने कहा है, सर्वोदय का अर्थ है- सर्वसेवा के माध्यम से समस्त …

Read more

मन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

मन की हम मात्र कल्पना कर सकते हैं। इसको न तो किसी ने देखा है और न ही हम इसकी कल्पना कर सकते हैं।’’ दूसरे शब्दों में मस्तिष्क के विभिन्न अंगों की प्रक्रिया का नाम मन है। मन का अर्थ मन शब्द का प्रयोग कई अर्थों में किया जाता है। जैसे- मानस, चित्त, मनोभाव तथा मत। लेकिन …

Read more

व्यक्तित्व का अर्थ, परिभाषा, एवं व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक

साधारणतः व्यक्तित्व का अर्थ व्यक्ति के बाह्य रूप, रंग तथा शारीरिक गठन आदि से लगाया जाता है। दैनिक जीवन में प्रायः हम यह सुना करते हैं कि अमुक व्यक्ति का व्यक्तित्व बड़ा अच्छा है, प्रभावशाली है या खराब है। अच्छे व्यक्तित्व का अभिप्राय यह है कि उस व्यक्ति की शारीरिक रचना सुन्दर है, वह स्वस्थ एवं …

Read more

वैयक्तिक अध्ययन पद्धति क्या है ?

वैयक्तिक अध्ययन पद्धति सामाजिक शोध में तथ्य संकलन की एक महत्वपूर्ण विधि है। इसका प्रयोग विविध सामाजिक विज्ञानों में कई दशकों से होता आया है। अनेकों विद्धानों ने अपने अध्ययनों में इस पद्धति का प्रयोग किया है। यह पद्धति किसी भी सामाजिक इकाई का उसकी सम्पूर्णता एवं गहनता में अध्ययन करती है। इसके द्वारा किया गया …

Read more

स्वामी दयानन्द सरस्वती का जीवन परिचय

दयानंद सरस्वती ब्रह्म को निराकार, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान एवं सर्वज्ञ मानते हैं। साथ ही वे जीवात्माओं एवं पदार्थों के स्वतंत्र अस्तित्व को भी स्वीकार करते है। उनके अनुसार ब्रह्म या ईश्वर इस ब्रह्माण्ड का कर्ता है, पदार्थ जन्य इसके उपादान का कारण है और जीवात्माएँ इसके सामान्य कारण। अर्थात् पदार्थ जन्म जगत भी वास्तविक है, यर्थाथ है। …

Read more

सहयोग का अर्थ, परिभाषा, महत्व एवं प्रकार

जब व्यक्ति समान उद्देश्य के लिए एक साथ कार्य करते हैं तो उनके व्यवहार को सहयोग कहते हैं। सहयोग व्यक्ति की मौलिक आवश्यकता है क्योंकि इससे उसकी आवश्यकताओं की संतुष्टि तथा उद्देश्यों की पूर्ति होती है। व्यक्ति चेतन रूप से सहयोगिक क्रिया में भाग लेता है। सहयोग की परिभाषा ग्रीन, ए डब्लू ,‘‘सहयोग दो या अधिक व्यक्तियों …

Read more

प्रत्यक्षवाद क्या है इसकी मूल मान्यताएं एवं विशेषताएं

प्रत्यक्षवाद का अर्थ सामाजिक घटनाओं का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण करके किसी निष्कर्ष तक पहुँचना है। प्राकृतिक विज्ञानों का विकास तेजी से इसी कारण हुआ कि इनके द्वारा विभिन्न पदार्थों का अध्ययन कल्पना के आधार पर न करके निरीक्षण, परीक्षण के आधार पर किया जाता है। वैज्ञानिक इस आधार पर कार्य करते है कि सभी पदार्थ …

Read more

कार्ल मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद की संक्षेप में विवेचना

ऐतिहासिक भौतिकवाद मार्क्स के विचारों की धूरी है। यह सिद्धांत इतिहास, संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन की सभी आदर्शवादी व्याख्याओं को नकारता है। मानवशास्त्रीय दर्शन पर आधारित यह सिद्धांत इतिहास की व्याख्या मानव द्वारा सामाजिक विश्व के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिये किये गये आर्थिक प्रयत्नों और मूलभूत आर्थिक विभिन्नताओं के कारण उत्पन्न वर्ग संघर्ष के …

Read more